अहोई अष्टमी
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जो माताएँ संतान की दीर्घायु और मंगल के लिए रखती हैं — करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से आठ दिन पहले। पार्वती के रूप अहोई माता की पूजा दीवार पर गेरू से बने चित्र के सामने होती है, जिसमें व्रत की कथा से जुड़े स्याहु और उसके बच्चे भी बनाए जाते हैं। दिनभर का उपवास चंद्रमा से नहीं, तारा दर्शन से — संध्या के पहले तारों से — खोला जाता है, क्योंकि इस तिथि पर चंद्रोदय मध्यरात्रि के पास होता है। माताएँ चाँदी की स्याहु माला पहनती हैं, जिसमें वर्षों के साथ मोती जुड़ते जाते हैं।
अगली तिथि: 2026-11-01
vidhi
प्रातः स्नान करें और संतान का नाम लेकर संकल्प करें — यह व्रत उनकी दीर्घायु और मंगल के लिए है, और शाम को तारे निकलने तक चलता है।,साफ दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएँ — माता की आकृति और पास में स्याहु व उसके बच्चे — अथवा उसी स्थान पर छपा हुआ अहोई चित्र लगाएँ।,चित्र के पास जल से भरा करवा गेहूँ या कलश पर रखें, और चाँदी की स्याहु माला साथ में रखें।,संध्या को तारों से पहले — प्रदोष काल में — पूजा करें: रोली, अक्षत, पुष्प, घी का दीपक, और भोग में आठ पूरियाँ हलवे के साथ अथवा दूध-भात।,हथेली में गेहूँ के सात दाने लेकर अहोई की कथा सुनें — संभव हो तो घर की सबसे बड़ी महिला से।,कथा के बाद स्याहु माला पहनें; हथेली के दाने बाद में गाय को दें या अनाज के भंडार में रख दें।,तारे निकलने पर करवे से उन्हें अर्घ्य दें, अहोई माता के चित्र के दर्शन करें, और उसके बाद ही व्रत खोलें।,बड़ों के चरण स्पर्श करें और बायना — फल, वस्त्र या दक्षिणा — सास अथवा किसी बड़ी महिला को दें।katha
एक साहूकार की पत्नी के सात बेटे थे। दिवाली से पहले वह घर लीपने के लिए जंगल के पास मिट्टी खोदने गई, और खुरपी का वार स्याहु की मांद पर जा पड़ा — उसका एक बच्चा मारा गया। स्याहु माता विलाप करती रही, और उसी दिन से साहूकारनी के बेटे एक-एक कर मरने लगे, यहाँ तक कि सातों चले गए। टूटी हुई स्त्री ने गाँव की एक वृद्धा से अपना दुख कहा। वृद्धा ने कहा — ऋण स्याहु और उसकी माँ का है, और उसे चुकाने का दिन है अहोई अष्टमी। कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उसने दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया, पास में स्याहु और उसके बच्चे; दिनभर व्रत रखा, हाथ जोड़कर क्षमा माँगी, और तारे निकलने पर अर्घ्य दिया। अहोई माता द्रवित हुईं; स्याहु माँ ने क्षमा किया; एक-एक कर सातों बेटे लौट आए। इसी विश्वास में माताएँ यह व्रत रखती हैं — कि अहोई माता संतान की रक्षा करती हैं, और सच्चे मन से माँगी गई क्षमा सुनी जाती है।mantra
[object Object]samagri
दीवार पर गेरू से बना अहोई माता का चित्र, अथवा स्याहु और उसके बच्चों सहित छपा चित्र,चाँदी की स्याहु माला — स्याहु की आकृति चाँदी के मोतियों में गुँथी हुई,जल से भरा करवा, और उसे रखने के लिए गेहूँ या कलश,रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन और पुष्प,रुई की बाती वाला घी का दीपक और धूप,भोग के लिए आठ पूरियाँ हलवे के साथ, अथवा दूध-भात,कथा के समय हथेली में रखने के लिए गेहूँ के सात दाने,बायना — फल, वस्त्र या दक्षिणा — बड़ी महिलाओं के लिएआगामी तिथियां
- 2026-11-01
- 2026-11-02