दशहरा 2026: 20 अक्टूबर को रावण दहन का समय शहर-अनुसार, अपराह्न और शमी-अपराजिता पूजा मुहूर्त
दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। दशमी तिथि दोपहर 12:50 से लगती है और 21 अक्टूबर 14:11 तक रहती है। रावण दहन सूर्यास्त के बाद — दिल्ली में 17:45 के बाद, लगभग 18:15–19:15; शमी-अपराजिता पूजा अपराह्न 13:13–15:29 में।
दशहरा (विजयादशमी) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। हमारे पंचांग इंजन के अनुसार दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 पर शुरू होती है और 21 अक्टूबर दोपहर 14:11 तक रहती है। रावण दहन सूर्यास्त के बाद होता है — दिल्ली में सूर्यास्त 17:45 पर है, इसलिए दहन आम तौर पर लगभग 18:15 से 19:15 के बीच होगा। ठीक समय आपकी स्थानीय रामलीला समिति तय करती है। शमी-अपराजिता पूजा और शस्त्र पूजा अपराह्न में होती है — दिल्ली में 13:13 से 15:29 तक।
नीचे 12 शहरों की table, शमी-अपराजिता पूजा की सरल विधि और तीन आम सवालों के जवाब हैं।
दशहरा 2026 की तारीख 20 अक्टूबर ही क्यों है?
हिंदू पंचांग में हर त्योहार तिथि से तय होता है। तिथि यानी चंद्रमा की गति पर आधारित एक दिन। यह अंग्रेज़ी तारीख की तरह आधी रात को नहीं बदलती, बल्कि दिन में किसी भी समय शुरू और खत्म हो सकती है। इसी वजह से एक तिथि अक्सर दो अंग्रेज़ी तारीखों पर फैल जाती है।
2026 में यही हो रहा है। दशमी तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 पर शुरू होती है और 21 अक्टूबर दोपहर 14:11 तक चलती है। यानी दशमी दोनों दिन मौजूद है। तो दशहरा किस दिन?
परंपरा के अनुसार विजयादशमी उस दिन मनाई जाती है, जिस दिन अपराह्न में दशमी तिथि हो। 20 अक्टूबर को दिल्ली में अपराह्न 13:13 से 15:29 तक है, और यह पूरा समय दशमी में पड़ता है। 21 अक्टूबर को दशमी 14:11 पर, यानी अपराह्न के बीच में ही खत्म हो जाती है। इसलिए दशहरा 20 अक्टूबर को है। तारीख, कथा और महत्व की विस्तृत जानकारी दशहरा 2026: तारीख, मुहूर्त और विजयादशमी का महत्व लेख में है।
| तारीख | सूर्योदय पर तिथि (दिल्ली) | तिथि का समय | पर्व |
|---|---|---|---|
| 19 अक्टूबर, सोमवार | शुक्ल अष्टमी | 18 अक्टूबर 08:28 से 19 अक्टूबर 10:52 | दुर्गा अष्टमी · महानवमी |
| 20 अक्टूबर, मंगलवार | शुक्ल नवमी | 19 अक्टूबर 10:52 से 20 अक्टूबर 12:50 | विजयादशमी (दशहरा) |
| 21 अक्टूबर, बुधवार | शुक्ल दशमी | 20 अक्टूबर 12:50 से 21 अक्टूबर 14:11 | — |
ध्यान दें: 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि है और दशमी दोपहर 12:50 से लगती है। इसीलिए पंचांग में उस दिन 'नवमी' लिखा दिख सकता है, पर पर्व विजयादशमी ही है। अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं — इसकी पूरी जानकारी दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026 लेख में है।
20 अक्टूबर का बाकी पंचांग (दिल्ली, हमारे इंजन से):
- सूर्योदय 06:25, सूर्यास्त 17:45, चंद्रोदय 14:18
- नक्षत्र: श्रवण (तीसरा पाद)
- सूर्य तुला राशि में, चंद्रमा मकर राशि में
अपराह्न क्या है और दशहरे में इसका महत्व क्यों?
अपराह्न दिन का एक हिस्सा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पाँच बराबर भागों में बाँटें, तो चौथा भाग अपराह्न कहलाता है। हर शहर में सूर्योदय-सूर्यास्त अलग होने से यह समय थोड़ा आगे-पीछे रहता है।
ज्योतिष परंपरा में विजयादशमी की मुख्य पूजाएँ — शमी पूजा, अपराजिता पूजा और शस्त्र पूजा — इसी अपराह्न में की जाती हैं। इसीलिए नीचे की table में सिर्फ़ सूर्यास्त नहीं, अपराह्न का समय भी दिया है।
शहर-अनुसार सूर्यास्त और अपराह्न का समय (20 अक्टूबर 2026)
यह समय हमारे पंचांग इंजन से निकाला गया है। अपराह्न = सूर्योदय के बाद दिन की लंबाई का 3/5 से 4/5 भाग। सूर्यास्त का समय रावण दहन का आधार है, क्योंकि पुतला सूर्यास्त के बाद ही जलाया जाता है।
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | अपराह्न (पूजा का समय) |
|---|---|---|---|
| अहमदाबाद | 06:39 | 18:09 | 13:33–15:51 |
| बेंगलुरु | 06:11 | 17:57 | 13:15–15:36 |
| भोपाल | 06:20 | 17:49 | 13:13–15:31 |
| चेन्नई | 06:00 | 17:46 | 13:04–15:25 |
| दिल्ली | 06:25 | 17:45 | 13:13–15:29 |
| हैदराबाद | 06:11 | 17:50 | 13:10–15:30 |
| जयपुर | 06:30 | 17:52 | 13:19–15:36 |
| कोलकाता | 05:36 | 17:06 | 12:30–14:48 |
| लखनऊ | 06:09 | 17:32 | 12:59–15:15 |
| मुंबई | 06:35 | 18:11 | 13:33–15:52 |
| पटना | 05:51 | 17:16 | 12:42–14:59 |
| पुणे | 06:30 | 18:07 | 13:28–15:48 |
पूर्व के शहरों — कोलकाता, पटना — में सूर्यास्त एक घंटे पहले हो जाता है, इसलिए वहाँ पूजा और दहन दोनों जल्दी होंगे। पश्चिम के शहरों — मुंबई, अहमदाबाद, पुणे — में सब कुछ देर से।
विजय मुहूर्त लगभग कब है?
विजय मुहूर्त अपराह्न के बीच का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसे परंपरा में शस्त्र पूजा और नए काम की शुरुआत के लिए विशेष माना गया है। इसे ऊपर की table से खुद निकाल सकते हैं: अपने शहर के अपराह्न का मध्य बिंदु लें और उसके लगभग 24 मिनट आगे-पीछे का समय विजय मुहूर्त है। जैसे दिल्ली में अपराह्न 13:13–15:29 है, तो विजय मुहूर्त लगभग 14:00 से 14:45 के बीच माना जा सकता है। यह अनुमानित समय है; पूरा अपराह्न ही पूजा के लिए उपयुक्त है।
दशहरे के दिन क्या-क्या कब करें?
पूरे दिन का क्रम सीधा है: सुबह तैयारी, अपराह्न में पूजा, शाम को रावण दहन।
- सुबह (सूर्योदय के बाद): स्नान, घर और पूजा-स्थान की सफ़ाई। जिन्होंने नवरात्रि का व्रत रखा है, वे अपने कुल-रिवाज के अनुसार समापन करें। नौ दिनों का पूरा क्रम नवरात्रि 2026 का 9-दिन कैलेंडर में है।
- अपराह्न (दिल्ली 13:13–15:29): शमी पूजा, अपराजिता पूजा और शस्त्र पूजा। विजय मुहूर्त इसी के बीच में पड़ता है।
- सूर्यास्त के बाद (दिल्ली 17:45 के बाद): रामलीला का अंतिम अंक और रावण दहन। आम तौर पर सूर्यास्त के 30 से 90 मिनट बाद पुतले में आग लगाई जाती है।
शमी और अपराजिता पूजा कैसे करें?
पहले दो शब्द समझ लें। शमी एक पेड़ है (खेजड़ी)। मान्यता है कि यह विजय और सौभाग्य का प्रतीक है; महाभारत की कथा के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र इसी वृक्ष में छिपाए थे। कई क्षेत्रों में दशहरे पर शमी के पत्ते 'सोना' कहकर बाँटे जाते हैं। अपराजिता का अर्थ है 'जो कभी हारी नहीं' — यह नीले फूल वाली एक बेल भी है और देवी का एक रूप भी, जिनकी पूजा परंपरा में विजय के लिए की जाती है।
सरल विधि, जो घर पर भी हो सकती है:
- अपराह्न में शमी के पेड़ के पास जाएँ। पेड़ न मिले तो शमी की टहनी या कुछ पत्ते पूजा-स्थान में रखें।
- जल चढ़ाएँ, रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें, दीपक जलाएँ।
- मन में विजय, धैर्य और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें। परंपरा में शमी को प्रणाम करके कुछ पत्ते घर लाए जाते हैं और परिवार-मित्रों को दिए जाते हैं।
- अपराजिता पूजा: परंपरा के अनुसार यह घर या बस्ती की सीमा पर, या घर के पूजा-स्थान में, देवी अपराजिता का ध्यान करके की जाती है। नीले अपराजिता के फूल मिलें तो अर्पित करें, न मिलें तो कोई भी ताज़ा फूल।
- शस्त्र पूजा: अपने काम के साधन — कलम, किताब, वाहन, औज़ार, दुकान का तराज़ू, laptop — साफ़ करके तिलक करें और दीपक दिखाएँ। यह उस साधन के प्रति आभार है, जिससे आपकी आजीविका चलती है।
- शाम को सूर्यास्त के बाद रामलीला मैदान में रावण दहन देखें।
न कोई खास सामग्री ज़रूरी है, न कोई गिनती। भाव सच्चा हो, इतना काफ़ी है।
रावण दहन का समय: अपने शहर में कैसे तय करें?
रावण दहन का कोई एक पंचांग-मुहूर्त नहीं होता; यह एक सार्वजनिक आयोजन है। नियम बस इतना है कि पुतला सूर्यास्त के बाद जलाया जाता है। ज़्यादातर मैदानों में यह सूर्यास्त के 30 से 90 मिनट बाद होता है — पहले रामलीला का अंतिम दृश्य, फिर आतिशबाज़ी, फिर पुतले में आग।
इसलिए table से अपने शहर का सूर्यास्त देखें और उसमें 30 से 90 मिनट जोड़ें। जैसे मुंबई में सूर्यास्त 18:11 है, तो दहन लगभग 18:40 से 19:40 के बीच; कोलकाता में सूर्यास्त 17:06 है, तो लगभग 17:35 से 18:35 के बीच। सही समय हमेशा स्थानीय समिति के पोस्टर या घोषणा से मिलाएँ, क्योंकि बड़े मैदानों में भीड़ और कार्यक्रम के हिसाब से समय आगे-पीछे होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दशमी तिथि 21 अक्टूबर को भी है?
हाँ। दशमी 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 से 21 अक्टूबर दोपहर 14:11 तक है, इसलिए 21 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी ही होगी। लेकिन विजयादशमी का निर्णय सूर्योदय से नहीं, अपराह्न से होता है। 20 अक्टूबर को पूरा अपराह्न दशमी में है; 21 को दशमी अपराह्न के बीच में ही समाप्त हो जाती है। इसलिए दशहरा 20 अक्टूबर को है। अगर आपके क्षेत्र की समिति ने कोई और दिन घोषित किया हो, तो उसका पालन करें।
20 अक्टूबर को श्रवण नक्षत्र है — इसका क्या मतलब है?
नक्षत्र यानी आकाश का वह तारा-समूह, जिसमें चंद्रमा उस समय होता है। हमारे इंजन के अनुसार 20 अक्टूबर को दिल्ली में सूर्योदय के समय श्रवण नक्षत्र (तीसरा पाद) है। ज्योतिष परंपरा में दशमी तिथि के साथ श्रवण नक्षत्र का योग विजयादशमी के लिए विशेष शुभ माना गया है। 2026 में यह योग बन रहा है, यानी परंपरा के अनुसार इस साल का दशहरा पूजा और नए काम की शुरुआत के लिए और भी अनुकूल है। इसे शुभ संकेत की तरह लें, गारंटी की तरह नहीं।
रावण दहन कितने बजे होगा?
सूर्यास्त के 30 से 90 मिनट बाद। दिल्ली में सूर्यास्त 17:45 है, तो लगभग 18:15 से 19:15 के बीच। अपने शहर का सूर्यास्त ऊपर की table में देखें और स्थानीय रामलीला समिति के समय से मिलाएँ।
20 अक्टूबर की सुबह उस दिन का पूरा पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ समय — हमारे दैनिक पंचांग पेज पर आपके शहर के अनुसार मिल जाएगा।