पहला सावन सोमवार (3 अगस्त): व्रत की पूरी विधि, कथा और फलाहार के नियम
पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026 को है। व्रत की पूरी विधि, संकल्प, कथा का नियम, फलाहार में क्या लें-क्या नहीं, और ज़रूरी समय — सब यहाँ।
पहला सावन सोमवार — सोमवार, 3 अगस्त 2026 — बस तीन दिन दूर। अगर व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो यह रही पूरी तैयारी: विधि, कथा, फलाहार के नियम और ज़रूरी समय।
सावन सोमवार का महत्व
सोमवार शिव जी का अपना दिन है, और सावन में इसका पुण्य कई गुना माना जाता है। 2026 के चारों सोमवार व्रत 3, 10, 17 और 24 अगस्त को हैं। अविवाहित भक्त अच्छे जीवनसाथी के लिए, और गृहस्थ घर की शांति व स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखते हैं।
व्रत संकल्प (सोमवार सुबह)
- सुबह जल्दी स्नान; स्वच्छ (हो सके तो सफ़ेद/हल्के) वस्त्र।
- दाएँ हाथ में जल लेकर संकल्प बोलें: अपना नाम, तिथि और उद्देश्य — "मैं सावन सोमवार का व्रत रख रहा/रही हूँ"।
- शिव मंदिर जाएँ, या घर पर चौकी सजाकर शिवलिंग/शिव-पार्वती चित्र रखें।
पूजा विधि (सरल और पूर्ण)
- शिवलिंग पर पहले जल, फिर कच्चा दूध, फिर जल — धीमी पतली धारा में।
- 3 बेलपत्र (चिकनी सतह लिंग की ओर), सफ़ेद फूल, अक्षत, और हो सके तो धतूरा/भांग अर्पित करें।
- दीपक-धूप जलाएँ; "ॐ नमः शिवाय" का जप — हो सके तो 108 बार।
- सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें — कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के तुरंत बाद) में छोटी आरती, फिर अपने नियम अनुसार व्रत खोलें।
फलाहार के नियम — क्या खा सकते हैं
- ले सकते हैं: फल, दूध, दही, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू/सिंघाड़े के आटे की चीज़ें, आलू, सेंधा नमक, सीमित चाय/कॉफ़ी।
- वर्जित: अनाज (गेहूँ, चावल, दाल), साधारण नमक, प्याज़-लहसुन, और मांस/मदिरा।
- शाम की पूजा के बाद एक समय भोजन (एक-भुक्त) आज का सबसे प्रचलित रूप है; निर्जला केवल अनुभवी और स्वस्थ लोगों के लिए।
किन्हें कोमल व्रत रखना चाहिए
गर्भवती महिलाएँ, मधुमेह रोगी, बुज़ुर्ग और नियमित दवा लेने वाले — दिन भर फल-दूध का सांकेतिक व्रत रखें। भक्ति मायने रखती है, कष्ट नहीं।
सभी तिथियाँ और क्षेत्रवार कैलेंडर: सावन 2026 सोमवार गाइड · पहले दिन की अभिषेक विधि: यहाँ पढ़ें।