शरद पूर्णिमा
आश्विन मास की पूर्णिमा — वर्ष की वह एकमात्र रात जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण माना जाता है और उसकी किरणों में अमृत बरसने की मान्यता है। इस रात खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे चाँदनी में रखी जाती है और सुबह प्रसाद रूप में ग्रहण की जाती है। यही कोजागरा भी है — "को जागर्ति" अर्थात कौन जाग रहा है — जब लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरती हैं और जागते, दीपों से आलोकित घरों में प्रवेश करती हैं; और यही रास पूर्णिमा भी, जब वृंदावन में कृष्ण का महारास हुआ। यह पूरा पर्व दिन का नहीं, चंद्रोदय के बाद की रात का है।
अगली तिथि: 2026-10-25
vidhi
प्रातः स्नान करें, घर और पूजा स्थान की सफाई करें, और संध्या की लक्ष्मी पूजा तथा रात्रि जागरण का संकल्प लें।,संध्या को चौकी पर लाल या श्वेत वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और घी का दीपक जलाएँ।,गाय के दूध, चावल और मिश्री की खीर धीमी आँच पर बनाएँ, सूखे मेवे डालें — बर्तन जितना स्वच्छ हो उतना अच्छा, चाँदी का हो तो सर्वोत्तम।,चंद्रोदय के बाद ताँबे के लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य दें।,लक्ष्मी पूजन करें — श्वेत पुष्प या कमल, खील-बताशे, कमलगट्टा, धूप-दीप — और श्रीसूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।,खीर को खुले आकाश के नीचे वहाँ रखें जहाँ चाँदनी सीधी पड़ती हो, और उसे पतले मलमल के कपड़े से ढक दें।,कम से कम मध्यरात्रि तक भजन-कीर्तन या लक्ष्मी मंत्र के जप में जागरण करें।,प्रातः वही खीर देवी को अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण करें और परिवार तथा पड़ोस में बाँटें।katha
मान्यता है कि वर्ष की केवल इसी रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर उदय होता है, और उसकी किरणों के साथ अमृत बरसता है। इसीलिए दूध, चावल और मिश्री की धीमी आँच पर पकी खीर खुले आकाश के नीचे रखी जाती है — पतले मलमल से ढकी — और सुबह उस प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है जिसमें चाँदनी का अमृत उतर चुका है। इस रात का दूसरा नाम कोजागरा है — "को जागर्ति" से, अर्थात कौन जाग रहा है? कहा गया है कि लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर उतरकर यही पूछती चलती हैं, और जिन घरों में दीप जल रहे हों और लोग उनके भजन में जागे बैठे हों, वहीं प्रवेश करती हैं। यह जागरण किसी भय से नहीं है; जागते हुए मिलना ही इसका पूरा अर्थ है। और वृंदावन में यही रास पूर्णिमा है। इसी पूर्णिमा को यमुना तट पर कृष्ण की बाँसुरी बजी और महारास हुआ — भागवत कहती है कि वह रात स्वयं ब्रह्मा की रात जितनी लंबी कर दी गई, ताकि समाप्त ही न हो। अमृत, लक्ष्मी और रास — तीन कारण, एक रात; और तीनों चंद्रोदय के बाद के प्रहरों के हैं, दिन के नहीं।mantra
[object Object]samagri
लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र, और चौकी के लिए लाल या श्वेत वस्त्र,खीर के लिए गाय का दूध, चावल, मिश्री और सूखे मेवे,खीर का स्वच्छ बर्तन — चाँदी का हो तो उत्तम — और ढकने के लिए पतला मलमल,श्वेत पुष्प, संभव हो तो कमल, और खील-बताशे,रुई की बाती वाला घी का दीपक, धूप और कपूर,जप के लिए कमलगट्टे की माला,चंद्रमा को अर्घ्य देने हेतु ताँबे का लोटा,पान-सुपारी और दक्षिणाआगामी तिथियां
- 2026-10-25
- 2026-10-26