अन्नकूट 2026: छप्पन भोग की पूरी लिस्ट — गोवर्धन पूजा (10 नवंबर) पर 56 भोग क्यों और घर पर क्या बनाएं

अन्नकूट यानी गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार 10 नवंबर को है। कथा के अनुसार कृष्ण ने 7 दिन गोवर्धन उठाया और 8 बार का भोजन छोड़ा — 7×8 = 56 भोग। छह रसों में बँटी पूरी 56 की लिस्ट और घर के लिए 11/21 भोग का रास्ता।

छप्पन भोग का मतलब है 56 तरह के व्यंजन, जो अन्नकूट के दिन भगवान कृष्ण (गिरिराज गोवर्धन) को एक साथ अर्पित किए जाते हैं। 2026 में अन्नकूट यानी गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को है। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने सात दिन गोवर्धन पर्वत उठाए रखा और अपने दिन के आठ बार के भोजन नहीं किए — 7 × 8 = 56। इसीलिए ब्रजवासियों ने 56 भोग बनाए। नीचे छह रसों में बँटी पूरी 56 की लिस्ट है, और घर के लिए 11 या 21 भोग का छोटा रास्ता भी।

अन्नकूट 2026 कब है — तारीख और तिथि

हमारे पंचांग इंजन के अनुसार गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 10 नवंबर 2026, मंगलवार को है। इस दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि है। प्रतिपदा यानी अमावस्या के बाद चंद्र पक्ष की पहली तिथि। यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:32 पर शुरू होती है और 10 नवंबर को दोपहर 14:01 पर समाप्त होती है। सूर्योदय के समय प्रतिपदा 10 नवंबर को रहती है, इसलिए पर्व उसी दिन मनाया जाता है।

विवरण10 नवंबर 2026 (दिल्ली)
दिनमंगलवार
तिथिकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — 9 नवंबर 12:32 से 10 नवंबर 14:01 तक
नक्षत्रविशाखा (चौथा पाद)
सूर्योदय / सूर्यास्त06:40 / 17:29
चंद्रोदय07:33
सूर्य / चंद्र राशिसूर्य तुला में, चंद्र वृश्चिक में

समय दिल्ली के हिसाब से हैं; दूसरे शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त कुछ मिनट आगे-पीछे रहेगा। दिवाली के पाँच दिनों के क्रम में यह दिन कहाँ आता है, इसके लिए दिवाली 2026 का पाँच-दिन का कैलेंडर देखें।

छप्पन भोग में 56 ही क्यों?

कथा के अनुसार इंद्र के कोप से ब्रज में मूसलाधार वर्षा हुई। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर सात दिन तक उठाए रखा और सारे ब्रजवासी, गायें और पशु उसके नीचे सुरक्षित रहे।

मान्यता है कि बाल कृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे। सात दिन तक पर्वत थामे रहने में उन्होंने कुछ नहीं खाया। वर्षा रुकी तो यशोदा और ब्रजवासियों ने सात दिन के आठ-आठ भोजन का हिसाब लगाया — 7 × 8 = 56 — और उतने ही व्यंजन बनाकर उन्हें अर्पित किए। यही परंपरा हर साल अन्नकूट के रूप में चलती है।

"अन्नकूट" का सीधा अर्थ है अन्न का पहाड़ — "कूट" का मतलब ढेर या शिखर। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट एक ही दिन के दो पहलू हैं: एक गोवर्धन की पूजा, दूसरा अन्न का भोग। पूजा की पूरी विधि और कथा के लिए गोवर्धन पूजा 2026 की विधि और कथा पढ़ें।

छप्पन भोग की पूरी लिस्ट — छह रसों में बँटी

परंपरा में भोग छह रसों में बाँटा जाता है। रस यानी स्वाद — मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला)। मंदिरों की सूचियाँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए नीचे की सूची घर में बनने वाले सात्विक व्यंजनों की एक व्यावहारिक सूची है। सात्विक यानी बिना प्याज़-लहसुन, शुद्ध घी और सादे मसालों में बना भोजन।

रससरल अर्थव्यंजनसंख्या
मधुरमीठा1 खीर, 2 रबड़ी, 3 मालपुआ, 4 बेसन के लड्डू, 5 बूंदी के लड्डू, 6 पेड़ा, 7 सूजी का हलवा, 8 मूंग दाल का हलवा, 9 पंजीरी, 10 माखन-मिश्री, 11 गुलाब जामुन, 12 जलेबी, 13 खोया बर्फी, 14 कलाकंद, 15 श्रीखंड, 16 मोहनथाल, 17 केसरिया मीठे चावल, 18 शक्करपारे18
अम्लखट्टा19 बूंदी का रायता, 20 सादा दही, 21 इमली की चटनी, 22 धनिया-पुदीना चटनी, 23 आम का अचार, 24 नींबू का अचार, 25 कढ़ी, 26 छाछ8
लवणनमकीन और अन्न27 सादा चावल, 28 जीरा चावल, 29 खिचड़ी, 30 पूरी, 31 रोटी, 32 बाजरे या मक्के की रोटी, 33 मूंग की दाल, 34 अरहर की दाल, 35 चना दाल, 36 पापड़, 37 मठरी, 38 नमक-पारे12
कटुतीखा, मसालेदार39 खस्ता कचौड़ी, 40 आलू की रसेदार सब्ज़ी, 41 लौकी की सब्ज़ी, 42 भिंडी की सब्ज़ी, 43 कद्दू की सब्ज़ी, 44 पनीर की सब्ज़ी, 45 पंचमेल सब्ज़ी, 46 मिर्ची वड़ा, 47 अदरक-हरी मिर्च की चटनी, 48 हरी मिर्च का अचार10
तिक्तकड़वा, हरी पत्तेदार49 मेथी-आलू, 50 करेले की सब्ज़ी, 51 पालक की सब्ज़ी3
कषायकसैला — फल, मेवा, मुखवास52 केला, 53 सेब, 54 अनार, 55 मेवे (काजू-बादाम-किशमिश), 56 पान-सुपारी-इलायची (मुखवास)5

कुल 56। अपने इलाके की चीज़ें बदल लें — जैसे मोहनथाल की जगह बालूशाही, या बाजरे की रोटी की जगह मक्के की। संख्या से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि हर रस शामिल हो और सब कुछ शुद्ध घी और सात्विक ढंग से बना हो।

घर पर 11 भोग या 21 भोग — छोटा रास्ता

हर घर में 56 व्यंजन बनाना संभव नहीं। परंपरा में भाव मुख्य है, संख्या नहीं। इसलिए बहुत से परिवार 11 या 21 भोग लगाते हैं — इसमें भी हर रस आ जाता है।

11 भोग (आधार)21 भोग (11 + ये 10)
1 खीर
2 सूजी का हलवा
3 बेसन के लड्डू
4 पूरी
5 आलू की सब्ज़ी
6 कढ़ी
7 सादा चावल
8 बूंदी का रायता
9 पापड़
10 माखन-मिश्री
11 फल (केला या सेब)
12 मालपुआ
13 पेड़ा
14 पंजीरी
15 मूंग की दाल
16 लौकी की सब्ज़ी
17 रोटी
18 इमली की चटनी
19 अचार
20 खस्ता कचौड़ी
21 मेवे

काम बाँटने का आसान तरीका: लड्डू, पंजीरी, मठरी और अचार एक-दो दिन पहले बन सकते हैं। खीर, हलवा, पूरी और सब्ज़ी पूजा की सुबह। फल और दही बाज़ार से ताज़ा। माखन-मिश्री और तुलसी-दल हर हाल में रखें — ब्रज की परंपरा में यही गिरिराज का प्रिय भोग माना जाता है।

अन्नकूट का भोग कैसे लगाया जाता है?

1. गोवर्धन बनाना

आँगन या पूजा-स्थान में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। जहाँ गोबर नहीं मिलता, वहाँ चावल या अन्न का ढेर लगाकर गोवर्धन बनाते हैं — यही "अन्न का कूट" है। ऊपर एक छोटी ध्वजा, फूल और दीपक रखते हैं। कई घर गोवर्धन के पास गाय-बछड़े की छोटी आकृतियाँ भी बनाते हैं।

2. भोग सजाना

सारे व्यंजन गोवर्धन के सामने थालियों और पत्तलों में सजाए जाते हैं — मिठाई, नमकीन, अन्न, फल, दही। गिरिराज को माखन-मिश्री और तुलसी-दल अवश्य। हर व्यंजन पर तुलसी का एक पत्ता रखने की परंपरा है।

3. आरती और परिक्रमा

दीप जलाकर आरती की जाती है। फिर गोवर्धन की परिक्रमा — यानी उसके चारों ओर चलना — की जाती है। गाय की पूजा भी इसी दिन होती है; परंपरा में गोवर्धन और गौ दोनों का सम्मान एक ही भाव है।

4. समय

प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को दोपहर 14:01 तक है। परंपरा में भोग तिथि रहते लगाना अच्छा माना जाता है; कई परिवार शाम को भी अन्नकूट लगाते हैं। अपने कुल या मंदिर की परंपरा को प्राथमिकता दें।

5. प्रसाद

भोग के बाद सारा अन्न प्रसाद बनकर परिवार, पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों में बाँटा जाता है। अन्नकूट का भाव यही है — जो बना है, सब मिलकर खाएँ।

ब्रज से गुजरात और बंगाल तक अन्नकूट

ब्रज — मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन — में अन्नकूट का सबसे पुराना और विशाल रूप देखा जाता है। मंदिरों में सचमुच अन्न का पहाड़ खड़ा होता है और छप्पन भोग उसके चारों ओर सजता है। राजस्थान के नाथद्वारा का अन्नकूट वैष्णव परंपरा का बड़ा उत्सव है। गुजरात के वैष्णव मंदिरों में भी अन्नकूट व्यापक रूप से लगता है। बंगाल के कुछ वैष्णव मंदिरों में भी अन्नकूट की परंपरा है। हर जगह की व्यंजन-सूची स्थानीय होती है — इसलिए "सही 56" पर बहस की ज़रूरत नहीं, भाव पर ध्यान दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 56 भोग बनाना ज़रूरी है?

नहीं। परंपरा में संख्या से ज़्यादा भाव और शुद्धता मायने रखती है। 11 या 21 भोग, या जितना घर में सहज हो, वह भी पूरा अन्नकूट है।

छप्पन भोग में प्याज़-लहसुन क्यों नहीं?

भोग सात्विक होता है। परंपरा में प्याज़ और लहसुन को तामसिक माना जाता है, इसलिए भोग की रसोई में इनका प्रयोग नहीं होता। हींग और अदरक से स्वाद पूरा हो जाता है।

अन्नकूट और गोवर्धन पूजा में क्या फर्क है?

दोनों एक ही दिन — कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — के दो हिस्से हैं। गोवर्धन पूजा में गिरिराज और गौ की पूजा होती है, अन्नकूट में अन्न का भोग लगता है। इस साल दोनों 10 नवंबर 2026 को हैं।

भोग लगाने का समय क्या है?

प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को दोपहर 14:01 तक रहती है। सूर्योदय 06:40 पर है। तिथि के भीतर भोग लगाना परंपरा में अच्छा माना जाता है; स्थानीय पंचांग और अपने मंदिर की रीति से मिला लें।

भोग के बाद बचे अन्न का क्या करें?

वह प्रसाद है — परिवार, मित्रों, पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों में बाँटें। अन्नकूट में अन्न फेंका नहीं जाता, यही इस पर्व की मूल शिक्षा है।

10 नवंबर की तिथि, नक्षत्र और दिन के बाकी समय हमारे दैनिक पंचांग में देखे जा सकते हैं। अन्नकूट की तैयारी में यह लिस्ट काम आए, तो घर के बड़ों से अपने इलाके के व्यंजन भी जोड़ लें — यही असली छप्पन भोग है।

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