वृश्चिक संक्रांति 2026: 17 नवंबर को सूर्य वृश्चिक में — मंडल काल, सबरीमला और 12 राशियों पर असर

वृश्चिक संक्रांति 2026 मंगलवार, 17 नवंबर को है। सूर्य 16 नवंबर की रात (लगभग शाम 7 बजे) तुला से वृश्चिक में जाता है, और 17 नवंबर की सुबह सूर्योदय पर वृश्चिक में होता है। इसी दिन केरल में सबरीमला का मंडल काल और तमिल कार्तिगै महीना शुरू होता है।

वृश्चिक संक्रांति 2026 मंगलवार, 17 नवंबर 2026 को मानी जाएगी। हमारे पंचांग इंजन के अनुसार सूर्य तुला राशि छोड़कर वृश्चिक में 16 नवंबर की रात, लगभग शाम 7 बजे (दिल्ली समय) प्रवेश करता है। 17 नवंबर की सुबह सूर्योदय (06:46) पर सूर्य वृश्चिक में होता है। इसी दिन केरल में वृश्चिकम महीना और सबरीमला का मंडल काल शुरू होता है, और तमिल कैलेंडर में कार्तिगै 1 पड़ता है।

वृश्चिक संक्रांति 2026 की सही तारीख और समय क्या है?

संक्रांति का मतलब है सूर्य का एक राशि से अगली राशि में जाना। हर महीने एक संक्रांति होती है। इस बार सूर्य तुला से वृश्चिक में जा रहा है, इसलिए इसे वृश्चिक संक्रांति कहते हैं।

हमारे इंजन के अनुसार 16 नवंबर को सुबह 6 बजे सूर्य तुला के 29.44° पर था, और 17 नवंबर को सुबह 6 बजे वृश्चिक के 0.45° पर। इन दो अंकों के बीच से संक्रांति का क्षण 16 नवंबर की शाम लगभग 7 बजे निकलता है। यह अनुमानित समय है; अलग पंचांग इसे कुछ मिनट आगे-पीछे दिखा सकते हैं।

क्षण 16 नवंबर की शाम का है, लेकिन सूर्योदय पर सूर्य वृश्चिक में पहली बार 17 नवंबर को होता है। ज़्यादातर परंपराएं संक्रांति का दिन और सौर महीने की पहली तारीख सूर्योदय से गिनती हैं। इसलिए 17 नवंबर ही वृश्चिक संक्रांति, वृश्चिकम 1 और कार्तिगै 1 है। कुछ कैलेंडर 16 नवंबर भी लिख सकते हैं, क्योंकि क्षण उसी दिन पड़ता है।

16 और 17 नवंबर का पंचांग (दिल्ली)

विवरण16 नवंबर (सोमवार)17 नवंबर (मंगलवार)
सूर्य राशितुलावृश्चिक
सूर्योदय06:4506:46
सूर्यास्त17:2617:25
तिथि (सूर्योदय पर)कार्तिक शुक्ल सप्तमीकार्तिक शुक्ल अष्टमी
तिथि कब से कब तक16 नवंबर 02:01 से 17 नवंबर 04:1917 नवंबर 04:19 से 18 नवंबर 06:04
नक्षत्रश्रवण (पद 2)धनिष्ठा (पद 1)
चंद्र राशिमकरमकर
चंद्रोदय12:1612:48

समय दिल्ली के हैं। आपके शहर में सूर्योदय-सूर्यास्त कुछ मिनट अलग होंगे।

तुला से वृश्चिक में जाना क्यों खास माना जाता है?

ज्योतिष परंपरा में तुला सूर्य की नीच राशि है। नीच राशि यानी वह राशि जहां ग्रह को कमज़ोर या असहज माना जाता है। सूर्य 18 अक्टूबर से 16 नवंबर तक तुला में रहा। उस दौर की बात तुला संक्रांति 2026 के लेख में विस्तार से है।

वृश्चिक मंगल की राशि है। नीच राशि से निकलने को परंपरा में सूर्य के लिए राहत की तरह देखा जाता है। मान्यता है कि इस दौर में आत्मविश्वास, निर्णय-क्षमता और काम की तेज़ी थोड़ी लौटती है। यह प्रवृत्ति की बात है, गारंटी नहीं।

दक्षिण भारत में इस दिन क्या शुरू होता है?

उत्तर भारत में वृश्चिक संक्रांति एक शांत दिन है। केरल और तमिलनाडु में यह नए महीने की शुरुआत है, और केरल में साल के बड़े तीर्थ-मौसम की भी। हिंदी में इसकी चर्चा कम होती है।

केरल: वृश्चिकम 1 और सबरीमला का मंडल काल

मलयालम कैलेंडर सौर है, यानी महीना उस दिन बदलता है जब सूर्य राशि बदलता है। इस संक्रांति से मलयालम महीना वृश्चिकम शुरू होता है, और वृश्चिकम 1 से ही सबरीमला का मंडल काल।

मंडल काल यानी 41 दिन की वह अवधि जिसमें अयप्पा भक्त परंपरा के अनुसार व्रत-नियम रखते हैं और सबरीमला की पहाड़ी यात्रा करते हैं।

मंदिर कब खुलेगा और दर्शन-बुकिंग कैसे होगी, यह मंदिर की आधिकारिक सूचना के अनुसार ही देखें। यहां सिर्फ पंचांग की तारीख दी गई है।

तमिलनाडु: कार्तिगै महीने का पहला दिन

तमिल कैलेंडर भी सौर है। वृश्चिक संक्रांति के दिन तमिल महीना कार्तिगै शुरू होता है, यानी 17 नवंबर कार्तिगै 1 है। तमिल कार्तिगै और उत्तर भारत का कार्तिक नाम में एक जैसे लगते हैं, पर एक सूर्य से गिना जाता है और दूसरा चंद्र से।

उत्तर भारत में कार्तिक मास से इसका क्या संबंध है?

उत्तर भारत का कैलेंडर चंद्र मास पर चलता है। यहां कार्तिक मास 26 अक्टूबर से 24 नवंबर तक है, और वृश्चिक संक्रांति उसके बीच में पड़ती है। चंद्र गिनती में 17 नवंबर को कार्तिक शुक्ल अष्टमी है।

कार्तिक में स्नान-दान की परंपरा पहले से चल रही होती है। संक्रांति उस पर एक और शुभ अवसर जोड़ती है। कार्तिक के नियम और व्रतों की पूरी सूची यहां है।

पुण्य काल में क्या किया जाता है?

पुण्य काल यानी संक्रांति के क्षण के आस-पास का वह समय जिसे शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसमें स्नान, सूर्य को अर्घ्य (जल अर्पण) और सामर्थ्य के अनुसार दान किया जाता है।

इस बार क्षण 16 नवंबर की शाम का है, इसलिए 16 की शाम और 17 की सुबह सूर्योदय (06:46) के बाद, दोनों समय यह परंपरा निभाई जाती है। सटीक घड़ी अपने स्थानीय पंचांग से मिला लें; इसे तय करने के नियम पंचांगों में अलग हैं।

सूर्य की पूजा क्यों और कैसे की जाती है, इसका सरल परिचय सूर्य देव के महत्व वाले लेख में है।

12 राशियों पर सूर्य के वृश्चिक गोचर का असर

गोचर यानी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में चलना। सूर्य लगभग एक महीना वृश्चिक में रहेगा। अपनी चंद्र राशि (जो राशि आप राशिफल में देखते हैं) को 1 मानकर गिनें कि सूर्य आपके किस घर में है।

ये संकेत ज्योतिष परंपरा की सामान्य प्रवृत्तियां हैं। पूरी कुंडली से नतीजे बदलते हैं। इन्हें दिशा की तरह पढ़ें, फैसले की तरह नहीं।

राशिसूर्य किस घर मेंराशिसूर्य किस घर में
मेष8तुला2
वृषभ7वृश्चिक1
मिथुन6धनु12
कर्क5मकर11
सिंह4कुंभ10
कन्या3मीन9

मेष: सूर्य आठवें घर में

आठवां घर गहराई, शोध और छिपी बातों का माना जाता है। इस महीने काम की रफ़्तार थोड़ी धीमी लग सकती है। जल्दबाज़ी के फैसले टाल दें। पुराने काम पूरे करने, अपने भीतर देखने और स्वास्थ्य की दिनचर्या सुधारने के लिए यह समय उपयोगी माना जाता है।

वृषभ: सूर्य सातवें घर में

सातवां घर साझेदारी, विवाह और व्यापार-संबंधों का है। इस दौर में करीबी रिश्तों में अहं की खिंचतान संभव है। सामने वाले की बात पूरी सुनें, फिर जवाब दें। व्यापारिक साझेदारी में लिखित स्पष्टता रखें। धैर्य रखने वालों के लिए यह समय रिश्ता मज़बूत करने का भी माना जाता है।

मिथुन: सूर्य छठे घर में

छठा घर प्रतिस्पर्धा, सेवा और दिनचर्या का है। परंपरा में सूर्य को यहां अच्छा माना जाता है। कामकाज में अनुशासन बढ़ता है और प्रतियोगी माहौल में आपकी स्थिति सुधर सकती है। नौकरी और परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए मेहनत का फल दिखने की संभावना बनती है।

कर्क: सूर्य पांचवें घर में

पांचवां घर बुद्धि, संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता का है। नई चीज़ सीखने में मन लग सकता है। बच्चों के मामलों में अपनी बात थोपने से बचें, संवाद रखें। रचनात्मक काम, प्रस्तुति और मंच से जुड़े लोगों के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।

सिंह: सूर्य चौथे घर में

चौथा घर घर-परिवार, मां, सुख और संपत्ति का है। घर के मामलों में समय देना पड़ सकता है। मन थोड़ा बेचैन रहे तो आराम और नींद पर ध्यान दें। मकान या वाहन से जुड़ा बड़ा फैसला हो तो उसे बिना जल्दबाज़ी, सोच-समझकर लें।

कन्या: सूर्य तीसरे घर में

तीसरा घर साहस, संवाद, भाई-बहन और छोटी यात्राओं का है। परंपरा में यह सूर्य के लिए अच्छी स्थिति मानी जाती है। पहल करने का हौसला बढ़ सकता है। रुके हुए काम शुरू करने, बातचीत से रास्ता निकालने और छोटी यात्राओं के लिए यह महीना सहायक माना जाता है।

तुला: सूर्य दूसरे घर में

दूसरा घर धन, वाणी और परिवार का है। बोलने में तेज़ी आ सकती है, इसलिए शब्द चुनकर बोलें। आय और खर्च का हिसाब रखें। पिछले महीने सूर्य आपकी ही राशि में था; अब ध्यान स्वयं से हटकर संसाधनों और घर की बातों पर जाता है।

वृश्चिक: सूर्य आपकी ही राशि में

पहला घर आपकी पहचान, ऊर्जा और शरीर का है। आत्मविश्वास और आपकी बात का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ में अहं और गर्मी भी बढ़ती है, इसलिए ठंडे दिमाग से बात करें। स्वास्थ्य की दिनचर्या नियमित रखें और पानी पर्याप्त लें।

धनु: सूर्य बारहवें घर में

बारहवां घर खर्च, दूर के स्थान, एकांत और आध्यात्म का है। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट बनाकर चलें। बाहरी दिखावे से ज़्यादा भीतरी शांति पर ध्यान जाए तो यह समय अच्छा बीतता है। सेवा, तीर्थ और ध्यान के लिए यह स्थिति परंपरा में अनुकूल मानी जाती है।

मकर: सूर्य ग्यारहवें घर में

ग्यारहवां घर लाभ, मित्र और बड़े भाई-बहन का है। परंपरा में यह सूर्य की अच्छी स्थिति है। आय के नए रास्ते, पुराने संपर्कों से मदद और सामाजिक पहचान बढ़ने की संभावना बनती है। किसी काम में सहयोग मांगने के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।

कुंभ: सूर्य दसवें घर में

दसवां घर कर्म, करियर और प्रतिष्ठा का है। यह सूर्य की सबसे मज़बूत परंपरागत स्थितियों में से एक है। काम में पहचान, वरिष्ठों से सराहना और ज़िम्मेदारी बढ़ने की संभावना है। ज़िम्मेदारी मिले तो लें, पर खुद पर ज़्यादा भार न डालें।

मीन: सूर्य नौवें घर में

नौवां घर धर्म, भाग्य, गुरु, पिता और लंबी यात्राओं का है। तीर्थ या धार्मिक यात्रा का मन बने तो यह महीना उसके लिए उपयुक्त माना जाता है। पिता या गुरु-तुल्य व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। उच्च शिक्षा से जुड़े फैसले भी इस दौर में स्पष्ट हो सकते हैं।

17 नवंबर को क्या करें?

  • सुबह सूर्योदय (दिल्ली में 06:46) के बाद स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।
  • सामर्थ्य के अनुसार अन्न या वस्त्र का दान करें; यह संक्रांति की पुरानी परंपरा है।
  • कार्तिक के जो नियम आप पहले से निभा रहे हैं, उन्हें जारी रखें।
  • सबरीमला जाने की योजना हो तो व्रत-नियम और दर्शन की जानकारी मंदिर की आधिकारिक सूचना से लें।

17 नवंबर का पूरा पंचांग, तिथि-नक्षत्र से राहुकाल और शुभ मुहूर्त तक, आपके शहर के हिसाब से हमारे दैनिक पंचांग में मिलेगा।

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