काली पूजा 2026: 8 नवंबर की रात बंगाल में दिवाली की जगह माँ काली की पूजा क्यों — निशीथ समय और परंपरा

काली पूजा 2026 रविवार, 8 नवंबर की रात निशीथ काल में है। बंगाल की लक्ष्मी पूजा कोजागरी पर हो चुकी होती है, इसलिए कार्तिक अमावस्या की रात माँ काली की है। कोलकाता में निशीथ 22:56–23:44, दिल्ली में 23:40–00:28।

काली पूजा 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 की रात को है। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 से शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक रहती है। उत्तर भारत इसी शाम दिवाली की लक्ष्मी पूजा करता है, जबकि बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में यही रात माँ काली की पूजा की रात है। पूजा का समय निशीथ काल है, यानी आधी रात का मध्य — कोलकाता में रात 10:56 से 11:44 और दिल्ली में रात 11:40 से 12:28 तक।

काली पूजा 2026 की तारीख और तिथि क्या है?

तिथि का मतलब है चंद्रमा की चाल से बना एक दिन। अमावस्या वह तिथि है जब चाँद बिल्कुल नहीं दिखता। हमारे पंचांग इंजन के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:28 पर लगती है और 9 नवंबर को दोपहर 12:32 पर उतरती है।

काली पूजा अमावस्या की रात निशीथ काल में होती है। 8 नवंबर की रात अमावस्या चल रही है, इसलिए यही काली पूजा की रात है। 9 नवंबर की रात आने तक अमावस्या दोपहर में ही खत्म हो चुकी होगी।

दिवाली भी 8 नवंबर को ही है, क्योंकि उस शाम प्रदोष काल — सूर्यास्त के बाद का समय — अमावस्या में पड़ता है। 8 या 9 की उलझन का पूरा हिसाब दिवाली 2026: 8 या 9 नवंबर लेख में है।

विवरण8 नवंबर 2026 (दिल्ली)
दिनरविवार
तिथिकार्तिक कृष्ण अमावस्या — 8 नवंबर 11:28 से 9 नवंबर 12:32 तक
नक्षत्रस्वाति
सूर्य / चंद्रदोनों तुला राशि में
सूर्योदय / सूर्यास्त06:39 / 17:30
पूजा कालनिशीथ — रात 11:40 से 12:28 (दिल्ली)

सूर्य और चंद्र दोनों का तुला राशि में होना ही अमावस्या की पहचान है। दोनों आकाश में एक साथ आ जाते हैं, इसलिए चाँद रात में दिखाई नहीं देता।

बंगाल में दिवाली की रात लक्ष्मी नहीं, काली की पूजा क्यों?

सीधा जवाब बंगाल के त्योहार-कैलेंडर में है। बंगाल में लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या पर नहीं, बल्कि उससे पहले शरद पूर्णिमा की रात होती है। इसे कोजागरी लक्ष्मी पूजा कहते हैं। यानी जब उत्तर भारत दिवाली की तैयारी कर रहा होता है, बंगाल की लक्ष्मी पूजा हो चुकी होती है। उसकी तारीख और विधि शरद पूर्णिमा और कोजागर पूजा 2026 में देखें।

दूसरी वजह अमावस्या की रात का स्वभाव है। परंपरा के अनुसार माँ काली की उपासना अमावस्या की गहरी, चाँद-रहित रात में निशीथ काल में की जाती है। कार्तिक अमावस्या साल की सबसे जानी-पहचानी अमावस्या है, इसलिए यही रात श्यामा पूजा या काली पूजा की रात बन गई। श्यामा माँ काली का ही एक नाम है।

इसका मतलब यह नहीं कि बंगाल में दिवाली के दीये नहीं जलते। कई घरों में इसी शाम दीपान्विता लक्ष्मी पूजा भी होती है — दीपों वाली लक्ष्मी पूजा — और घर-आँगन दीयों से सजते हैं। पर रात का मुख्य आयोजन काली पूजा ही है।

असम, ओडिशा और त्रिपुरा में भी यही परंपरा है। तो एक ही रात, एक ही अमावस्या: उत्तर में शाम को लक्ष्मी, पूर्व में आधी रात को काली।

निशीथ काल क्या है और यह घड़ी के 12 बजे क्यों नहीं होता?

निशीथ काल का मतलब है रात का मध्य भाग। पंचांग में "आधी रात" घड़ी के 12:00 से तय नहीं होती। यह सूर्यास्त और अगले दिन के सूर्योदय के ठीक बीच का बिंदु है। इस बिंदु से 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद तक — कुल 48 मिनट — निशीथ काल कहलाता है।

नवंबर में सूर्यास्त जल्दी होता है, इसलिए रात लंबी होती है और उसका मध्य घड़ी के 12 बजे से पहले या आसपास पड़ता है। कोलकाता में 8 नवंबर को सूर्यास्त 16:54 पर है, इसलिए वहाँ निशीथ काल रात 12 बजने से पहले ही पूरा हो जाता है। मुंबई में सूर्यास्त 18:01 पर है, इसलिए वहाँ निशीथ 11:58 पर शुरू होकर 12:46 तक चलता है।

यही वजह है कि "रात 12 बजे पूजा" कहना पूरा सच नहीं है। सही समय आपके शहर के सूर्यास्त पर निर्भर है।

8 नवंबर 2026 को आपके शहर में निशीथ काल कब है?

नीचे की टेबल हमारे पंचांग इंजन के सूर्यास्त और अगली सुबह के सूर्योदय से निकाली गई है। समय लगभग हैं; स्थानीय पंचांग में कुछ मिनट का अंतर मिल सकता है।

शहरसूर्यास्त (8 नवंबर)निशीथ काल (लगभग)
कोलकाता16:5422:56 – 23:44
पटना17:0323:09 – 23:57
लखनऊ17:1823:26 – 00:14
चेन्नई17:3923:28 – 00:16
हैदराबाद17:4023:35 – 00:23
बेंगलुरु17:5023:39 – 00:27
भोपाल17:3723:39 – 00:27
दिल्ली17:3023:40 – 00:28
जयपुर17:3823:46 – 00:34
पुणे17:5823:54 – 00:42
मुंबई18:0123:58 – 00:46
अहमदाबाद17:5723:59 – 00:47

सबसे बड़ा फर्क कोलकाता का है: वहाँ काली पूजा का निशीथ काल रात 10:56 से 11:44 तक है, घड़ी में 12 बजने से पहले। पटना में भी यह 11:57 तक पूरा हो जाता है। दिल्ली, बेंगलुरु और भोपाल में यह 11:40 के आसपास शुरू होता है, और मुंबई-अहमदाबाद में लगभग ठीक 12 बजे।

भूत चतुर्दशी 2026 कब है? 14 दीये और 14 शाक

बंगाल में काली पूजा से एक शाम पहले भूत चतुर्दशी होती है। यह उत्तर भारत की नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का बंगाली रूप है। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:48 से 8 नवंबर सुबह 11:28 तक चलती है। 14 दीयों की परंपरा उसी शाम की है जब चतुर्दशी चल रही हो, यानी शनिवार, 7 नवंबर 2026 की शाम

परंपरा के अनुसार इस शाम घर में 14 दीये जलाए जाते हैं और दिन में 14 तरह के शाक — पत्तेदार साग — खाए जाते हैं। नाम में "भूत" शब्द है, और लोक-मान्यता में यह शाम पुरखों को याद करने से जुड़ी है। अगली शाम दीये और बढ़ जाते हैं, और रात काली पूजा की होती है।

एक बात जो अक्सर उलझाती है: हमारे इंजन में नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 8 नवंबर को दर्ज है, क्योंकि 8 नवंबर के सूर्योदय पर चतुर्दशी तिथि चल रही है। बंगाल की 14 दीयों वाली शाम 7 नवंबर की है, क्योंकि वह शाम की परंपरा है और उस शाम चतुर्दशी चल रही है। तिथि एक ही है, बस दिन का समय अलग है। नरक चतुर्दशी का मुहूर्त और कथा नरक चतुर्दशी 2026 लेख में है।

काली पूजा की रात पंडाल में कैसा माहौल होता है?

अमावस्या की रात है, इसलिए आसमान में चाँद नहीं होता। नीचे पंडाल सैकड़ों दीयों से जगमगाता है। कोलकाता और बंगाल के शहरों-कस्बों में मोहल्ले-मोहल्ले काली पूजा के पंडाल सजते हैं, और घरों में भी पूजा होती है।

माँ काली को लाल जबा — गुड़हल — के फूल और उसकी मालाएँ चढ़ाई जाती हैं। यह काली पूजा की सबसे पहचानी जाने वाली चीज़ है। परंपरा में जबा माँ काली को प्रिय माना जाता है। धूप का धुआँ, दीयों की कतारें और अँधेरे आसमान का मेल इस रात को बाकी रातों से अलग बनाता है।

मुख्य पूजा निशीथ काल में होती है, इसलिए पंडालों में भीड़ रात 11 बजे के बाद बढ़ती है और पूजा देर रात तक चलती है। घर पर पूजा करने वाले भी अपने शहर के निशीथ समय का इंतज़ार करते हैं। कुछ स्थानों पर इस पूजा से जुड़ी पुरानी परंपराएँ भी हैं; घर की पूजा में फूल, दीप और भोग पर्याप्त माने जाते हैं।

घर पर काली पूजा 2026 कैसे करें?

  1. 7 नवंबर, शनिवार शाम: भूत चतुर्दशी — घर में 14 दीये जलाएँ।
  2. 8 नवंबर, रविवार शाम: सूर्यास्त के बाद घर के दीये जलाएँ। जिन घरों में दीपान्विता लक्ष्मी पूजा होती है, वह इसी समय करें।
  3. 8 नवंबर, रात: ऊपर की टेबल से अपने शहर का निशीथ काल देखें। उसी 48 मिनट में माँ काली की पूजा करें — लाल जबा, दीप, धूप और भोग के साथ।
  4. समय याद रखें: कोलकाता में यह रात 10:56 से 11:44 है; दिल्ली में 11:40 से 12:28; मुंबई में 11:58 से 12:46।

अपने शहर का सटीक सूर्यास्त और निशीथ समय आप हमारे दैनिक पंचांग में भी देख सकते हैं।

काली पूजा 2026 से जुड़े सवाल

काली पूजा 8 नवंबर को है या 9 नवंबर को?

8 नवंबर की रात। अमावस्या 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक ज़रूर है, पर काली पूजा निशीथ काल में होती है और 9 की रात तक अमावस्या खत्म हो चुकी होगी। ज़्यादातर शहरों में निशीथ काल घड़ी के हिसाब से 9 नवंबर के शुरुआती मिनटों में जाता है, पर वह 8 नवंबर की ही रात है।

क्या बंगाल में दिवाली नहीं मनाई जाती?

मनाई जाती है — दीये जलते हैं और कई घरों में दीपान्विता लक्ष्मी पूजा होती है। फर्क यह है कि बंगाल की मुख्य लक्ष्मी पूजा शरद पूर्णिमा (कोजागरी) को हो चुकी होती है, इसलिए कार्तिक अमावस्या की रात माँ काली की होती है।

निशीथ काल कोलकाता में इतना जल्दी क्यों है?

क्योंकि कोलकाता में सूर्यास्त 16:54 पर है, मुंबई से एक घंटे से ज़्यादा पहले। निशीथ सूर्यास्त और सूर्योदय का मध्य है, इसलिए जितना जल्दी सूरज डूबेगा, उतना जल्दी निशीथ आएगा। इसीलिए एक ही रात कोलकाता की पूजा 12 बजने से पहले पूरी हो जाती है और मुंबई की 12 बजे के बाद शुरू होती है।

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