सितंबर 2026 पंचांग: शुभ दिन, व्रत और त्योहार कैलेंडर
सितंबर 2026 एक ही महीने में गणेश उत्सव की धूम और पितृ पक्ष की शुरुआत लेकर आ रहा है। जानिए कौन से दिन नई शुरुआत के लिए शुभ हैं, कौन से केवल श्राद्ध-तर्पण के लिए, और हरतालिका तीज–गणेश चतुर्थी के दुर्लभ संयोग की सही तारीख।
सितंबर 2026 हिंदू पंचांग के दो बिल्कुल अलग रंगों को एक साथ समेटे हुए है। महीना भाद्रपद कृष्ण पक्ष से शुरू होता है, 11 सितंबर, शुक्रवार की भाद्रपद अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में गणेश उत्सव की धूम रहती है, और 26 सितंबर, शनिवार की पूर्णिमा के साथ ही महीना आश्विन कृष्ण पक्ष — यानी पितृ पक्ष — में प्रवेश कर जाता है। बीच में 17 सितंबर, गुरुवार को सुबह 07:52 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे (कन्या संक्रांति)। एक ओर जन्माष्टमी, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े पर्व, दूसरी ओर महीने के अंतिम दिनों से श्राद्ध की शुरुआत — इसलिए इस महीने "कौन सा दिन किस काम के लिए शुभ है" यह समझना बाकी महीनों से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। नीचे दी गई सभी तिथियां दिल्ली (उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग) के अनुसार हैं।
सितंबर 2026 के शुभ दिन एक नज़र में (Auspicious Days in September 2026)
अगर आप सिर्फ यह जानने आए हैं कि नई शुरुआत, खरीदारी या किसी शुभ संकल्प के लिए कौन से दिन सबसे अच्छे हैं, तो यह सूची आपके लिए सबसे ऊपर रख रहे हैं —
- 1 सितंबर, मंगलवार — अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ, और उसी दिन अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी। नई परियोजना शुरू करने, वाहन या संपत्ति से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ाने और विघ्न-नाश के संकल्प के लिए महीने का पहला ही दिन बहुत बलवान है।
- 13 सितंबर, रविवार — अमृत सिद्धि + सर्वार्थ सिद्धि योग। गणेश स्थापना से ठीक एक दिन पहले का यह संयोग मूर्ति, पूजा सामग्री और घर के लिए नई वस्तुएं खरीदने तथा उत्सव की तैयारियां शुरू करने के लिए उत्तम है।
- 14 सितंबर, सोमवार — गणेश चतुर्थी। स्थापना का मध्याह्न मुहूर्त (11:02–13:31) अपने आप में वर्ष के सबसे शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है; कोई भी नया कार्य गणपति स्थापना के साथ आरंभ करना श्रेष्ठ माना गया है।
- 17 सितंबर, गुरुवार — कन्या संक्रांति (07:52) + विश्वकर्मा पूजा + सर्वार्थ सिद्धि योग। औजार, मशीन, वाहन, कंप्यूटर — काम-धंधे से जुड़ी हर चीज की पूजा और नए उपकरण खरीदने के लिए यही दिन है।
- 27 सितंबर, रविवार — सर्वार्थ सिद्धि योग, पर ध्यान रहे: इसी दिन से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है (प्रतिपदा श्राद्ध)। यह योग श्राद्ध, तर्पण और पितृ कार्य निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए शुभ है — गृह प्रवेश, नई खरीदारी या किसी सांसारिक शुभारंभ के लिए नहीं।
- 29 सितंबर, मंगलवार — अमृत सिद्धि + सर्वार्थ सिद्धि योग, पितृ पक्ष के भीतर। यहां भी वही नियम लागू है: यह दिन पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों को बल देता है, इसे नए काम की शुरुआत के लिए न चुनें।
एक बात पूरे महीने पर लागू होती है — चातुर्मास चल रहा है, इसलिए सितंबर 2026 में विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है। देवशयन काल समाप्त होने के बाद ही विवाह मुहूर्त लौटेंगे।
पंचांग असल में देखता क्या है
पंचांग केवल त्योहारों की सूची नहीं है — यह हर दिन के पांच अंगों का हिसाब रखता है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ऊपर जिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग की बात हुई, वे किसी अलग कैलेंडर से नहीं आते; वे बनते हैं जब कोई विशेष वार किसी विशेष नक्षत्र से मिलता है। इसीलिए एक ही तिथि किसी वर्ष अत्यंत शुभ और किसी वर्ष साधारण हो सकती है। किसी भी दिन की तिथि, नक्षत्र, शुभ चौघड़िया और राहुकाल अपने शहर के अनुसार देखने के लिए हमारा दैनिक पंचांग उपलब्ध है — मुहूर्त हमेशा अपने स्थान के सूर्योदय से ही देखना चाहिए।
इस महीने के प्रमुख व्रत और उपवास
- 1 सितंबर, मंगलवार — अंगारकी संकष्टी चतुर्थी: मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी "अंगारकी" कहलाती है और वर्ष की सबसे फलदायी संकष्टी मानी जाती है। दिन भर व्रत, चंद्रोदय के बाद गणपति को अर्घ्य देकर पारण।
- 7 सितंबर, सोमवार — अजा एकादशी: भाद्रपद कृष्ण एकादशी। विष्णु पूजन और उपवास; मान्यता है कि यह व्रत कठिन समय में धैर्य और पुण्य दोनों लौटाता है।
- 9 सितंबर, बुधवार — प्रदोष व्रत: सूर्यास्त के आसपास के प्रदोष काल में शिव पूजन। संध्या दीपदान के साथ करें।
- 10 सितंबर, गुरुवार — मासिक शिवरात्रि: रात्रि जागरण और शिव अभिषेक का दिन; प्रदोष के अगले ही दिन पड़ने से यह जोड़ी शिव भक्तों के लिए विशेष है।
- 11 सितंबर, शुक्रवार — भाद्रपद अमावस्या: स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण के लिए। पितृ पक्ष से पहले की यह अमावस्या पूर्वजों के स्मरण की तैयारी जैसी है।
- 15 सितंबर, मंगलवार — ऋषि पंचमी: सप्तर्षियों का पूजन; विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाने वाला व्रत।
- 19 सितंबर, शनिवार — मासिक दुर्गाष्टमी: देवी दुर्गा का पूजन और उपवास।
- 22 सितंबर, मंगलवार — परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशी: मान्यता है कि योगनिद्रा में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं — चातुर्मास की एकादशियों में इसका विशेष स्थान है।
- 24 सितंबर, गुरुवार — प्रदोष व्रत: महीने का दूसरा प्रदोष; संध्या काल में शिव-पार्वती पूजन।
- 26 सितंबर, शनिवार — भाद्रपद पूर्णिमा: प्रोष्ठपदी पूर्णिमा। इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध होता है, यानी श्राद्ध कर्म की औपचारिक शुरुआत यहीं से मानी जाती है।
- 30 सितंबर, बुधवार — संकष्टी चतुर्थी: आश्विन मास की संकष्टी; चंद्र दर्शन के बाद पारण।
त्योहार और पर्व
महीने का पहला बड़ा पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी है — भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, जिसकी निशिता पूजा रात लगभग 23:57 से 00:43 के बीच होगी। यहां एक भ्रम दूर कर दें: कई लोग आदतन जन्माष्टमी अगस्त में खोजते हैं, पर 2026 में यह पर्व सितंबर के पहले सप्ताह में है। अगस्त के पंचांग में इसकी तारीख ढूंढ़ने वालों के लिए सही उत्तर यही है — 4 सितंबर।
इस वर्ष का सबसे खास संयोग 14 सितंबर, सोमवार को है, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। "13 या 14 सितंबर?" वाला प्रश्न स्वाभाविक है, क्योंकि तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 07:08 से शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 07:06 तक रहती है — पर उदया-व्यापिनी तृतीया 14 को मिलती है, इसलिए तीज का व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा (प्रातःकाल पूजा लगभग 06:05–07:06 तक, जब तक तृतीया रहती है)। उसी दिन मध्याह्न में चतुर्थी लग जाने से गणेश स्थापना का मुहूर्त 11:02 से 13:31 के बीच है। इस पूरे तिथि-गणित को विस्तार से हमने हरतालिका तीज 2026: 13 या 14 सितंबर? लेख में समझाया है।
यहीं से बारह दिन का गणेश उत्सव शुरू होता है — स्थापना से विसर्जन तक, 14 से 25 सितंबर। बीच में 17 सितंबर, गुरुवार को कन्या संक्रांति के साथ विश्वकर्मा पूजा है, जब कारखानों, दुकानों और दफ्तरों में औजारों और मशीनों का पूजन होता है। उत्सव का समापन 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन के साथ होगा — अनंत सूत्र बांधने की विधि और विसर्जन मुहूर्त की पूरी जानकारी अनंत चतुर्दशी 2026 लेख में दी गई है।
और फिर महीने का स्वर बदल जाता है। 26 सितंबर, शनिवार की पूर्णिमा श्राद्ध के बाद 27 सितंबर, रविवार से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष विधिवत आरंभ हो जाता है। जो परिवार दूर रहने या अन्य कारणों से घर पर श्राद्ध-तर्पण नहीं कर पाते, वे विधिपूर्वक पूजन हमारी ऑनलाइन पूजा सेवाओं के माध्यम से भी करवा सकते हैं — संकल्प आपके नाम और गोत्र से ही होता है।
अपने लिए सही समय कैसे पढ़ें
सितंबर 2026 को दो हिस्सों में बांटकर देखना सबसे व्यावहारिक है। 1 से 26 सितंबर तक का समय — विशेषकर 1, 13, 14 और 17 तारीख — नई शुरुआत, खरीदारी, गृह-संबंधी शुभ कार्यों और व्यापारिक निर्णयों के लिए खुला है; बस यह याद रखें कि चातुर्मास के कारण विवाह और उससे जुड़े संस्कार इस पूरे महीने स्थगित रहते हैं। 27 सितंबर से महीना पितृ पक्ष में है — इस अवधि में परंपरा नए शुभारंभ (गृह प्रवेश, बड़ी खरीदारी, नया व्यवसाय) से बचने की और पितरों के स्मरण, तर्पण व दान पर ध्यान देने की सलाह देती है। इसीलिए 27 और 29 सितंबर के सिद्धि योग "शुभ" होते हुए भी अपने स्वभाव में अलग हैं।
अंत में एक बात हमेशा दोहराने लायक है: पंचांग पूरे समाज के लिए एक जैसा है, पर आपका समय आपकी जन्म कुंडली से तय होता है। कोई दिन सामान्य रूप से शुभ होकर भी आपकी दशा-गोचर के हिसाब से साधारण हो सकता है, और इसका उल्टा भी। अपनी निःशुल्क कुंडली बनाकर अपनी वर्तमान दशा देखें, और अगर कोई बड़ा निर्णय — संपत्ति, करियर, संतान या स्वास्थ्य से जुड़ा — इसी महीने लेना है, तो एक बार हमारे ज्योतिषियों से परामर्श करके अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवा लें। महीने का नक्शा पंचांग देता है, रास्ता कुंडली दिखाती है।