नवंबर 2026 पंचांग: दिवाली सप्ताह, शुभ दिन, छठ और विवाह मुहूर्त कैलेंडर

नवंबर 2026 त्योहारों का सबसे घना महीना है — 1 नवंबर के रवि पुष्य योग से लेकर 8 नवंबर की दिवाली, 15 की छठ पूजा और 20 नवंबर से खुलते विवाह सीज़न तक। इस लेख में हर तिथि का दृक-सत्यापित मुहूर्त और उस दिन क्या करना है, दोनों एक साथ।

नवंबर 2026 पूरे साल का सबसे घना महीना है — एक ही महीने में दिवाली सप्ताह, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह और देव दिवाली, सब कुछ। सबसे पहले वह उत्तर जो हर कोई खोज रहा है: दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है — 9 नवंबर को नहीं। और छोटी दिवाली का उत्तर "7 या 8?" नहीं, बल्कि "दोनों" है — दीये 7 की शाम, अभ्यंग स्नान 8 की सुबह। आगे इसे विस्तार से समझाया गया है।

इस लेख की सभी तिथियाँ और मुहूर्त दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर, पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार दिए गए हैं। आपके शहर का सटीक समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है — अपने स्थान का दैनिक पंचांग आप पंचांग पेज पर देख सकते हैं। अक्टूबर के व्रत-त्योहार पीछे छूट गए हों तो अक्टूबर 2026 का पूरा पंचांग भी उपलब्ध है।

नवंबर 2026 के मुख्य दिन एक नज़र में

  • 1 नवंबर (रविवार): अहोई अष्टमी + रवि पुष्य योग — व्रत भी, खरीदारी का महायोग भी
  • 6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस — पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक
  • 7 नवंबर (शनिवार): छोटी दिवाली के दीये इसी शाम + मासिक शिवरात्रि
  • 8 नवंबर (रविवार): सुबह नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान, शाम को दिवाली लक्ष्मी पूजा (मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक)
  • 10 नवंबर (मंगलवार): गोवर्धन पूजा / अन्नकूट
  • 11 नवंबर (बुधवार): भाई दूज
  • 15 नवंबर (रविवार): छठ पूजा का संध्या अर्घ्य
  • 20 नवंबर (शुक्रवार): देवउठनी एकादशी — चातुर्मास समाप्त, विवाह सीज़न शुरू
  • 21 नवंबर (शनिवार): तुलसी विवाह
  • 24 नवंबर (मंगलवार): कार्तिक पूर्णिमा / देव दिवाली + गुरु नानक जयंती

छोटी दिवाली 7 को है या 8 को? — असली उत्तर: दोनों

हर साल की तरह इस बार भी यही प्रश्न सबसे ज़्यादा पूछा जाएगा, इसलिए इसे शुरू में ही साफ़ कर देते हैं। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10:48 से 8 नवंबर की सुबह 11:28 तक रहेगी। नरक चतुर्दशी की दो रस्में दो अलग-अलग कालों में होती हैं, इसलिए वे दो दिनों में बँट जाती हैं:

  • दीये जलाना — 7 नवंबर की शाम: छोटी दिवाली के दीये प्रदोष काल में जलाए जाते हैं, और 7 की शाम चतुर्दशी प्रदोष में मौजूद है। इसी दिन मासिक शिवरात्रि भी है।
  • अभ्यंग स्नान — 8 नवंबर की सुबह: तेल-उबटन का यह स्नान अरुणोदय काल में चतुर्दशी रहते किया जाता है। मुहूर्त सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक है (चंद्रोदय सुबह 5:41 पर)।

यानी दोनों तिथियाँ सही हैं — बस रस्म अलग-अलग है। और ध्यान रहे: अभ्यंग स्नान की उसी शाम, यानी 8 नवंबर को, बड़ी दिवाली की लक्ष्मी पूजा भी है। इस साल नरक चतुर्दशी की सुबह और दिवाली की शाम एक ही तारीख़ पर पड़ रही हैं।

दिवाली 8 नवंबर को ही क्यों, 9 को क्यों नहीं?

लक्ष्मी पूजा उस दिन होती है जिस दिन अमावस्या तिथि प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) को स्पर्श करे। अमावस्या 8 नवंबर की सुबह 11:28 पर शुरू होकर 9 नवंबर की दोपहर 12:32 पर समाप्त हो जाएगी। 9 की शाम तक अमावस्या रहेगी ही नहीं, जबकि 8 की पूरी शाम अमावस्या में है। इसलिए दिवाली निर्विवाद रूप से रविवार, 8 नवंबर को है।

8 नवंबर के मुहूर्त: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक (यही वृषभ लग्न का काल भी है, जो स्थिर लग्न होने से लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है)। प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 बजे तक रहेगा। घर और प्रतिष्ठान — दोनों की पूजा इसी खिड़की में कर लें।

दिवाली सप्ताह: दिन-प्रतिदिन पंचांग

1 नवंबर (रविवार) — अहोई अष्टमी + रवि पुष्य योग: संतान की मंगलकामना का व्रत रखने वाली माताओं के लिए पूजा मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक है। तारों के दर्शन लगभग शाम 6:00 बजे होंगे; जो चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं, उनके लिए चंद्रोदय रात 11:40 पर है। इसी दिन पुष्य नक्षत्र रविवार को पड़ने से रवि पुष्य योग बन रहा है, साथ में सर्वार्थ सिद्धि योग भी — धनतेरस से पहले सोना, वाहन या निवेश की बोहनी करने का यह शास्त्रीय दिन है। भीड़ से बचकर बड़ी खरीदारी इसी दिन निपटाने की योजना बनाएँ। व्रत की पूरी विधि के लिए हमारा करवा चौथ 2026 लेख भी उपयोगी रहेगा, क्योंकि अहोई का ढाँचा उसी परंपरा का है।

5 नवंबर (गुरुवार) — रमा एकादशी: कार्तिक कृष्ण पक्ष की यह एकादशी दिवाली से ठीक पहले पड़ती है। व्रत रखें, विष्णु पूजन करें और घर की दिवाली-तैयारियों का संकल्प इसी दिन से लें।

6 नवंबर (शुक्रवार) — धनतेरस: त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:48 तक है। पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक; प्रदोष काल शाम 5:32 से 8:09 बजे तक। इसी दिन धन्वंतरि जयंती और प्रदोष व्रत भी है। इस दिन क्या करें: शाम को यम दीप दक्षिण दिशा में रखें, कुबेर-लक्ष्मी पूजन करें, और नया बर्तन, सोना-चाँदी या झाड़ू घर लाएँ। खरीदारी दिनभर हो सकती है, पूजा प्रदोष में ही करें।

7 नवंबर (शनिवार) — छोटी दिवाली के दीये + मासिक शिवरात्रि: शाम को घर के बाहर चौदह दीये जलाएँ। शिव-भक्त रात्रि में मासिक शिवरात्रि का पूजन भी कर सकते हैं।

8 नवंबर (रविवार) — नरक चतुर्दशी स्नान + दिवाली: सुबह 5:41 से 6:38 के बीच अभ्यंग स्नान, शाम 5:54 से 7:50 के बीच लक्ष्मी-गणेश पूजन। दिन में घर की अंतिम सजावट और रंगोली; पूजा के बाद दीपदान।

9 नवंबर (सोमवार) — कोई पर्व नहीं: अमावस्या दोपहर 12:32 पर समाप्त हो जाती है और प्रतिपदा का पर्व-काल अगले दिन मिलता है, इसलिए यह बीच का खाली दिन है। पंचांग में इस दिन कोई त्योहार नहीं है — इसे विश्राम और सफ़ाई का दिन रखें। कहीं "9 नवंबर को गोवर्धन पूजा" लिखा दिखे तो वह भ्रम है।

10 नवंबर (मंगलवार) — गोवर्धन पूजा / अन्नकूट: प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक रहेगी, इसलिए प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक ही पूजा का समय है — इस दिन देर करने की गुंजाइश नहीं है। गोबर से गोवर्धन बनाकर अन्नकूट का भोग लगाएँ।

11 नवंबर (बुधवार) — भाई दूज: तिलक का शास्त्रसम्मत समय अपराह्न 1:10 से 3:20 बजे तक है (द्वितीया 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक)। इस दिन अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग साथ बन रहे हैं — भाई-बहन के बीच उपहारों के लेन-देन और किसी नए काम की शुरुआत के लिए भी यह दिन उत्तम है।

छठ पूजा 2026: चार दिन का पूरा क्रम

दिवाली सप्ताह के तुरंत बाद छठ का महापर्व आता है। षष्ठी तिथि 14 नवंबर रात 11:23 से 16 नवंबर रात 2:00 बजे तक रहेगी। चारों दिन इस प्रकार हैं:

  • 13 नवंबर (शुक्रवार) — नहाय-खाय: स्नान कर लौकी-भात का सात्विक भोजन; इसी दिन विनायक चतुर्थी भी है।
  • 14 नवंबर (शनिवार) — खरना: दिनभर उपवास, संध्या में गुड़ की खीर का प्रसाद; इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू।
  • 15 नवंबर (रविवार) — संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य — दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:27 पर। घाट पर इससे पहले पहुँच जाएँ। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।
  • 16 नवंबर (सोमवार) — उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य — सूर्योदय सुबह 6:45 पर; इसके बाद पारण। इसी शाम 7:43 बजे वृश्चिक संक्रांति भी है — सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

देवउठनी एकादशी और विवाह सीज़न की शुरुआत

देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को है। यहाँ तिथि का गणित समझने लायक है: एकादशी तिथि 20 नवंबर सुबह 7:15 से 21 नवंबर सुबह 6:31 तक है — यानी वह किसी भी दिन के सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती। ऐसे में व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन तिथि का अधिकांश भाग हो, इसलिए व्रत 20 नवंबर को ही रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं

21 नवंबर (शनिवार) को तुलसी विवाह है — द्वादशी तिथि में तुलसी जी और शालिग्राम का विवाह कराने की परंपरा है। इसे विवाह सीज़न का प्रतीकात्मक शुभारंभ माना जाता है।

इसके बाद 22 नवंबर (रविवार) को प्रदोष व्रत के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और 24 नवंबर को भी सर्वार्थ सिद्धि योग है — सगाई, रोका या ख़रीदारी जैसे कार्यों के लिए ये दिन सहायक हैं। पर एक बात स्पष्ट रहे: विवाह की तिथि केवल सामान्य पंचांग देखकर तय नहीं होती — वर-वधू की कुंडली मिलाकर, दोनों के ग्रह-गोचर देखकर ही व्यक्तिगत मुहूर्त निकलता है। अपनी जन्म कुंडली यहाँ निःशुल्क बनाएँ, और विवाह मुहूर्त के व्यक्तिगत निर्धारण के लिए हमारे ज्योतिषियों से परामर्श ले सकते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली — 24 नवंबर

पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात 11:42 से शुरू होकर 24 नवंबर की रात तक रहेगी, इसलिए स्नान-दान और देव दिवाली — दोनों मंगलवार, 24 नवंबर को मनाए जाएँगे। इस दिन क्या करें: प्रातः पवित्र नदी-स्नान (या घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान), दीपदान और अन्न-वस्त्र का दान। संध्या समय नदी-घाट या घर के आँगन में दीये जलाएँ — काशी के घाटों पर इसी शाम देव दिवाली का भव्य दीपोत्सव होता है। इसी दिन गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) भी है, और सर्वार्थ सिद्धि योग होने से यह दान-पुण्य व नई शुरुआत के लिए महीने के सबसे शुभ दिनों में गिना जाएगा।

नवंबर 2026 में खरीदारी और शुभ कार्यों के योग

  • 1 नवंबर — रवि पुष्य + सर्वार्थ सिद्धि: महीने का सबसे बड़ा खरीदारी योग; सोना, वाहन, संपत्ति की बोहनी के लिए सर्वश्रेष्ठ।
  • 6 नवंबर — धनतेरस: धातु, बर्तन, आभूषण की पारंपरिक खरीद।
  • 11 नवंबर — अमृत सिद्धि + सर्वार्थ सिद्धि: नए काम की शुरुआत और लेन-देन के लिए उत्तम।
  • 15 नवंबर — सर्वार्थ सिद्धि: छठ के संध्या अर्घ्य का दिन; पूजा-सामग्री से जुड़े संकल्पों के लिए शुभ।
  • 22 नवंबर — सर्वार्थ सिद्धि + प्रदोष व्रत: देवउठनी के बाद पहला बड़ा शुभ योग।
  • 24 नवंबर — कार्तिक पूर्णिमा + सर्वार्थ सिद्धि: दान, स्नान और नई शुरुआत का दिन।

नवंबर 2026 का पूरा व्रत-त्योहार कैलेंडर

  • 1 नवंबर (रविवार): अहोई अष्टमी; रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि
  • 5 नवंबर (गुरुवार): रमा एकादशी
  • 6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, प्रदोष व्रत
  • 7 नवंबर (शनिवार): छोटी दिवाली के दीये, मासिक शिवरात्रि
  • 8 नवंबर (रविवार): नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान (सुबह) + दिवाली लक्ष्मी पूजा (शाम)
  • 10 नवंबर (मंगलवार): गोवर्धन पूजा / अन्नकूट
  • 11 नवंबर (बुधवार): भाई दूज; अमृत सिद्धि + सर्वार्थ सिद्धि
  • 13 नवंबर (शुक्रवार): विनायक चतुर्थी; छठ नहाय-खाय
  • 14 नवंबर (शनिवार): छठ खरना
  • 15 नवंबर (रविवार): छठ पूजा संध्या अर्घ्य; सर्वार्थ सिद्धि
  • 16 नवंबर (सोमवार): छठ उषा अर्घ्य व पारण; वृश्चिक संक्रांति (शाम 7:43)
  • 17 नवंबर (मंगलवार): मासिक दुर्गाष्टमी
  • 20 नवंबर (शुक्रवार): देवउठनी एकादशी; चातुर्मास समाप्त
  • 21 नवंबर (शनिवार): तुलसी विवाह
  • 22 नवंबर (रविवार): प्रदोष व्रत; सर्वार्थ सिद्धि
  • 24 नवंबर (मंगलवार): कार्तिक पूर्णिमा, देव दिवाली, गुरु नानक जयंती; सर्वार्थ सिद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 कब है? रविवार, 8 नवंबर 2026 को। लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक (दिल्ली)।

छोटी दिवाली कब है — 7 या 8 नवंबर? दीये 7 नवंबर की शाम जलाए जाएँगे और अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह 5:41 से 6:38 के बीच होगा। दोनों दिन सही हैं, रस्में अलग-अलग हैं।

धनतेरस 2026 कब है? शुक्रवार, 6 नवंबर को। पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक।

छठ पूजा 2026 कब है? संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर को (सूर्यास्त शाम 5:27) और उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर की सुबह (सूर्योदय 6:45)। नहाय-खाय 13 और खरना 14 नवंबर को है।

नवंबर 2026 में शादियाँ कब से शुरू होंगी? देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) से चातुर्मास समाप्त होते ही विवाह सीज़न खुल जाता है; 21 नवंबर को तुलसी विवाह है। व्यक्तिगत विवाह मुहूर्त कुंडली मिलान से ही तय होता है।

नवंबर का हर सप्ताह किसी न किसी बड़े पर्व से भरा है — तारीख़ें अभी से नोट कर लें और रोज़ का शुभ चौघड़िया व तिथि देखने के लिए दैनिक पंचांग देखते रहें। किसी विशेष कार्य का व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाना हो तो परामर्श बुक करें — शुभ समय पर किया गया संकल्प ही पूरा फल देता है।

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