भाई दूज
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया, जब बहन भाई के माथे पर तिलक करती है और भाई उसके घर, उसके हाथ का बना भोजन करता है। यह दिन यमुना द्वारा अपने भाई यम को भोजन कराने और बदले में मिले वरदान से जुड़ा है, इसीलिए शास्त्रों में इसे यम द्वितीया भी कहा गया है। दिवाली के पाँच दिनों का समापन इसी भाई-बहन के बंधन से होता है, जैसे श्रावण में रक्षाबंधन से उसका स्मरण होता है। महाराष्ट्र में यह भाऊबीज और नेपाल तथा पहाड़ों में भाई टीका कहलाता है।
अगली तिथि: 2026-11-11
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प्रातः स्नान करें — भाई और बहन दोनों — और जहाँ यमुना या कोई नदी पास हो, वहाँ इस दिन साथ स्नान विशेष पुण्यदायी माना गया है।,बहन थाली तैयार करे: रोली, अक्षत, कलावा, सूखा नारियल (गोला), मिठाई और घी का दीपक — मुहूर्त से पहले सब तैयार रहे, ताकि तिलक के समय कोई हड़बड़ी न हो।,चावल के आटे से चौक बनाएँ और भाई को पाटे या आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बिठाएँ, सिर पर रुमाल या वस्त्र रखें।,रोली और अक्षत का तिलक करें, दाहिनी कलाई पर कलावा बाँधें, और हाथों में सूखा गोला दें।,भाई की आरती उतारें, मिठाई खिलाएँ और उसकी दीर्घायु की प्रार्थना करें — इस दिन का संकल्प बहन का होता है, भाई के लिए।,अपने हाथ का बना भोजन परोसें और परोसते हुए भ्रातृ श्लोक कहें — कथा में यम इसी भोजन से प्रसन्न हुए थे, जो बहन के घर हुआ था।,भाई भेंट या दक्षिणा दे, बड़ी बहन के चरण छुए और उसकी रक्षा का वचन ले — इसी आदान-प्रदान से विधि पूर्ण होती है।katha
यम और यमुना सूर्य की संतानें थीं — भाई और बहन। यमुना बार-बार भाई को अपने घर भोजन के लिए बुलातीं, पर अपने कठोर कार्य में बँधे यम टालते रहे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन वे अंततः आए। यमुना का आनंद अपार था — उन्होंने भाई को स्नान कराया, माथे पर तिलक किया और अपने हाथों से बनाया भोजन परोसा। प्रसन्न होकर यम ने वर माँगने को कहा। यमुना ने अपने लिए कुछ नहीं माँगा: बस इतना कि हर वर्ष इसी दिन वे उनके घर आएँ, और जो भाई इस तिथि पर बहन का तिलक लेकर उसके घर भोजन करे, उसे अकाल मृत्यु का भय न रहे। यम ने वर दिया, और कहा जाता है कि उस दिन उन्होंने अपने लोक के जीवों का दंड भी हल्का कर दिया। वही तिथि यम द्वितीया — भाई दूज — बन गई, और इस दिन भाई-बहन का यमुना में साथ स्नान उस पहली भाई दूज के दोनों भाई-बहनों को विशेष प्रिय माना गया है।mantra
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तिलक के लिए रोली या कुमकुम और अक्षत,भाई की कलाई के लिए कलावा (मौली),भाई के हाथ में देने के लिए सूखा नारियल (गोला),आरती की थाली हेतु घी का दीपक, धूप और पुष्प,मिठाई — और कई घरों में भाई का प्रिय व्यंजन, बहन के हाथ का बना,चौक के लिए चावल का आटा, और भाई के बैठने के लिए पाटा या आसन,सुपारी, पान और दक्षिणा — जैसी क्षेत्र की परंपरा हो,बहन के लिए भाई की ओर से भेंटआगामी तिथियां
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