चित्रगुप्त पूजा 2026: 11 नवंबर, यम द्वितीया पर कलम-दवात पूजा की विधि और कथा

चित्रगुप्त पूजा 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है — यही दिन यम द्वितीया यानी भाई दूज का है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया 10 नवंबर 14:01 से 11 नवंबर 15:54 तक रहेगी। कायस्थ परिवारों में इस दिन कलम-दवात पूजा होती है।

चित्रगुप्त पूजा 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का दिन है, जिसे यम द्वितीया या भाई दूज भी कहते हैं। हमारे पंचांग इंजन के अनुसार द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 14:01 से शुरू होकर 11 नवंबर को 15:54 तक रहेगी। कायस्थ परिवारों में इसी दिन कलम-दवात पूजा होती है — कलम, स्याही और नए पन्ने की पूजा।

चित्रगुप्त पूजा 2026 की तारीख और समय क्या है?

तिथि का मतलब है चंद्र-पंचांग का एक दिन। 11 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि चल रही है, इसलिए त्योहार के लिए पूरा दिन द्वितीया का माना जाता है। तिथि उसी दिन दोपहर 15:54 पर समाप्त होती है।

दिल्ली के लिए 11 नवंबर 2026 का पंचांग इस तरह है:

विवरण11 नवंबर 2026 (दिल्ली)
दिनबुधवार
तिथिकार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया / भाई दूज)
द्वितीया तिथि का समय10 नवंबर 14:01 से 11 नवंबर 15:54 तक
सूर्योदय06:41
सूर्यास्त17:28
चंद्रोदय08:31
नक्षत्रअनुराधा (चौथा चरण)
सूर्य राशि / चंद्र राशिसूर्य तुला में, चंद्र वृश्चिक में

ये समय दिल्ली के हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त कुछ मिनट आगे-पीछे रहेंगे, पर तिथि का समय पूरे भारत में लगभग यही रहता है।

पूजा किस समय करें?

अगर आप तिथि का कड़ाई से पालन करते हैं, तो पूजा 11 नवंबर को 15:54 से पहले पूरी कर लें। सूर्योदय 06:41 से 15:54 तक का पूरा समय द्वितीया के भीतर है।

बहुत से परिवार सुबह भाई दूज का तिलक करते हैं और दोपहर में चित्रगुप्त पूजा। परंपरा में यह दिन तिथि बीतने के बाद भी मनाया जाता है, इसलिए अगर देर दोपहर या शाम को ही समय मिले, तो भी पूजा की जाती है। दोनों तरीके प्रचलित हैं; अपने घर की रीति को प्राथमिकता दें।

भगवान चित्रगुप्त कौन हैं?

परंपरा के अनुसार चित्रगुप्त हर प्राणी के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं। लेखा-जोखा यानी अच्छे-बुरे कामों का हिसाब। इसी कारण कलम, दवात (स्याही की शीशी) और बही-खाता उनके प्रतीक हैं, और उनके चित्रों में यही दिखते हैं।

कायस्थ समाज चित्रगुप्त को अपना कुल-देवता मानता है — यानी वंश के आदि पुरुष और रक्षक। लेखन, हिसाब-किताब, पढ़ाने और दफ़्तरी काम से जुड़े दूसरे लोग भी इस दिन उन्हें याद करते हैं।

यम द्वितीया, यानी भाई दूज का दिन, परंपरा में कर्म और उसके लेखे से भी जुड़ा माना गया है। इसीलिए लेखे के देवता की पूजा इसी तिथि पर होती है।

कलम-दवात पूजा की विधि क्या है?

कलम-दवात पूजा का अर्थ है कलम, स्याही और कागज़ को साक्षी बनाकर चित्रगुप्त की पूजा। विधि सरल है और घर पर लगभग आधे घंटे में हो जाती है। पंडित की ज़रूरत नहीं।

पूजा की सामग्री

  • एक कलम — नई हो तो अच्छा, वरना वही जिससे रोज़ लिखते हैं
  • दवात, यानी स्याही की शीशी (न हो तो केवल कलम भी पर्याप्त है)
  • सादा कागज़, या नई कॉपी / बही का पहला पन्ना
  • गंगाजल
  • कुमकुम या रोली
  • मिठाई, प्रसाद के लिए
  • दीपक और फूल (वैकल्पिक)

'कलम बंद' — पूजा से पहले न लिखने की रीति

कायस्थ घरों में इस दिन सुबह से पूजा तक कोई कुछ नहीं लिखता — न हिसाब, न दस्तखत, न डायरी। इसे 'पेन-डाउन' या कलम बंद कहते हैं। मान्यता है कि साल भर चली कलम को कुछ घंटे विराम दिया जाता है और पूजा के बाद शुभ शब्दों से उसे फिर शुरू किया जाता है।

पूजा के चरण

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा-स्थान पर चौकी या साफ़ कपड़ा बिछाएँ।
  2. उस पर कलम, दवात और कागज़ रखें। चित्रगुप्त जी का चित्र हो तो वह भी रखें।
  3. कलम और दवात पर गंगाजल छिड़कें। कुमकुम से तिलक करें।
  4. दीपक जलाएँ और फूल अर्पित करें।
  5. हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि आने वाले साल में जो भी लिखा जाए, वह सच्चा और साफ़ रहे।
  6. अब साल की पहली पंक्ति लिखें — 'श्री गणेशाय नमः' या 'ॐ चित्रगुप्ताय नमः'।
  7. उसी पन्ने पर बीते साल की आय-व्यय का संक्षेप लिखें: कुल कमाई, कुल खर्च और आगे के लिए एक संकल्प। अपना हिसाब चित्रगुप्त के सामने रखने की यही परंपरा है।
  8. मिठाई का भोग लगाएँ और सबको प्रसाद दें।

बच्चों को भी साथ बैठाएँ। उनसे अपनी कॉपी के पहले पन्ने पर 'श्री गणेशाय नमः' लिखवाना कई घरों की रीति है — इसी से कलम का संस्कार अगली पीढ़ी तक जाता है।

चित्रगुप्त की कथा क्या है?

कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने प्राणियों के कर्मों का लेखा रखने के लिए अपनी काया से चित्रगुप्त को प्रकट किया। काया का अर्थ है शरीर। इसी 'काया' शब्द से उनके वंशजों का नाम 'कायस्थ' पड़ा।

कथा के अनुसार यही कायस्थ समाज का मूल है, और इसीलिए कलम-दवात उनकी पहचान बनी। कथा के ब्योरे अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े अलग मिलते हैं, पर सार सब में एक है: चित्रगुप्त कर्मों के लेखक हैं और कलम उनका प्रतीक है।

यह कथा पीढ़ियों से घरों में सुनी-सुनाई जाती है। यहाँ उसे उसी रूप में दिया गया है, किसी ग्रंथ के अध्याय का हवाला दिए बिना।

भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा एक ही दिन — क्रम कैसे रखें?

11 नवंबर को दो पर्व एक साथ हैं। भाई दूज का तिलक और चित्रगुप्त पूजा, दोनों द्वितीया तिथि में करने की रीति है। ज़्यादातर कायस्थ घर दिन को इस क्रम में रखते हैं:

समयक्या करें
सुबह, 06:41 सूर्योदय के बादस्नान; कलम बंद — पूजा तक कुछ न लिखें
सुबह से दोपहर तकभाई दूज का तिलक और परिवार का भोजन
दोपहर, 15:54 से पहलेचित्रगुप्त पूजा और साल की पहली लिखावट
शाम, 17:28 सूर्यास्त के बाददीपक, परिवार के साथ प्रसाद

भाई दूज के तिलक की पूरी विधि और कथा हमारे भाई दूज 2026 लेख में है। यह दीपावली के पाँच दिनों का आख़िरी दिन भी है — धनतेरस से भाई दूज तक की सारी तारीखें दीपावली 2026 के पाँच-दिन कैलेंडर में एक जगह हैं।

अगर परिवार दोपहर के बाद ही जुट पाता है, तो पूजा शाम को भी कर ली जाती है। परंपरा में दिन का महत्व तिथि के मिनटों से ज़्यादा है। जितना हो सके, श्रद्धा से करें — यही पर्याप्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चित्रगुप्त पूजा सिर्फ कायस्थ ही करते हैं?

परंपरा कायस्थ समाज की है, पर यह पूजा कोई भी कर सकता है। लिखने, पढ़ाने, हिसाब रखने या दफ़्तर के काम से जुड़े लोग भी इस दिन अपनी कलम की पूजा करते हैं।

15:54 के बाद ही समय मिले तो क्या करें?

तिथि के हिसाब से द्वितीया 15:54 पर समाप्त होती है। पर दिन 11 नवंबर ही रहता है और परंपरा में पूरा दिन मान्य है। शाम को शांत मन से पूजा कर लें।

पहले पन्ने पर क्या लिखें?

पहली पंक्ति में 'श्री गणेशाय नमः' या 'ॐ चित्रगुप्ताय नमः'। फिर बीते साल की आय-व्यय का छोटा हिसाब और आने वाले साल के लिए एक प्रार्थना या संकल्प।

क्या इस दिन दफ़्तर का काम या दस्तखत टाल देना चाहिए?

रीति 'कलम बंद' की है — पूजा तक न लिखने की। ज़रूरी काम हो तो पूजा सुबह जल्दी कर लें और फिर दिन भर लिखें। यह नियम श्रद्धा का है, बंधन का नहीं।

चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज में क्या संबंध है?

दोनों कार्तिक शुक्ल द्वितीया, यानी यम द्वितीया, को होते हैं। भाई दूज परिवार का पर्व है और चित्रगुप्त पूजा कर्म और कलम का। एक ही दिन दोनों निभाना कायस्थ घरों की पुरानी परंपरा है।

11 नवंबर का पूरा पंचांग — तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और सूर्यास्त — उस दिन हमारे दैनिक पंचांग पेज पर देखा जा सकता है।

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