चौघड़िया क्या है? दिन और रात का टेबल कैसे पढ़ें — शुभ, लाभ, अमृत, चर, रोग, काल, उद्वेग का मतलब
चौघड़िया दिन और रात को 8-8 बराबर हिस्सों में बाँटने की पंचांग विधि है; हर हिस्सा करीब डेढ़ घंटे का होता है। परंपरा में अमृत, शुभ, लाभ और चर नई शुरुआत के लिए अनुकूल हैं; रोग, काल और उद्वेग में नया काम टाला जाता है।
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ बराबर हिस्सों में बाँटने की पंचांग विधि है। हर हिस्सा करीब डेढ़ घंटे का होता है और उसका एक नाम होता है — अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल या उद्वेग। परंपरा में अमृत, शुभ, लाभ और चर को नया काम या यात्रा शुरू करने के लिए अच्छा माना जाता है; रोग, काल और उद्वेग में नई शुरुआत टाल दी जाती है।
टेबल पढ़ने के लिए सिर्फ दो चीज़ें चाहिए — आपके शहर का सूर्योदय-सूर्यास्त और उस दिन का वार। इस लेख में वह चीज़ है जो ज़्यादातर पंचांग ऐप नहीं बताते: चौघड़िया का चक्र कैसे चलता है, और आप खुद कागज़-पेन से किसी भी दिन, किसी भी शहर का टेबल कैसे बना सकते हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली का सोमवार, 14 सितंबर 2026 लिया है।
चौघड़िया शब्द का मतलब क्या है?
चौघड़िया = "चौ" + "घड़ी", यानी चार घड़ी। घड़ी समय की पुरानी भारतीय इकाई है, लगभग 24 मिनट की। चार घड़ी = करीब 96 मिनट। इसीलिए एक चौघड़िया मोटे तौर पर डेढ़ घंटे का माना जाता है।
असल में यह ठीक 96 मिनट नहीं होता। दिन का चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 से भाग देकर निकलता है, और रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय को 8 से भाग देकर। गर्मी में दिन लंबा होता है, इसलिए दिन का हर चौघड़िया लंबा और रात का छोटा होगा; सर्दी में उल्टा। शहर बदलने से सूर्योदय-सूर्यास्त बदलते हैं, इसलिए चौघड़िया के समय भी बदल जाते हैं।
चौघड़िया का चक्र कैसे चलता है?
नाम सात हैं और हिस्से आठ। इसलिए हर दिन (और हर रात) में एक नाम दो बार आता है — पहला और आठवाँ हिस्सा हमेशा एक ही नाम का होता है।
नामों का क्रम हमेशा एक ही रहता है:
उद्वेग → चर → लाभ → अमृत → काल → शुभ → रोग → (फिर उद्वेग से दोबारा)
बदलती है सिर्फ शुरुआत। दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह से जुड़ा नाम होता है — सोमवार (चंद्र) अमृत से शुरू होता है, गुरुवार (गुरु) शुभ से, शनिवार (शनि) काल से। पहला नाम पता चल जाए, तो बाकी सात ऊपर के क्रम से अपने आप आ जाते हैं। रात का चक्र भी यही है, पर उसकी शुरुआत अलग बिंदु से होती है।
किस वार को कौन-सा चौघड़िया पहले आता है?
यह टेबल याद रख लें — बाकी सब इसी से निकलता है।
| वार | दिन का पहला चौघड़िया (सूर्योदय से) | रात का पहला चौघड़िया (सूर्यास्त से) |
|---|---|---|
| रविवार | उद्वेग | शुभ |
| सोमवार | अमृत | चर |
| मंगलवार | रोग | काल |
| बुधवार | लाभ | उद्वेग |
| गुरुवार | शुभ | अमृत |
| शुक्रवार | चर | रोग |
| शनिवार | काल | लाभ |
उदाहरण: बुधवार के दिन का पहला चौघड़िया लाभ है। चक्र में लाभ के बाद अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर आते हैं और आठवाँ फिर लाभ। बस — बुधवार के दिन के आठ नाम तैयार।
दिन का चौघड़िया टेबल कैसे पढ़ें? दिल्ली, सोमवार 14 सितंबर 2026 का उदाहरण
हमारे पंचांग इंजन के अनुसार 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को दिल्ली में सूर्योदय 06:06 और सूर्यास्त 18:26 है। उस दिन सूर्योदय पर शुक्ल तृतीया तिथि है (07:08 तक), नक्षत्र चित्रा है, और इंजन इस दिन को हरतालिका तीज · गणेश चतुर्थी के रूप में दिखाता है — यानी ऐसा दिन जब बहुत लोग शुभ चौघड़िया खोजते हैं।
हिसाब ऐसे बनेगा:
- दिन की लंबाई = 06:06 से 18:26 = 12 घंटे 20 मिनट = 740 मिनट
- एक चौघड़िया = 740 ÷ 8 = 92.5 मिनट (करीब डेढ़ घंटे)
- सोमवार का दिन अमृत से शुरू होता है, इसलिए क्रम: अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत
| क्रम | चौघड़िया | समय (दिल्ली) | परंपरा में |
|---|---|---|---|
| 1 | अमृत | 06:06 – 07:38 | अनुकूल |
| 2 | काल | 07:38 – 09:11 | नई शुरुआत टालें |
| 3 | शुभ | 09:11 – 10:43 | अनुकूल |
| 4 | रोग | 10:43 – 12:16 | नई शुरुआत टालें |
| 5 | उद्वेग | 12:16 – 13:48 | नई शुरुआत टालें |
| 6 | चर | 13:48 – 15:21 | अनुकूल, खास तौर पर यात्रा |
| 7 | लाभ | 15:21 – 16:53 | अनुकूल |
| 8 | अमृत | 16:53 – 18:26 | अनुकूल |
समय निकटतम मिनट तक गोल किए गए हैं — हर हिस्सा 92.5 मिनट का है, इसलिए कुछ सीमाएँ आधे मिनट पर पड़ती हैं। यह टेबल सिर्फ दिल्ली के लिए है; दूसरे शहर में हर पंक्ति के समय थोड़े खिसक जाएँगे।
टेबल पढ़ना आसान है। जिस समय काम शुरू करना है, देखिए वह किस पंक्ति में पड़ता है। सुबह 10 बजे शुभ चौघड़िया है। दोपहर 1 बजे उद्वेग है, तो परंपरा के अनुसार लोग नई शुरुआत 13:48 के बाद चर में करना पसंद करते हैं।
अपने शहर का टेबल खुद कैसे बनाएँ?
- अपने शहर का उस दिन का सूर्योदय और सूर्यास्त नोट करें।
- दोनों के बीच का समय मिनटों में निकालें और 8 से भाग दें — यह एक चौघड़िया की लंबाई है।
- ऊपर के वार-टेबल से दिन का पहला नाम देखें।
- चक्र (उद्वेग → चर → लाभ → अमृत → काल → शुभ → रोग) में उस नाम से आगे बढ़ते हुए आठ नाम लिखें।
- सूर्योदय से शुरू करके हर नाम के आगे एक-एक चौघड़िया की लंबाई जोड़ते जाएँ। आठवाँ हिस्सा ठीक सूर्यास्त पर खत्म होना चाहिए — यही आपकी जाँच है।
रात का चौघड़िया कैसे निकालें?
तरीका वही है, बस समय-सीमा बदल जाती है: सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक का समय 8 से भाग दें। शुरुआत का नाम वार-टेबल के रात वाले कॉलम से लें। सोमवार की रात चर से शुरू होती है, इसलिए 14 सितंबर 2026 की रात के आठ नाम होंगे: चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर। समय निकालने के लिए 15 सितंबर का सूर्योदय चाहिए होगा, जो आपके पंचांग में मिल जाएगा।
शुभ, लाभ, अमृत, चर, रोग, काल और उद्वेग का मतलब क्या है?
ये सात नाम बताते हैं कि परंपरा में उस समय को किस काम के लिए चुना जाता है। कोई भी चौघड़िया रोज़मर्रा के काम रोकने के लिए नहीं है — बात सिर्फ नई शुरुआत का समय चुनने की है।
| चौघड़िया | शब्द का अर्थ | परंपरा में |
|---|---|---|
| अमृत | अमृत, सबसे मीठा फल | सबसे अनुकूल; किसी भी नई शुरुआत के लिए |
| शुभ | मंगल, अच्छा | अनुकूल; पूजा और नए काम के लिए |
| लाभ | फायदा | अनुकूल; नाम के अनुसार लेन-देन के लिए पसंद किया जाता है |
| चर | चलना, गति | अनुकूल; खास तौर पर यात्रा के लिए |
| रोग | असंतुलन | नई शुरुआत के लिए नहीं चुना जाता; चल रहे काम जारी रहते हैं |
| काल | समय, ठहराव | नई शुरुआत के लिए नहीं चुना जाता; रोज़ के काम पर असर नहीं |
| उद्वेग | मन की बेचैनी | नई शुरुआत के लिए नहीं चुना जाता; अगला अनुकूल हिस्सा लें |
चार नाम अनुकूल हैं, तीन नहीं, और पहला-आठवाँ हिस्सा एक ही नाम का है। इसलिए हर दिन में कम से कम चार-पाँच अनुकूल खिड़कियाँ मिल जाती हैं — समय की कमी कभी नहीं होती, बस थोड़ा आगे-पीछे करना होता है।
चौघड़िया, राहु काल और अभिजीत मुहूर्त में क्या फर्क है?
तीनों अलग-अलग प्रणालियाँ हैं और एक-दूसरे से नहीं निकलतीं।
- चौघड़िया — पूरे दिन और पूरी रात को 8-8 हिस्सों में बाँटता है; हर हिस्से का एक नाम है।
- राहु काल — दिन का एक अलग हिस्सा, जिसका हिसाब चौघड़िया से बिल्कुल अलग नियम से होता है और जिसे परंपरा में नई शुरुआत के लिए नहीं चुना जाता। नियम अलग हैं, इसलिए राहु काल किसी शुभ या लाभ चौघड़िया के बीच में भी पड़ सकता है। पूरा तरीका यहाँ है: राहु काल क्या है और कैसे निकालें।
- अभिजीत मुहूर्त — दिन के बीच (मध्याह्न) के आसपास का एक छोटा मुहूर्त, जिसे परंपरा में सामान्य कामों के लिए अच्छा माना जाता है। यह चौघड़िया चक्र का हिस्सा नहीं है।
व्यवहार में लोग पहले चौघड़िया से अनुकूल खिड़की चुनते हैं, फिर देखते हैं कि उसमें राहु काल तो नहीं पड़ रहा। और क्योंकि तीनों सूर्योदय-सूर्यास्त पर टिके हैं, इसलिए हर शहर में समय अलग होता है — दिल्ली का टेबल मुंबई में काम नहीं करेगा।
चौघड़िया पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या चौघड़िया हर शहर में अलग होता है?
हाँ। नामों का क्रम पूरे भारत में एक ही है, पर समय आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर टिका है। इसलिए हमेशा अपने शहर का पंचांग देखें।
क्या रात का चौघड़िया भी देखा जाता है?
हाँ, खास तौर पर रात की यात्रा या देर शाम के कामों के लिए। रात का चक्र सूर्यास्त से शुरू होता है; पहला नाम वार-टेबल के रात वाले कॉलम से लें।
अगर शुभ चौघड़िया में राहु काल पड़ जाए तो?
दोनों को अलग-अलग देखें। परंपरा में ऐसा समय चुना जाता है जो चौघड़िया में अनुकूल हो और राहु काल से बाहर भी हो। दिन में ऐसी कई खिड़कियाँ मिल जाती हैं।
क्या रोग, काल या उद्वेग में काम बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
नहीं। ये नाम सिर्फ नई शुरुआत का समय चुनने में मदद के लिए हैं। ऑफिस, पढ़ाई, घर के काम — सब सामान्य रूप से चलते रहते हैं। परंपरा मानने वाले बस नए काम के लिए अगले अनुकूल चौघड़िया तक रुक जाते हैं।
एक चौघड़िया कितने मिनट का होता है?
कोई तय संख्या नहीं। यह दिन (या रात) की लंबाई का आठवाँ हिस्सा है — दिल्ली में 14 सितंबर 2026 को 92.5 मिनट, पर गर्मियों में ज़्यादा और सर्दियों में कम। "डेढ़ घंटे" सिर्फ याद रखने का मोटा अंदाज़ा है।
हर दिन का हिसाब हाथ से न लगाना चाहें, तो हमारे दैनिक पंचांग में आपके शहर का आज का चौघड़िया — दिन और रात दोनों — सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ लाइव मिलता है।