पूर्णिमांत और अमांत में अंतर: उत्तर-दक्षिण में महीने का नाम अलग, त्योहार एक ही दिन क्यों (2026)
पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है, अमांत में अमावस्या पर — इसलिए सिर्फ कृष्ण पक्ष का महीना-नाम अलग दिखता है। तिथि एक ही रहती है, इसलिए पितृ पक्ष, नवरात्रि और दीपावली 2026 पूरे भारत में एक ही दिन हैं।
सीधा जवाब: पूर्णिमांत और अमांत में फर्क सिर्फ इतना है कि हिंदू महीना कहाँ खत्म माना जाए। उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष पहले आता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत (अमांत) में महीना अमावस्या पर खत्म होता है, इसलिए शुक्ल पक्ष पहले आता है। तिथि दोनों में एक ही रहती है, इसलिए त्योहार एक ही दिन पड़ते हैं — बस कृष्ण पक्ष के महीने का नाम अलग दिखता है।
इसी वजह से 2026 में पितृ पक्ष (27 सितंबर – 10 अक्टूबर) उत्तर भारत के पंचांग में "आश्विन कृष्ण पक्ष" लिखा मिलता है और महाराष्ट्र या दक्षिण के कैलेंडर में "भाद्रपद कृष्ण पक्ष"। दिन वही हैं, नाम अलग है। नीचे इसे एक-एक कदम में समझते हैं।
पूर्णिमांत और अमांत का मतलब क्या है?
हिंदू महीना चंद्रमा की चाल पर चलता है। चंद्रमा के घटने-बढ़ने का एक पूरा चक्र — अमावस्या से अमावस्या या पूर्णिमा से पूर्णिमा — एक चंद्र मास कहलाता है। इस चक्र के दो हिस्से हैं: शुक्ल पक्ष (अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ता है, पूर्णिमा तक) और कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटता है, अमावस्या तक)। हर पक्ष में लगभग 15 तिथियाँ होती हैं। तिथि यानी चंद्र दिन, जो अंग्रेज़ी तारीख से पूरी तरह नहीं मिलता — यह फर्क तिथि और अंग्रेज़ी तारीख के लेख में विस्तार से है।
सवाल बस यह है कि नया महीना कहाँ से शुरू माना जाए। यहीं दो परंपराएँ बनती हैं:
- पूर्णिमांत (पूर्णिमा + अंत): महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है। यानी पहले कृष्ण पक्ष, फिर शुक्ल पक्ष। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल और बाकी उत्तर भारत में यही चलता है।
- अमांत (अमा + अंत, यानी अमावस्या पर अंत): महीना अमावस्या पर खत्म होता है। यानी पहले शुक्ल पक्ष, फिर कृष्ण पक्ष। महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत और आंशिक रूप से बंगाल में यही चलता है।
एक ही आकाश से दो अलग महीने कैसे बनते हैं?
2026 के आश्विन महीने को दिनों की एक लाइन की तरह देखिए। दोनों प्रणालियाँ वही दिन लेती हैं, बस लाइन को अलग जगह काटती हैं।
पूर्णिमांत आश्विन: 27 सितंबर (कृष्ण प्रतिपदा, यानी कृष्ण पक्ष का पहला दिन) → 10 अक्टूबर (अमावस्या) → 11 अक्टूबर (शुक्ल प्रतिपदा) → 25–26 अक्टूबर (पूर्णिमा)। पितृ पक्ष से शरद पूर्णिमा तक, पूरा एक महीना "आश्विन"।
अमांत आश्विन: 11 अक्टूबर (शुक्ल प्रतिपदा) → 25–26 अक्टूबर (पूर्णिमा) → फिर कृष्ण पक्ष → 8 नवंबर (अमावस्या, दीपावली)। नवरात्रि से दीपावली तक, पूरा एक महीना "आश्विन"।
ध्यान दें कि 11 से 26 अक्टूबर का शुक्ल पक्ष दोनों में "आश्विन" ही है। मतभेद सिर्फ उसके दोनों तरफ के कृष्ण पक्षों पर है। 27 सितंबर – 10 अक्टूबर का कृष्ण पक्ष उत्तर में आश्विन का है, अमांत में भाद्रपद का। और 26 अक्टूबर को पूर्णिमा समाप्त होने (दिल्ली में 09:41) से 8 नवंबर की अमावस्या तक का कृष्ण पक्ष उत्तर में कार्तिक का है, अमांत में आश्विन का।
एक नियम सब कुछ समेट लेता है: शुक्ल पक्ष का महीना-नाम दोनों में एक ही रहता है। कृष्ण पक्ष का महीना-नाम अमांत में एक नाम पीछे चला जाता है। उत्तर का "आश्विन कृष्ण" = अमांत का "भाद्रपद कृष्ण"। उत्तर का "कार्तिक कृष्ण" = अमांत का "आश्विन कृष्ण"।
2026 के त्योहार: तारीख वही, महीने का नाम अलग
यह टेबल हमारे पंचांग इंजन से बनी है, दिल्ली के लिए। हर पंक्ति को बाएँ से दाएँ पढ़िए — तारीख और तिथि दोनों प्रणालियों में एक ही हैं, सिर्फ महीने का लेबल बदलता है।
| त्योहार | तारीख (2026) | तिथि | पूर्णिमांत (उत्तर भारत) | अमांत (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण) |
|---|---|---|---|---|
| पितृ पक्ष आरंभ | 27 सितंबर, रविवार | कृष्ण प्रतिपदा | आश्विन कृष्ण पक्ष | भाद्रपद कृष्ण पक्ष |
| सर्वपितृ अमावस्या (महालया) | 10 अक्टूबर, शनिवार | अमावस्या | आश्विन अमावस्या | भाद्रपद अमावस्या |
| शारदीय नवरात्रि, दिन 1 | 11 अक्टूबर, रविवार | शुक्ल प्रतिपदा | आश्विन शुक्ल पक्ष | आश्विन शुक्ल पक्ष (एक ही) |
| शरद पूर्णिमा | 25 अक्टूबर, रविवार | पूर्णिमा (11:56 से) | आश्विन पूर्णिमा | आश्विन पूर्णिमा (एक ही) |
| दीपावली (लक्ष्मी पूजा) | 8 नवंबर, रविवार | अमावस्या (11:28 से) | कार्तिक अमावस्या | आश्विन अमावस्या |
| कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) | 24 नवंबर, मंगलवार | पूर्णिमा | कार्तिक पूर्णिमा | कार्तिक पूर्णिमा (एक ही) |
जहाँ "एक ही" लिखा है, वे शुक्ल पक्ष की तिथियाँ हैं। भ्रम सिर्फ कृष्ण पक्ष वाली पंक्तियों में होता है — पितृ पक्ष और दीपावली।
इन तारीखों की तिथि का समय (दिल्ली)
तिथि का यह समय ही असली आधार है, और यह दोनों प्रणालियों में एक जैसा है। समय दिल्ली का है; आपके शहर में कुछ मिनट का फर्क हो सकता है।
| तारीख (2026) | सूर्योदय पर तिथि | तिथि कब से कब तक | सूर्योदय / सूर्यास्त |
|---|---|---|---|
| 27 सितंबर | कृष्ण प्रतिपदा | 26 सितंबर 22:18 → 27 सितंबर 20:58 | 06:12 / 18:11 |
| 10 अक्टूबर | अमावस्या | 9 अक्टूबर 21:36 → 10 अक्टूबर 21:20 | 06:19 / 17:56 |
| 11 अक्टूबर | शुक्ल प्रतिपदा | 10 अक्टूबर 21:20 → 11 अक्टूबर 21:32 | 06:20 / 17:55 |
| 25 अक्टूबर | शुक्ल चतुर्दशी (पूर्णिमा 11:56 से) | पूर्णिमा: 25 अक्टूबर 11:56 → 26 अक्टूबर 09:41 | 06:29 / 17:41 |
| 8 नवंबर | कृष्ण चतुर्दशी (अमावस्या 11:28 से) | चतुर्दशी: 7 नवंबर 10:48 → 8 नवंबर 11:28; फिर अमावस्या | 06:39 / 17:30 |
| 24 नवंबर | शुक्ल पूर्णिमा | 23 नवंबर 23:42 → 24 नवंबर 20:23 | 06:51 / 17:23 |
8 नवंबर की पंक्ति देखें: सूर्योदय पर चतुर्दशी है, इसलिए इंजन उस दिन नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली) भी दिखाता है, और 11:28 पर अमावस्या लगने से उसी शाम लक्ष्मी पूजा। महीने का नाम कुछ भी हो, यह समय नहीं बदलता।
त्योहार की तारीख दोनों प्रणालियों में क्यों नहीं बदलती?
क्योंकि त्योहार तिथि से तय होता है, महीने के नाम से नहीं। दीपावली अमावस्या की रात है। 2026 में वह अमावस्या दिल्ली में 8 नवंबर को 11:28 पर शुरू होती है — चाहे आप उसे कार्तिक अमावस्या कहें या आश्विन अमावस्या। चंद्रमा को इससे फर्क नहीं पड़ता कि हमने महीने को क्या नाम दिया।
इसलिए अगर गुजराती या मराठी रिश्तेदार कहें कि "दीवाली आश्विन में है" और आपका पंचांग "कार्तिक" कहे, तो दोनों सही हैं और दोनों 8 नवंबर की ही बात कर रहे हैं। 2026 की सभी अमावस्या और पूर्णिमा तिथियाँ इस सूची में एक जगह हैं।
फिर असली फर्क कहाँ दिखता है?
दो जगह। इन्हें जान लेना काफी है:
- महीने की शुरुआत की तारीख: आश्विन उत्तर में 27 सितंबर से शुरू होता है, अमांत में 11 अक्टूबर से। कार्तिक उत्तर में 26 अक्टूबर को पूर्णिमा खत्म होते ही शुरू हो जाता है, जबकि अमांत में दीपावली की अमावस्या के बाद। इसलिए "कार्तिक मास शुरू" की बात देश के अलग हिस्सों में अलग तारीखों पर सुनाई देती है।
- अधिक मास का नाम: अधिक मास (मलमास) वह अतिरिक्त चंद्र महीना है जो चंद्र वर्ष को सौर वर्ष के साथ मिलाने के लिए बीच-बीच में जोड़ा जाता है। दोनों प्रणालियों में महीने की सीमा अलग खिंचती है, इसलिए उस अतिरिक्त महीने से जुड़ा नाम भी अलग पड़ सकता है। ऐसे साल में पंचांग की तुलना करने से पहले देख लें कि वह किस प्रणाली का है।
तमिल, मलयालम, बंगाली और ओड़िया कैलेंडर में महीना फिर अलग क्यों?
क्योंकि वह तीसरी प्रणाली है — सौर कैलेंडर। इसमें महीना चंद्रमा से नहीं, सूर्य से तय होता है। जिस दिन सूर्य एक राशि से अगली राशि में प्रवेश करता है, उसे संक्रांति कहते हैं, और वहीं से नया महीना शुरू होता है। तमिल, मलयालम, बंगाली और ओड़िया पंचांग इसी तरह चलते हैं, इसलिए उनमें महीने की सीमा न पूर्णिमा पर पड़ती है न अमावस्या पर। हमारे इंजन के आँकड़ों में यह बदलाव दिखता भी है: 11 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में है और 25 अक्टूबर को तुला में — यानी इस बीच कहीं सौर महीना बदला, जबकि चंद्र महीना आश्विन चलता रहा।
AstroVedansh का पंचांग कौन-सी प्रणाली दिखाता है?
हमारा दैनिक पंचांग पूर्णिमांत नाम दिखाता है — वही जो उत्तर भारत के ज़्यादातर पंचांगों में मिलता है। यानी हमारे पन्नों पर पितृ पक्ष "आश्विन कृष्ण पक्ष" और दीपावली "कार्तिक अमावस्या" लिखी मिलेगी। अगर आप महाराष्ट्र, गुजरात या दक्षिण भारत से हैं, तो एक नियम लगा लें: शुक्ल पक्ष का नाम वैसा ही रखें, कृष्ण पक्ष के महीने का नाम एक पीछे कर लें। बाकी सब — तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त — आपके लिए भी वैसा ही लागू है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूर्णिमांत और अमांत में त्योहार की तारीख बदल जाती है?
नहीं। त्योहार तिथि से तय होता है और तिथि दोनों में एक ही है। 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर, नवरात्रि 11 अक्टूबर से और दीपावली 8 नवंबर — पूरे भारत में यही तारीखें हैं। साथ में लिखा महीने का नाम ही अलग होता है।
दीपावली कार्तिक अमावस्या है या आश्विन अमावस्या?
दोनों, प्रणाली के हिसाब से। उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक अमावस्या, महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण (अमांत) में आश्विन अमावस्या। 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर को है।
पितृ पक्ष आश्विन में है या भाद्रपद में?
उत्तर भारत में आश्विन कृष्ण पक्ष, अमांत में भाद्रपद कृष्ण पक्ष। दिन एक ही हैं — 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026। पूरी तारीखें और नियम पितृ पक्ष 2026 के लेख में हैं।
कौन-सी प्रणाली सही है?
दोनों सही हैं। ये दो क्षेत्रीय परंपराएँ हैं, दो अलग गणनाएँ नहीं। तिथि एक ही है; बस महीने को किस नाम से पुकारा जाए, इसमें परंपरा अलग है। अपने परिवार या क्षेत्र की परंपरा ही अपनाएँ।
मेरे कैलेंडर में महीने का नाम पंचांग से अलग है। क्या कोई गलती है?
ज़्यादातर मामलों में नहीं। पहले देखें कि तिथि और पक्ष मिल रहे हैं। अगर मिल रहे हैं और सिर्फ कृष्ण पक्ष के महीने का नाम एक कदम आगे-पीछे है, तो यह पूर्णिमांत-अमांत का फर्क है, गलती नहीं।