रमा एकादशी 2026: 5 नवंबर, दिवाली से पहले की एकादशी — व्रत विधि, कथा और पारण का समय

रमा एकादशी 2026 गुरुवार, 5 नवंबर को है। एकादशी तिथि 4 नवंबर 11:04 से 5 नवंबर 10:36 तक है। पारण 6 नवंबर को सूर्योदय 06:37 के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले, 10:31 तक करें।

रमा एकादशी 2026 गुरुवार, 5 नवंबर को है। कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11:04 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:36 बजे तक रहती है। 5 नवंबर के सूर्योदय (दिल्ली में 06:36) पर एकादशी तिथि है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा। पारण, यानी व्रत खोलना, अगले दिन शुक्रवार 6 नवंबर को सूर्योदय 06:37 के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले, यानी 10:31 बजे तक कर लें।

यह दिवाली सप्ताह की पहली एकादशी है। उसी शाम गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) है और अगले दिन 6 नवंबर को धनतेरस। नीचे तारीख, पारण की सही समय-सीमा, छोटी विधि, कथा और वे सवाल हैं जो हर साल इस एकादशी पर उलझन पैदा करते हैं।

रमा एकादशी 2026 की तारीख और मुख्य समय क्या हैं?

नीचे दिए सभी समय हमारे पंचांग इंजन से लिए गए हैं और दिल्ली के लिए हैं। आपके शहर में सूर्योदय कुछ मिनट आगे-पीछे होगा, इसलिए पारण का समय भी उतना ही खिसक सकता है।

क्याकबसमय (दिल्ली)
एकादशी तिथि शुरूबुधवार, 4 नवंबर 2026सुबह 11:04
एकादशी तिथि समाप्तगुरुवार, 5 नवंबर 2026सुबह 10:36
रमा एकादशी व्रतगुरुवार, 5 नवंबर 2026पूरा दिन (सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 17:32)
गोवत्स द्वादशी / वसु बारसगुरुवार, 5 नवंबर 2026शाम, सूर्यास्त 17:32 के बाद
पारण (व्रत खोलना)शुक्रवार, 6 नवंबर 2026सुबह 06:37 से 10:31 तक
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026पारण के बाद पूरा दिन

एकादशी तिथि 4 नवंबर को शुरू होती है, फिर व्रत 5 को क्यों?

तिथि चंद्रमा की चाल से बनने वाला दिन है। यह अंग्रेज़ी तारीख की तरह आधी रात को नहीं बदलती, बल्कि किसी भी समय शुरू और खत्म हो सकती है। इसलिए परंपरा में व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि चल रही हो। इसे उदया तिथि कहते हैं।

4 नवंबर को सूर्योदय के समय दशमी थी, क्योंकि एकादशी 11:04 पर शुरू हुई। 5 नवंबर को सूर्योदय 06:36 पर एकादशी चल रही थी। इसलिए व्रत 5 नवंबर का है, 4 का नहीं।

दिवाली से पहले की इस एकादशी का क्या महत्व है?

रमा लक्ष्मी जी का एक नाम है, और इसी से इस एकादशी का नाम पड़ा। मान्यता है कि इस दिन विष्णु जी के साथ लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष फल मिलता है। दिवाली खुद लक्ष्मी पूजन का पर्व है, इसलिए रमा एकादशी को उसकी तैयारी की शुरुआत की तरह देखा जाता है।

कृष्ण पक्ष वह आधा महीना है जब चंद्रमा पूर्णिमा के बाद घटता हुआ अमावस्या की ओर बढ़ता है। दिवाली कार्तिक अमावस्या को होती है, और रमा एकादशी उसी पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है। 2026 की सभी अमावस्या और पूर्णिमा तारीखें इस सूची में एक जगह हैं।

रमा एकादशी और वसु बारस एक ही दिन क्यों हैं?

यही वह बात है जो हर साल कैलेंडर देखकर उलझन में डालती है। 5 नवंबर को एकादशी 10:36 पर खत्म होती है और द्वादशी, यानी बारहवीं तिथि, शुरू हो जाती है। गोवत्स द्वादशी, जिसे वसु बारस भी कहते हैं, प्रदोष काल की द्वादशी पर मनाई जाती है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के ठीक बाद का समय। 5 नवंबर की शाम (सूर्यास्त 17:32) को द्वादशी चल रही है, इसलिए वसु बारस उसी शाम है।

यानी एक ही दिन सुबह एकादशी का व्रत और शाम को गाय-बछड़े की पूजा। अगर आपके कैलेंडर में 5 नवंबर पर दोनों लिखे हैं, तो वह गलती नहीं है। व्रत रखने वाले शाम को गौ पूजा कर सकते हैं, इससे एकादशी का व्रत नहीं टूटता।

अगले दिन 6 नवंबर को धनतेरस है। धनतेरस 6 या 7 नवंबर की उलझन और यम दीपम के समय पर अलग लेख यहां है।

रमा एकादशी व्रत विधि क्या है?

विधि लंबी नहीं है। जो लोग पहली बार एकादशी रख रहे हैं, उनके लिए भी इतना पर्याप्त है।

  1. 4 नवंबर, दशमी की शाम: सादा, सात्विक भोजन करें। परंपरा के अनुसार इस शाम से ही चावल और अनाज छोड़ दिया जाता है।
  2. 5 नवंबर की सुबह: स्नान के बाद संकल्प लें। संकल्प यानी मन में या बोलकर तय करना कि आज व्रत रखेंगे और किस रूप में रखेंगे।
  3. पूजा: विष्णु जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। तुलसी के पत्ते चढ़ाएं, क्योंकि परंपरा में विष्णु पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। फल, फूल और जो भी सात्विक भोग उपलब्ध हो, अर्पित करें।
  4. दिन भर: चावल, गेहूं, दाल जैसे अनाज न लें। फलाहार, दूध, साबूदाना और सिंघाड़े का आटा चल सकता है। निर्जल व्रत तभी रखें जब सेहत साथ दे। एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते और क्या खा सकते हैं, यह यहां विस्तार से है।
  5. शाम: दीपक जलाएं और विष्णु नाम का स्मरण करें। जिनकी परंपरा में वसु बारस है, वे गाय-बछड़े की पूजा करें।
  6. 6 नवंबर: सुबह 06:37 से 10:31 के बीच पारण करें।

रमा एकादशी की कथा क्या है?

कथा के अनुसार, राजा मुचुकुंद विष्णु भक्त थे और उनके राज्य में हर कोई एकादशी का व्रत रखता था। उनकी बेटी चंद्रभागा का विवाह शोभन से हुआ। शोभन का शरीर कमज़ोर था और वह भूख सहन नहीं कर पाता था। जब वह ससुराल में था, तभी रमा एकादशी आई।

चंद्रभागा ने बताया कि इस राज्य में एकादशी पर कोई अन्न नहीं खाता। शोभन ने संकोच के साथ भी व्रत का निश्चय किया और उसे पूरा किया। कथा के अनुसार उसी एक व्रत के पुण्य से शोभन को एक दिव्य नगर मिला। बाद में चंद्रभागा ने अपने जीवन भर के एकादशी व्रतों का पुण्य उसे देकर उस नगर को स्थायी बनाया।

कथा का सार सीधा है। शोभन ने एक बार कठिनाई से व्रत रखा, चंद्रभागा ने वर्षों तक नियम से। दोनों को फल मिला, पर स्थायित्व नियम से आया।

पारण के नियम क्या हैं और 10:31 की सीमा क्यों?

पारण का मतलब है व्रत खोलना। एकादशी का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद किया जाता है। परंपरा में यह सबसे ज़रूरी नियम है, क्योंकि माना जाता है कि द्वादशी के भीतर पारण न हो तो व्रत अधूरा रह जाता है।

2026 में द्वादशी 5 नवंबर को 10:36 पर शुरू होकर 6 नवंबर को 10:31 पर खत्म होती है। 6 नवंबर को दिल्ली में सूर्योदय 06:37 पर है। इसलिए पारण की खिड़की 06:37 से 10:31 तक है, यानी करीब चार घंटे।

  • सूर्योदय से पहले पारण न करें, भले ही द्वादशी चल रही हो।
  • 10:31 के बाद त्रयोदशी लग जाती है। पारण उससे पहले निपटा लें।
  • 6 नवंबर धनतेरस है। सुबह पूजा और खरीदारी की व्यस्तता रहेगी, इसलिए पारण सबसे पहले कर लेना ठीक रहेगा।
  • पारण में पहले जल और तुलसी पत्र लें, फिर सादा भोजन। परंपरा में पारण में अन्न लेना शुभ माना जाता है, इसलिए चावल या रोटी से व्रत खोल सकते हैं।

अगर आप दिल्ली से बाहर हैं, तो अपने शहर का सूर्योदय देख लें। खिड़की शहर के हिसाब से कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है, पर 10:31 की सीमा से आगे न जाएं।

4, 5 और 6 नवंबर 2026 का पंचांग (दिल्ली)

नक्षत्र यानी चंद्रमा उस दिन आकाश के जिस तारा-समूह में है। राशि यानी सूर्य या चंद्रमा उस समय राशिचक्र के जिस भाग में हैं।

तारीखसूर्योदय की तिथिनक्षत्रसूर्योदय / सूर्यास्तचंद्रोदयसूर्य / चंद्र राशि
बुधवार, 4 नवंबरकृष्ण दशमी (11:04 तक)पूर्वा फाल्गुनी06:36 / 17:3201:43तुला / सिंह
गुरुवार, 5 नवंबरकृष्ण एकादशी (10:36 तक)उत्तरा फाल्गुनी06:36 / 17:3202:42तुला / सिंह
शुक्रवार, 6 नवंबरकृष्ण द्वादशी (10:31 तक)हस्त06:37 / 17:3103:40तुला / कन्या

कृष्ण पक्ष के आखिरी दिनों में चंद्रोदय देर रात होता है, इसलिए यहां चंद्रोदय के समय 01:43, 02:42 और 03:40 रात के हैं।

रमा एकादशी 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रमा एकादशी 2026 कब है?

गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को। एकादशी तिथि 4 नवंबर 11:04 से 5 नवंबर 10:36 तक है, और 5 नवंबर के सूर्योदय पर एकादशी होने से व्रत उसी दिन है।

रमा एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?

6 नवंबर को सुबह 06:37 से 10:31 तक (दिल्ली)। 10:31 पर द्वादशी समाप्त हो जाती है, इसलिए उससे पहले व्रत खोल लें।

क्या रमा एकादशी और वसु बारस एक ही दिन हैं?

हां, 2026 में दोनों 5 नवंबर को हैं। एकादशी सुबह 10:36 तक है और वसु बारस उसी शाम प्रदोष काल की द्वादशी पर।

धनतेरस 2026 कब है?

6 नवंबर 2026 को, यानी पारण वाले दिन। तारीख की उलझन और यम दीपम का समय धनतेरस वाले लेख में है।

क्या रमा एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

परंपरा के अनुसार नहीं। एकादशी पर चावल और अनाज छोड़ा जाता है। फल, दूध और साबूदाना जैसे फलाहार ले सकते हैं।

इस एकादशी का नाम रमा क्यों है?

रमा लक्ष्मी जी का नाम है। यह एकादशी विष्णु और लक्ष्मी दोनों को समर्पित मानी जाती है, और दिवाली से ठीक पहले आती है।

अपने शहर का सूर्योदय, तिथि और नक्षत्र रोज़ देखने के लिए हमारा दैनिक पंचांग है। पारण का सही समय अपने शहर के सूर्योदय से ही तय करें।

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