मासिक शिवरात्रि
प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी — शिव की रात्रि। अधिकांश व्रतों के विपरीत इसमें पूजा दिन की नहीं, रात्रि की होती है, और श्रेष्ठ समय मध्यरात्रि का निशीथ काल है। फाल्गुन की शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है; शेष ग्यारह उसी विधि से, किंतु छोटे रूप में रखी जाती हैं।
अगली तिथि: 2026-09-10
देवता: शिव
vidhi
सूर्योदय पर स्नान करके संकल्प लें और दिनभर जल तथा फल पर व्रत रखें।,सायंकाल पुनः स्नान करके सूर्यास्त के बाद पूजा की तैयारी करें — यह संपूर्ण व्रत रात्रि की उपासना है।,शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें, अंत जल से करें, और धार धीमी तथा अटूट रखें।,बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन, भस्म और अक्षत अर्पित करें; घी का दीपक और धूप जलाएँ।,महामृत्युंजय मंत्र अथवा ॐ नमः शिवाय का एक सौ आठ बार जप करें।,जो सक्षम हों वे रात्रि के चारों प्रहर में पूजा करें — सूर्यास्त से सूर्योदय तक हर प्रहर में नया अभिषेक और अर्पण।,भजन और शिव कथा के साथ जागरण करें, और अगले दिन सूर्योदय के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने से पहले पारण करें।katha
एक शिकारी, जो ऋण में डूबा था, वन में गया और सांझ तक कुछ भी न मार सका। रात हुई — वह शिवरात्रि की रात्रि थी, यद्यपि उसे यह ज्ञात न था — और पशुओं के भय से वह एक तालाब के किनारे खड़े बेल वृक्ष पर चढ़कर टहनी पर बैठ गया, इस प्रतीक्षा में कि कोई हिरन जल पीने आए। जागते रहने के लिए वह रातभर वृक्ष से पत्ते तोड़-तोड़कर नीचे गिराता रहा। उस टहनी के नीचे, झाड़ियों में छिपा, एक शिवलिंग था; हर पत्ता उसी पर गिरता रहा। तीन बार हिरनी जल पीने आई, और हर बार उसने अपने परिवार के प्रति कर्तव्य पूरा करके लौट आने की विनती की, और हर बार उस शिकारी ने — जिसने दिनभर न कुछ खाया था, न पिया — उसे जाने दिया। इस प्रकार बिना किसी संकल्प के उससे उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र का अर्पण — तीनों हो गए। प्रातः होते-होते उसके भीतर कुछ बदल चुका था और उससे मारा ही न गया। हिरनी अपने पूरे परिवार सहित वचन के अनुसार लौट आई, और उसने उन्हें छोड़ दिया। शिव उस अनजाने व्रत से, और उससे भी अधिक उस करुणा से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उसे मुक्ति दी। यह कथा संयोग की प्रशंसा के लिए नहीं कही जाती। उसका आशय इस रात्रि का स्वभाव बताना है: शिवरात्रि पर जागते मन से अर्पित छोटी से छोटी वस्तु भी पूरी स्वीकार होती है, और देर से या भूल से आने वाला भी लौटाया नहीं जाता।mantra
[object Object]samagri
जल, गंगाजल, और पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद तथा शक्कर,बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद पुष्प,चंदन, भस्म, अक्षत और काला तिल,लंबी रात के लिए पर्याप्त रुई की बातियों सहित घी का दीपक, धूप और कपूर,भोग के लिए फल, दूध और सफेद मिठाई,रात्रि जप हेतु रुद्राक्ष माला और ऊन का आसनआगामी तिथियां
- 2026-09-10
- 2026-10-09
- 2026-12-07