कल से सावन शुरू: पहले दिन की जल-अभिषेक विधि और शुभ समय
उत्तर भारत में सावन 30 जुलाई, गुरुवार से आरंभ। पहले दिन की सरल जल-अभिषेक विधि, शुभ समय और वे छोटी ग़लतियाँ जो नहीं करनी चाहिए — सब यहाँ।
कल — गुरुवार, 30 जुलाई 2026 — से उत्तर भारत में सावन आरंभ हो रहा है (पूर्णिमांत पंचांग), जो 28 अगस्त तक चलेगा। पहला दिन पूरे महीने की नींव रखता है, और इसके लिए चाहिए बहुत कम: पास के शिव मंदिर में — या घर पर ही — एक सरल जल-अभिषेक।
पहले दिन का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले): सबसे शांत और उत्तम समय, अगर संभव हो।
- सुबह से दोपहर तक: दोपहर से पहले कभी भी अभिषेक शुभ है।
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के तुरंत बाद): शिव जी को विशेष प्रिय — अगर सुबह जल्दी न हो पाए।
सूर्योदय और राहु काल हर शहर में थोड़ा अलग होता है — जाने से पहले अपने शहर का पंचांग देख लें।
पहले दिन की सरल अभिषेक विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें; पीतल या तांबे के लोटे में जल लें।
- छोटा-सा संकल्प लें: महीने का नाम, और इस सावन आप क्या प्रार्थना कर रहे हैं।
- शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए धीमी, पतली धारा में जल चढ़ाएँ।
- 3 बेलपत्र (चिकनी सतह लिंग की ओर), सफ़ेद फूल और हो सके तो कच्चा दूध अर्पित करें।
- दीपक जलाएँ और ॐ नमः शिवाय का 108 (या कम से कम 11) बार जप करें।
वे छोटी ग़लतियाँ जो अक्सर होती हैं
- शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती — बेलपत्र चढ़ाया जाता है।
- शिव जी को हल्दी अर्पित नहीं की जाती।
- जल हमेशा धीमी धारा में — छिड़काव नहीं; अभिषेक ही ध्यान है।
सावन 2026 की मुख्य तिथियाँ (उत्तर भारत)
- सावन आरंभ: गुरुवार, 30 जुलाई
- सावन सोमवार व्रत: 3, 10, 17 और 24 अगस्त
- सावन समाप्त: 28 अगस्त
दक्षिण और पश्चिम भारत अमांत पंचांग मानते हैं — वहाँ श्रावण लगभग दो सप्ताह बाद आरंभ होगा। पूरा क्षेत्रवार कैलेंडर हमारी सावन 2026 सोमवार व्रत गाइड में है।