मार्गशीर्ष मास 2026: 25 नवंबर से 23 दिसंबर — उत्पन्ना एकादशी से दत्तात्रेय जयंती तक पूरी लिस्ट

मार्गशीर्ष मास 2026 पूर्णिमांत पंचांग से 25 नवंबर (बुधवार) से 23 दिसंबर (बुधवार) की पूर्णिमा तक है। उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर, विवाह पंचमी 14 दिसंबर, गीता जयंती 20 दिसंबर और दत्तात्रेय जयंती 23 दिसंबर को है।

मार्गशीर्ष मास 2026 पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार बुधवार, 25 नवंबर से शुरू होकर बुधवार, 23 दिसंबर की पूर्णिमा तक चलेगा। इस महीने में उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर, विवाह पंचमी 14 दिसंबर, मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती 20 दिसंबर, और दत्तात्रेय जयंती 23 दिसंबर को है। पूरी लिस्ट तिथि के समय और नियम के साथ नीचे है।

मार्गशीर्ष को अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति में महीना पूर्णिमा के अगले दिन शुरू होता है — कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 24 नवंबर 20:23 पर पूरी हुई, इसलिए 25 नवंबर से मार्गशीर्ष। सभी समय दिल्ली के लिए, 24 घंटे के फॉर्मेट में हैं।

मार्गशीर्ष 2026 कब से कब तक है?

शुरुआत — 25 नवंबर 2026, बुधवार। सूर्योदय 06:52 पर कृष्ण प्रतिपदा है, जो 24 नवंबर 20:23 से 25 नवंबर 16:50 तक रहती है।

समापन — 23 दिसंबर 2026, बुधवार। पूर्णिमा की तिथि 23 दिसंबर 10:47 से 24 दिसंबर 06:58 तक है और 24 दिसंबर के सूर्योदय (07:12) को नहीं छूती। इसलिए पूर्णिमा की पूजा और व्रत 23 दिसंबर को है, और 24 दिसंबर के सूर्योदय पर पौष मास लग जाता है। एक लाइन में: महीना 23 दिसंबर की रात पूरा, 24 दिसंबर से पौष। पूरा तर्क नीचे है।

महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत की अमांत पद्धति में महीने का नाम अमावस्या के बाद बदलता है, इसलिए वहाँ 25 नवंबर से 8 दिसंबर तक का कृष्ण पक्ष अभी कार्तिक कहलाता है। शुक्ल पक्ष के त्योहार — विवाह पंचमी, गीता जयंती, दत्तात्रेय जयंती — दोनों पद्धतियों में एक ही तारीख पर हैं।

मार्गशीर्ष 2026 के व्रत-त्योहार की पूरी लिस्ट

तिथि यानी चंद्र दिन — यह आधी रात से नहीं, चंद्र-सूर्य की दूरी से बदलती है, इसलिए कभी दोपहर में लगती है, कभी रात में। हर व्रत का नियम अलग है कि दिन के किस हिस्से की तिथि देखी जाए; टेबल का आखिरी कॉलम वही बताता है।

तारीखतिथि (समय)व्रत / त्योहारनियम / नोट
25 नवंबर, बुधवारकृष्ण प्रतिपदा (24 नवंबर 20:23 → 25 नवंबर 16:50)मार्गशीर्ष मास आरंभसूर्योदय 06:52 पर प्रतिपदा
28 नवंबर, शनिवारकृष्ण चतुर्थी (27 नवंबर 09:49 → 28 नवंबर 06:41)संकष्टी चतुर्थी (गणाधिप)चंद्रोदय-आधारित व्रत; इंजन 28 नवंबर देता है
1 दिसंबर, मंगलवारकृष्ण अष्टमी (1 दिसंबर 00:12 → 1 दिसंबर 23:14)कालाष्टमी / कालभैरव जयंतीरात की पूजा; कुछ कैलेंडर 2 दिसंबर लिखते हैं
4 दिसंबर, शुक्रवारकृष्ण एकादशी (3 दिसंबर 23:04 → 4 दिसंबर 23:45)उत्पन्ना एकादशीसूर्योदय 06:59 पर एकादशी; पारण अगली सुबह
6 दिसंबर, रविवारकृष्ण त्रयोदशी (6 दिसंबर 00:52 → 7 दिसंबर 02:22)प्रदोष व्रतसूर्यास्त 17:23 के बाद त्रयोदशी मौजूद
7 दिसंबर, सोमवारकृष्ण चतुर्दशी (7 दिसंबर 02:22 → 8 दिसंबर 04:13)मासिक शिवरात्रिनिशिता (आधी रात) की पूजा 7 दिसंबर की रात
8 दिसंबर, मंगलवारअमावस्या (8 दिसंबर 04:13 → 9 दिसंबर 06:22)मार्गशीर्ष अमावस्यासूर्योदय 07:02 पर अमावस्या; स्नान-दान इसी दिन
14 दिसंबर, सोमवारशुक्ल पंचमी (13 दिसंबर 16:47 → 14 दिसंबर 19:15)विवाह पंचमीसूर्योदय 07:06 पर पंचमी
15 दिसंबर, मंगलवारशुक्ल षष्ठी (14 दिसंबर 19:15 → 15 दिसंबर 21:19)चंपा षष्ठी (महाराष्ट्र, खंडोबा)सूर्योदय 07:07 पर षष्ठी
20 दिसंबर, रविवारशुक्ल एकादशी (19 दिसंबर 22:08 → 20 दिसंबर 20:13)मोक्षदा एकादशी / गीता जयंतीसूर्योदय 07:10 पर एकादशी; पारण अगली सुबह
21 दिसंबर, सोमवारशुक्ल त्रयोदशी (21 दिसंबर 17:35 → 22 दिसंबर 14:23)प्रदोष व्रतप्रदोष काल 21 दिसंबर की शाम; कुछ कैलेंडर 22 लिखते हैं — नीचे समझाया है
23 दिसंबर, बुधवारपूर्णिमा (23 दिसंबर 10:47 → 24 दिसंबर 06:58)दत्तात्रेय जयंती / मार्गशीर्ष पूर्णिमाशाम की पूजा 23 दिसंबर; पूर्णिमा किसी सूर्योदय को नहीं छूती
24 दिसंबर, गुरुवारकृष्ण प्रतिपदा (24 दिसंबर 06:58 → 25 दिसंबर 03:07)पौष मास आरंभसूर्योदय 07:12 पर प्रतिपदा

संकष्टी, कालाष्टमी, प्रदोष, शिवरात्रि और अमावस्या हर महीने आते हैं; बाकी चार सिर्फ़ मार्गशीर्ष में। अमावस्या-पूर्णिमा के नियम और पूरे साल की तारीखें अमावस्या-पूर्णिमा 2026 की लिस्ट में हैं।

दूसरा प्रदोष व्रत 21 दिसंबर को है या 22 को?

हमारे हिसाब से 21 दिसंबर, सोमवार। प्रदोष काल का मतलब है सूर्यास्त के ठीक बाद का समय, और प्रदोष व्रत की पूजा उसी समय होती है। नियम यह है कि जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि मौजूद हो, व्रत उसी दिन का माना जाता है। पंचांग की भाषा में इसे प्रदोष-व्यापिनी त्रयोदशी कहते हैं।

अब 2026 की स्थिति। शुक्ल त्रयोदशी 21 दिसंबर 17:35 पर लगती है और 22 दिसंबर 14:23 पर खत्म हो जाती है। 21 दिसंबर को सूर्यास्त के कुछ ही मिनट बाद त्रयोदशी शुरू होती है और पूरी शाम-रात रहती है। 22 दिसंबर को यह दोपहर में ही निकल जाती है — सूर्यास्त 17:28 पर चतुर्दशी चल रही होती है। इसलिए प्रदोष काल के नियम से व्रत 21 दिसंबर का है।

कुछ कैलेंडर 22 दिसंबर इसलिए लिखते हैं कि 22 दिसंबर के सूर्योदय 07:11 पर त्रयोदशी है, और वे हर व्रत को सूर्योदय की तिथि से तय करते हैं। प्रदोष के लिए यह नियम सही नहीं बैठता। तुलना करें — 6 दिसंबर का पहला प्रदोष आसान था, क्योंकि त्रयोदशी 00:52 से अगली सुबह 02:22 तक सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों पर मौजूद थी।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती 23 दिसंबर को या 24 को?

23 दिसंबर, बुधवार। पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर 10:47 से 24 दिसंबर 06:58 तक है। 23 दिसंबर के सूर्योदय 07:11 पर अभी चतुर्दशी है और 24 दिसंबर के सूर्योदय 07:12 पर पौष की प्रतिपदा — पूर्णिमा बीच में पूरी रात रहकर सूर्योदय से पहले चली जाती है। ऐसे में शाम-रात के व्रत उस दिन किए जाते हैं जिसकी शाम में तिथि मौजूद है, यानी 23 दिसंबर। दत्तात्रेय जयंती की पूजा परंपरा में प्रदोष काल यानी शाम को होती है, इसलिए वह भी 23 दिसंबर — उस दिन चंद्रोदय 16:36 और सूर्यास्त 17:28 पर है।

इस महीने के खास व्रत — क्या और क्यों

उत्पन्ना एकादशी — शुक्रवार, 4 दिसंबर

एकादशी तिथि 3 दिसंबर 23:04 से 4 दिसंबर 23:45 तक है और 4 दिसंबर के सूर्योदय 06:59 पर मौजूद है, इसलिए व्रत 4 दिसंबर का। पारण, यानी व्रत खोलना, अगले दिन 5 दिसंबर सुबह सूर्योदय के बाद। कथा के अनुसार इसी दिन एकादशी देवी भगवान विष्णु से उत्पन्न हुईं — इसीलिए नाम उत्पन्ना। मान्यता है कि साल भर के एकादशी व्रत इसी से शुरू किए जाते हैं।

विवाह पंचमी — सोमवार, 14 दिसंबर

शुक्ल पंचमी 13 दिसंबर 16:47 से 14 दिसंबर 19:15 तक है; 14 दिसंबर के सूर्योदय पर पंचमी है, इसलिए यही दिन। परंपरा के अनुसार इस तिथि पर श्रीराम और सीता का विवाह हुआ था। रामचरितमानस के बालकांड में इस विवाह का विस्तार से वर्णन है, और कई घरों में इस दिन उसी प्रसंग का पाठ होता है।

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती — रविवार, 20 दिसंबर

एकादशी 19 दिसंबर 22:08 से 20 दिसंबर 20:13 तक है; 20 दिसंबर के सूर्योदय 07:10 पर एकादशी है, इसलिए व्रत 20 दिसंबर का और पारण 21 दिसंबर की सुबह। परंपरा के अनुसार इसी तिथि पर श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, इसलिए इसे गीता जयंती कहते हैं। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस दिन बहुत से घरों में गीता का कम से कम एक अध्याय पढ़ा जाता है।

दत्तात्रेय जयंती — बुधवार, 23 दिसंबर

मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त स्वरूप हैं। उनकी जयंती मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है, और महाराष्ट्र व कर्नाटक में इसका विशेष स्थान है। 2026 में यह 23 दिसंबर की शाम है।

गीता में मार्गशीर्ष का नाम क्यों आता है?

भगवद्गीता के दसवें अध्याय में श्रीकृष्ण अपनी विभूतियाँ बताते हैं — यानी किस-किस चीज़ में उनका श्रेष्ठ रूप दिखता है। महीनों के बारे में वे कहते हैं: "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्" (गीता 10.35) — महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसी पंक्ति के कारण यह महीना वैष्णव परंपरा में इतना प्रिय है, और गीता जयंती का इसी महीने में पड़ना इस भाव को और गहरा करता है। गीता के कर्म-सिद्धांत पर सरल भाषा में यह लेख पढ़ें।

परंपरा में मार्गशीर्ष को कार्तिक जैसा स्नान-मास माना गया है — सुबह जल्दी स्नान, तुलसी पूजा और शाम को दीपदान। जो नियम कार्तिक मास में रखे जाते हैं, कई घर उन्हें मार्गशीर्ष में भी जारी रखते हैं।

तमिल मार्गळि और मार्गशीर्ष — एक ही महीना?

नाम एक ही मूल से हैं, पर गिनती अलग है। मार्गशीर्ष चंद्र महीना है, जो 2026 में 25 नवंबर से शुरू होता है। तमिल मार्गळि (Margazhi) सौर महीना है — यह सूर्य के धनु राशि में प्रवेश यानी धनु संक्रांति से शुरू होता है, जो हर साल दिसंबर के मध्य में आती है। धनु संक्रांति का दिन दिसंबर के मध्य में पड़ता है; सटीक क्षण इस लेख में नहीं दिया गया है। इस महीने तमिल घरों में सुबह-सुबह आंडाल के तिरुप्पावै के पद गाए जाते हैं। इसलिए 2026 में गीता जयंती और दत्तात्रेय जयंती दोनों मार्गळि के भीतर पड़ेंगी।

इस महीने क्या करें?

  • दो एकादशियाँ नोट कर लें — 4 दिसंबर और 20 दिसंबर। दोनों के सूर्योदय पर एकादशी है, कोई उलझन नहीं।
  • प्रदोष व्रत रखते हैं तो दूसरा प्रदोष 21 दिसंबर की शाम रखें, 22 नहीं।
  • पूर्णिमा से जुड़ा कोई काम — सत्यनारायण कथा, दीपदान, दत्तात्रेय पूजा — 23 दिसंबर की शाम रखें।
  • ऊपर के समय दिल्ली के हैं। अपने शहर के सूर्योदय, तिथि और चंद्रोदय का समय हमारे दैनिक पंचांग में देख लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मार्गशीर्ष मास 2026 कब से कब तक है?

25 नवंबर 2026 (बुधवार) से 23 दिसंबर 2026 (बुधवार) की पूर्णिमा तक। 24 दिसंबर के सूर्योदय से पौष मास लग जाता है।

उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026। एकादशी तिथि 3 दिसंबर 23:04 से 4 दिसंबर 23:45 तक।

गीता जयंती 2026 कब है?

रविवार, 20 दिसंबर 2026, मोक्षदा एकादशी के दिन। तिथि 19 दिसंबर 22:08 से 20 दिसंबर 20:13 तक।

सभी लेख / All articles · आज का राशिफल · आज का पंचांग