धनतेरस

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी, दीपावली से दो दिन पहले — पाँच दिन के दीपोत्सव का पहला दिन। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन धन का ही नहीं, आरोग्य का भी है। घरों में शगुन के रूप में कोई धातु खरीदी जाती है, प्रदोष काल में धन्वंतरि सहित कुबेर-लक्ष्मी की पूजा होती है, और संध्या को मुख्य द्वार के बाहर यमराज के लिए दक्षिणमुखी दीपक रखा जाता है।

अगली तिथि: 2026-11-06

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प्रातः घर की सफाई करें — यह सफाई स्वयं पर्व का अंग है — स्नान करें, और संध्या के प्रदोष काल की पूजा का संकल्प लें।,दिन में चाहें तो शगुन की खरीदारी करें: कोई बर्तन, चाँदी का सिक्का, या केवल साबुत धनिया — राशि कितनी भी हो, भाव लक्ष्मी के स्वागत का रखें।,प्रदोष काल में चौकी पर लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धन्वंतरि के चित्र स्थापित करें, और पास में जल भरा कलश रखें जिस पर आम के पत्ते और नारियल हों।,सबसे पहले धन्वंतरि की पूजा करें — रोली, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य — और वर्षभर परिवार के आरोग्य की प्रार्थना करें।,फिर कुबेर और लक्ष्मी की पूजा करें: दिन की खरीदी वस्तु और घर की नकदी या गल्ला उनके सामने रखें, और भोग में खील-बताशे तथा मिठाई चढ़ाएँ।,ॐ धं धन्वन्तरये नमः का एक सौ आठ बार जप करें।,सूर्यास्त के बाद घर के किसी बड़े सदस्य से यम दीपक रखवाएँ — आटे या मिट्टी का दीपक, सरसों या तिल के तेल से — मुख्य द्वार के बाहर, लौ दक्षिण दिशा की ओर, और यमराज को प्रणाम कर प्रार्थना करें कि अकाल मृत्यु घर से दूर रहे।,घर में तेरह दीपक जलाएँ, आरती करें और प्रसाद बाँटें।

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देवताओं और असुरों ने जब क्षीरसागर का मंथन किया, तो उसमें से एक-एक कर रत्न निकले — कामधेनु, ऐरावत, स्वयं लक्ष्मी — और सबसे अंत में देवताओं के वैद्य धन्वंतरि, हाथों में अमृत कलश लिए। वे कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रकट हुए, और धनतेरस का पहला अर्थ यही है: धन से पहले आरोग्य का धन। यम दीपक की अपनी कथा है। राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह की चौथी रात सर्पदंश से उसकी मृत्यु होगी। वह रात आई तो उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उसे सोने ही नहीं दिया। उसने अपने सारे आभूषण और सोने-चाँदी के सिक्के द्वार पर ढेर कर दिए, कोने-कोने में दीपक जलाए, और गीतों-कहानियों से पति को जगाए रखा। यमराज सर्प का रूप धरकर आए, पर दीपों की चकाचौंध और ढेर की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं; वे उसी ढेर पर बैठकर रातभर गीत सुनते रहे और भोर होते ही राजकुमार को लिए बिना लौट गए। उसी रात से इस संध्या का यम दीपक चला आता है — आदर से रखा गया एक दीपक, इस प्रार्थना के साथ कि अकाल मृत्यु घर से दूर रहे।

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लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धन्वंतरि के चित्र या प्रतिमाएँ,यम दीपक के लिए आटे या मिट्टी का दीपक, सरसों या तिल का तेल और रुई की बाती,पूजा के लिए घी के दीपक और घर के लिए तेरह दीपक,रोली, अक्षत, चंदन, हल्दी और ताज़े पुष्प,भोग के लिए खील-बताशे, मिठाई और साबुत धनिया,जल भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल,दिन में खरीदी धातु की वस्तु — बर्तन या सिक्का — पूजा में रखने हेतु (ऐच्छिक, शगुन के रूप में),धूप, कपूर, और कुबेर पूजा के लिए घर के सिक्के या गल्ला

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