नवरात्रि
देवी की नौ रात्रियों का पर्व, जो मुख्य रूप में वर्ष में दो बार आता है — वसंत में चैत्र नवरात्रि और आश्विन की शारदीय नवरात्रि, जो बड़ा सार्वजनिक पर्व है। आरंभ प्रतिपदा को घटस्थापना से होता है, नौ दिनों में दुर्गा के नौ रूपों की क्रम से उपासना चलती है, और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन से समापन होता है; नौवीं रात्रि के बाद विजयादशमी आती है। कई लोग पूरे नौ दिन फलाहार पर व्रत रखते हैं, कई केवल पहले और अंतिम दिन — दोनों मान्य परंपराएँ हैं। यह जितना व्यक्तिगत व्रत है, उतना ही पूरे घर का पर्व भी।
अगली तिथि: 2026-10-11
vidhi
प्रतिपदा की सुबह स्नान करें, ईशान कोण में पूजा स्थान स्वच्छ करें, और नौ दिनों का संकल्प लें — पूर्ण व्रत या केवल पहला और अंतिम दिन, जो भी निभाने जा रहे हैं।,घटस्थापना करें: चौड़े मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी बिछाकर उसमें जौ बोएँ (खेतरी), और ऊपर जल भरा कलश स्थापित करें — गले में मोली, मुख पर आम के पत्ते, और उन पर चुनरी में लिपटा नारियल।,कलश के पास दुर्गा की प्रतिमा या चित्र रखें, लाल चुनरी अर्पित करें, और दीपक जलाएँ — अखंड ज्योति तभी, जब घर में नौ दिन उसकी देखभाल हो सके; सुबह-शाम नया जलाया दीपक भी उतना ही पूर्ण है।,नौ दिनों में उस-उस दिन के स्वरूप की पूजा करें — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक क्रम से — लाल पुष्प, अक्षत, सिंदूर, धूप और उस दिन के भोग के साथ।,नवार्ण मंत्र का प्रतिदिन एक सौ आठ बार जप करें, और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें — जहाँ सप्तशती संभव न हो, वहाँ दुर्गा चालीसा।,सुबह-शाम आरती करें; खेतरी पर प्रतिदिन थोड़ा जल छिड़कें और जौ को नौ दिन बढ़ने दें।,अष्टमी या नवमी को — अपनी कुल परंपरा के अनुसार — कन्या पूजन करें: नौ कन्याओं के चरण धोएँ, तिलक करें, पूरी-चना-हलवा खिलाएँ और दक्षिणा दें; उनके साथ एक बालक को बटुक रूप में भोजन कराएँ।,नवमी को सप्तशती या नवार्ण मंत्र से हवन करें, और समापन पर खेतरी को जल में प्रवाहित करें या किसी वृक्ष की जड़ में रखकर व्रत खोलें।katha
महिषासुर को ब्रह्मा से वरदान मिला था कि कोई पुरुष या देवता उसे मार नहीं सकेगा, और इसी बल पर उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। देवताओं का क्रोध और असहायता एक तेज बनकर फूट पड़ी, और उस तेज से एक स्त्री ने रूप लिया — दुर्गा। हर देवता ने अपना अस्त्र उनके एक-एक हाथ में रखा: शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, वायु ने धनुष, इंद्र ने वज्र; हिमालय ने सवारी के लिए सिंह दिया। नौ रात्रियों तक देवी और महिषासुर का युद्ध चला — वह बार-बार रूप बदलता रहा, भैंसा, सिंह, हाथी, पुरुष — और अंतिम रात्रि देवी ने भैंसे को पैर से दबाकर उसका सिर काट दिया। उसी युद्ध की नौ रातें नवरात्रि हैं; उसके बाद की विजय विजयादशमी।\n\nशारदीय नवरात्रि से एक दूसरा सूत्र भी जुड़ा है। माना जाता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले राम ने आश्विन मास में दुर्गा की उपासना की — ऋतु से हटकर, इसीलिए इसे अकाल बोधन कहा गया — और युद्ध के लिए उनका आशीर्वाद पाया। इसीलिए रावण की पराजय का दिन, दशहरा, नौवीं रात्रि के ठीक बाद पड़ता है। और दिन-प्रतिदिन पूजे जाने वाले नौ रूप — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — एक ही शक्ति की नौ अवस्थाएँ माने गए हैं।mantra
[object Object]samagri
दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, और अर्पण के लिए लाल चुनरी,मिट्टी का कलश, स्वच्छ मिट्टी और खेतरी के लिए जौ,नारियल, आम के पत्ते, मोली और कलश के लिए लाल वस्त्र,लाल पुष्प — संभव हो तो गुड़हल — सिंदूर, अक्षत, चंदन और धूप,रुई की बाती वाला घी का दीपक; अखंड ज्योति रखनी हो तो अतिरिक्त घी और लंबी बाती,दैनिक पाठ के लिए दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा,फल, मिश्री और उस दिन का भोग; कन्या पूजन के लिए पूरी, चना और हलवा,नवमी हवन के लिए हवन सामग्री, आम की लकड़ी और कपूरआगामी तिथियां
- 2026-10-11
- 2026-10-12
- 2026-10-13
- 2026-10-14
- 2026-10-15