अमावस्या और पूर्णिमा 2026: पूरी लिस्ट, तारीख और इन दिनों के नियम
30 जुलाई से 24 नवंबर 2026 के बीच चार अमावस्या और चार पूर्णिमा पड़ रही हैं। हर एक की सही तिथि, आरंभ-समाप्ति का समय, सूर्योदय और चंद्रोदय — सब हमारे पंचांग इंजन से पढ़कर। साथ में स्नान-दान के नियम और अमावस्या से जुड़े डर पर एक सीधी, ईमानदार बात।
हर चंद्र मास में दो तिथियाँ बिना चूके लौटती हैं। अमावस्या कृष्ण पक्ष को बंद करती है, जिस दिन आकाश में चंद्रमा दिखता ही नहीं; पूर्णिमा शुक्ल पक्ष को, जिस रात चंद्रमा पूरा भरा होता है। श्राद्ध, तर्पण, स्नान, दान, व्रत और साल के कई बड़े त्योहार इन्हीं दो तिथियों पर टिके हैं। इस पेज पर वही तिथियाँ हैं जिन्हें हमारा पंचांग इंजन जांच सकता है, पूरे समय के साथ।
यह पेज कहाँ तक जांचा गया है
हमारे पंचांग डेटाबेस में 118 दिन लगातार गिने हुए मौजूद हैं — 30 जुलाई 2026 से 24 नवंबर 2026 तक। नीचे की हर तारीख, तिथि का आरंभ और अंत, सूर्योदय और चंद्रोदय उसी इंजन से नई दिल्ली के लिए पढ़ा गया है, किसी छपे कैलेंडर से नहीं।
इस दायरे में ठीक चार अमावस्या और चार पूर्णिमा हैं। इसके बाहर — आषाढ़ पूर्णिमा और दिसंबर से आगे मार्गशीर्ष की तिथियाँ — हमारे पास जांचे हुए आँकड़े नहीं, और हम अंदाज़ा नहीं लगाएँगे। बिना जांचे तारीख गढ़ने वाला पेज अधूरे पेज से ज़्यादा नुकसान करता है।
30 जुलाई से 24 नवंबर 2026 तक की हर अमावस्या
तिथि दिन नहीं, अवधि होती है। अमावस्या उस तारीख को पड़ी मानी जाती है जिस दिन सूर्योदय पर वह चल रही हो — पर तिथि अक्सर एक दिन पहले शुरू होकर अगले दिन बीच में ही खत्म हो जाती है। दोनों सिरे मायने रखते हैं, क्योंकि तर्पण और दान तभी करने हैं जब तिथि सचमुच चल रही हो।
| तारीख (वार) | मास | प्रचलित नाम | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | सूर्योदय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 12 अगस्त 2026 (बुधवार) | श्रावण | हरियाली / श्रावणी अमावस्या | 12 अगस्त, 01:54 | 12 अगस्त, 23:07 | 05:49 | पुष्य |
| 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) | भाद्रपद | कुशग्रहणी / पिठोरी अमावस्या | 10 सितंबर, 10:34 | 11 सितंबर, 08:58 | 06:05 | पूर्वाफाल्गुनी |
| 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) | आश्विन | सर्वपितृ अमावस्या (महालया); यह शनि अमावस्या भी है | 9 अक्टूबर, 21:37 | 10 अक्टूबर, 21:21 | 06:19 | हस्त |
| 9 नवंबर 2026 (सोमवार) | कार्तिक | कार्तिक अमावस्या; यह सोमवती अमावस्या भी है | 8 नवंबर, 11:28 | 9 नवंबर, 12:32 | 06:39 | स्वाति |
सभी समय नई दिल्ली के लिए एस्ट्रोवेदांश पंचांग इंजन से मापे गए। कोई समय अनुमानित नहीं।
एक पंक्ति पर पहले ही ध्यान दें। 11 सितंबर को अमावस्या तिथि 08:58 पर खत्म हो जाती है — सूर्योदय के लगभग तीन घंटे भीतर। उस दिन तर्पण का समय बहुत कम है; देर सुबह शुरू करने वाले तिथि चूक जाएँगे।
इसी अवधि की हर पूर्णिमा
पूर्णिमा पर एक और समय ज़रूरी है — चंद्रोदय। जो चंद्रमा उगा ही नहीं, उसे अर्घ्य नहीं दिया जा सकता; कई पूर्णिमा व्रत सूर्योदय से नहीं, चंद्र दर्शन से बंधे हैं।
| तारीख (वार) | मास | प्रचलित नाम | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | सूर्योदय (दिल्ली) | चंद्रोदय (दिल्ली) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) | श्रावण | श्रावण पूर्णिमा; रक्षाबंधन; सावन समाप्त | 27 अगस्त, 09:09 | 28 अगस्त, 09:48 | 05:58 | 18:53 |
| 26 सितंबर 2026 (शनिवार) | भाद्रपद | भाद्रपद पूर्णिमा; पूर्णिमा श्राद्ध | 25 सितंबर, 23:07 | 26 सितंबर, 22:18 | 06:12 | 17:53 |
| 26 अक्टूबर 2026 (सोमवार) | आश्विन | आश्विन पूर्णिमा; शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर है | 25 अक्टूबर, 11:57 | 26 अक्टूबर, 09:41 | 06:29 | 17:34 |
| 24 नवंबर 2026 (मंगलवार) | कार्तिक | कार्तिक पूर्णिमा; देव दीपावली | 23 नवंबर, 23:43 | 24 नवंबर, 20:23 | 06:51 | 16:56 |
नई दिल्ली के लिए मापे गए। 25 अक्टूबर की रात, यानी शरद पूर्णिमा की रात, चंद्रोदय 16:55 — यह भी मापा हुआ, अनुमान नहीं।
कौन सी तिथि किस काम के लिए है
- 12 अगस्त, श्रावण अमावस्या। इंजन में इस दिन कोई पर्व दर्ज नहीं, पर उत्तर भारत में यही हरियाली अमावस्या है — पौधे लगाने और सावन में शिव पूजा का दिन।
- 28 अगस्त, श्रावण पूर्णिमा। रक्षाबंधन और सावन की समाप्ति, दोनों डेटा में दर्ज हैं। तिथि 09:48 पर खत्म हो रही है, इसलिए राखी सुबह ही बाँधी जाएगी।
- 11 सितंबर, भाद्रपद अमावस्या। यहाँ भी कोई पर्व दर्ज नहीं। क्षेत्रीय रूप से यह कुशग्रहणी अमावस्या है, जब साल भर के कर्मकांड की कुश एकत्र होती है; महाराष्ट्र में पिठोरी अमावस्या।
- 26 सितंबर, भाद्रपद पूर्णिमा। पूर्णिमा श्राद्ध — यह प्रचलित नाम है, इंजन में इस दिन पर्व दर्ज नहीं। दर्ज यह है कि अगले दिन, 27 सितंबर से पितृ पक्ष आरंभ हो रहा है।
- 10 अक्टूबर, सर्वपितृ अमावस्या। पितृ पक्ष का अंतिम दिन और पितरों के लिए साल की सबसे बड़ी अमावस्या — उनके लिए भी जिन्हें मृत्यु तिथि याद नहीं। अलग पेज: सर्वपितृ अमावस्या 2026।
- 26 अक्टूबर, आश्विन पूर्णिमा। शरद पूर्णिमा, चाँदनी में खीर रखने की रात — तारीख की बारीकी नीचे है।
- 9 नवंबर, कार्तिक अमावस्या। सोमवती अमावस्या, और दीपावली समूह की अमावस्या — बारीकी नीचे है।
- 24 नवंबर, कार्तिक पूर्णिमा। देव दीपावली। साल की सबसे बड़ी स्नान-दान पूर्णिमा, जिस पर नदी स्नान की सबसे बड़ी भीड़ जुटती है।
सोमवती, शनि, भौमवती — नाम का असली मतलब
ये उपसर्ग सिर्फ वार बताते हैं जिस पर अमावस्या पड़ी है। सोमवती यानी सोमवार, शनि शनिवार, भौमवती मंगलवार। तिथि वही रहती है, सिर्फ वार बदलता है।
इस दायरे में दो संयोग बन रहे हैं। 10 अक्टूबर शनिवार है, इसलिए सर्वपितृ अमावस्या इस बार शनि अमावस्या भी है — पितरों के सबसे बड़े दिन और शनि के वार का यह मेल कम बनता है। 9 नवंबर सोमवार है, इसलिए कार्तिक अमावस्या सोमवती अमावस्या है। जांचे हुए दायरे में एक भी भौमवती अमावस्या नहीं है।
सोमवती अमावस्या पर स्त्रियों का व्रत और पीपल की परिक्रमा बहुत प्रचलित है। पर शास्त्र नहीं बताता कि सोमवार का यह मेल बाकी वारों से अधिक क्यों माना जाए। परंपरा पुरानी और व्यापक है; कारण लिखा नहीं मिलता। गढ़ा कारण देने से यही कहना बेहतर।
दो तारीखें जिन पर सबसे ज़्यादा भ्रम होता है
दीपावली 8 नवंबर है, पर कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर है। दोनों बातें सही हैं। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति से तय होती है — और अमावस्या 8 नवंबर को 11:28 पर लग रही है, इसलिए उस शाम वह चल रही है। सूर्योदय के नियम से अमावस्या का दिन 9 नवंबर बनता है। दीये जलाने हैं तो 8 नवंबर; स्नान, तर्पण या सोमवती व्रत के लिए 9 नवंबर। पूरा समय-विवरण दीपावली 2026 पेज पर है।
शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर है, जबकि सूर्योदय वाली पूर्णिमा 26 अक्टूबर है। तिथि 25 अक्टूबर 11:57 से 26 अक्टूबर 09:41 तक चलती है — पूर्ण चंद्र की रात 25 की ही है, और इंजन शरद पूर्णिमा उसी तारीख पर दर्ज करता है। खीर उसी शाम रखी जाएगी। स्नान, दान और सूर्योदय से बंधा व्रत 26 अक्टूबर का है। विस्तार शरद पूर्णिमा 2026 पर पढ़ें।
स्नान और दान के नियम, सीधे शब्दों में
- सूर्योदय पर या उससे पहले स्नान करें, जब तिथि चल रही हो। नदी या तीर्थ तक पहुँच सकें तो अच्छा; घर पर सामान्य जल में तीर्थ जल की कुछ बूँदें उतनी ही मान्य हैं। शास्त्र नदी अनिवार्य नहीं करता।
- पहले तिथि का अंत समय देखें। यही कदम सबसे ज़्यादा छूटता है। 28 अगस्त, 11 सितंबर और 26 अक्टूबर को तिथि सुबह दस बजे से पहले समाप्त हो जाती है।
- अमावस्या का दान गहरा और अन्न आधारित होता है — काले तिल, साबुत अनाज, वस्त्र, भोजन। तर्पण पूर्वाह्न में, दक्षिणाभिमुख होकर, जल और तिल से।
- पूर्णिमा का दान श्वेत होता है — चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र। कार्तिक पूर्णिमा पर अंधेरे के बाद नदी किनारे या तुलसी के नीचे दीप जलाने की परंपरा जुड़ती है।
- व्रत दोनों पर वैकल्पिक है। पूर्णिमा व्रत चंद्र दर्शन के बाद खुलता है, सूर्यास्त पर नहीं — इसीलिए ऊपर चंद्रोदय का स्तंभ है।
अमावस्या से जुड़ा डर — एक ईमानदार बात
अमावस्या को जो बदनामी मिली, वह शास्त्र से नहीं आई। शास्त्र इसे कर्तव्य का दिन मानता है, खतरे का नहीं — यह वह दिन है जब पितरों को जल देना है। यह अशुभ चेतावनी का ठीक उल्टा निर्देश है।
सावधानी मुहूर्त से आती है, और सिर्फ मुहूर्त से। विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार अमावस्या पर इसलिए नहीं रखा जाता कि मुहूर्त शास्त्र में यह तिथि इन आरंभों के लिए अनुपयुक्त मानी गई है। यह तकनीकी समय-व्यवस्था है; इससे यह तय नहीं होता कि दिन सुरक्षित है या नहीं। यात्रा, नौकरी, इलाज और रोज़ का जीवन इससे अछूता है।
जो लोक-परत ऊपर चढ़ी है — भूत-प्रेत की चेतावनी, अंधेरे के बाद बाहर न निकलने की बात — उसका शास्त्रीय आधार हम नहीं दिखा सकते, और उसे उधार के विज्ञान से भी नहीं सजाएँगे। चंद्रविहीन रात का कोई शारीरिक प्रभाव परंपरा ने कभी नहीं कहा। इस पर विस्तार से हमने क्या अमावस्या अशुभ दिन होती है में लिखा है।
समय दिल्ली के हैं, आपके शहर में बदलेंगे
इस पेज का हर समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय में मापा गया है। तिथि के आरंभ और अंत खगोलीय क्षण हैं और स्थान से बहुत कम खिसकते हैं, पर सूर्योदय और चंद्रोदय शहर के साथ बदल जाते हैं — दिल्ली में 18:53 पर दिखने वाला चंद्रमा मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में उसी मिनट नहीं उगेगा। ये कर्म इन्हीं दो घटनाओं से तय होते हैं, इसलिए अपना शहर देख लें। किसी शहर का समय हमने अनुमान से नहीं भरा। 30 जुलाई से पहले और 24 नवंबर 2026 के बाद की तिथियों के लिए अपने पंचांग में देखें — यह पेज बिना जांचा समय नहीं देगा।