शिव

शिव कल्याणकारी हैं — महादेव, जो पूर्ण हो चुके को विलीन करते हैं ताकि सृष्टि पुनः आरंभ हो सके। उनकी पूजा प्रायः शिवलिंग के निराकार स्वरूप में होती है, और उसमें जल, बेलपत्र और एक दीपक से अधिक कुछ नहीं चाहिए। सब देवताओं में उन्हें भोलेनाथ कहा गया है, क्योंकि वे आडंबर से नहीं, सरलता से प्रसन्न होते हैं। सोमवार उनका वार है और श्रावण (सावन) उनका मास। उनके तीन नियमित व्रत — सावन सोमवार, हर त्रयोदशी का प्रदोष, और कृष्ण चतुर्दशी की मासिक शिवरात्रि — के लिए न पुरोहित चाहिए, न खर्च। प्रातःकाल का जलाभिषेक और ॐ नमः शिवाय के पाँच अक्षर ही पूरी साधना हैं।

व्रत और त्योहार

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