बेस्तु वरस 2026: 10 नवंबर को गुजराती नया साल — गोवर्धन के दिन ही क्यों, चोपड़ा पूजन और साल मुबारक

बेस्तु वरस 2026 मंगलवार 10 नवंबर को है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर 12:32 से 10 नवंबर 14:01 तक; सूर्योदय पर प्रतिपदा होने से नया साल 10 को, गोवर्धन पूजा के साथ। चोपड़ा पूजन दिवाली रात 8 नवंबर।

बेस्तु वरस 2026 मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है। यही गुजराती नया साल है, और इसी दिन गुजरात की कार्तिक-आदि गिनती में विक्रम संवत 2083 शुरू होता है। हमारे पंचांग इंजन के अनुसार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर 12:32 से 10 नवंबर दोपहर 14:01 तक है। 10 नवंबर के सूर्योदय पर प्रतिपदा चल रही है, इसलिए नया साल उसी दिन है — और उसी दिन गोवर्धन पूजा भी है।

पूरा क्रम इस तरह है: रविवार 8 नवंबर को दिवाली और लक्ष्मी पूजन, सोमवार 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या, मंगलवार 10 नवंबर को बेस्तु वरस। गुजरात में चोपड़ा पूजन, यानी बही-खातों की पूजा, दिवाली की रात 8 नवंबर को होता है और नई बही बेस्तु वरस की सुबह खुलती है।

बेस्तु वरस 2026 कब है और तारीख कैसे तय हुई?

बेस्तु वरस गुजराती में नए साल का नाम है। यह कार्तिक महीने की शुक्ल प्रतिपदा को आता है। प्रतिपदा यानी अमावस्या के बाद की पहली तिथि, जब चांद फिर से बढ़ना शुरू करता है।

2026 में यह तिथि दो तारीखों पर फैली है। ऐसे में पंचांग सूर्योदय की तिथि देखता है। जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो, वही दिन बेस्तु वरस है।

बातसमय (दिल्ली)
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा शुरू9 नवंबर, दोपहर 12:32
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा समाप्त10 नवंबर, दोपहर 14:01
10 नवंबर को सूर्योदय06:40
सूर्योदय पर तिथिशुक्ल प्रतिपदा
बेस्तु वरस 2026मंगलवार, 10 नवंबर 2026

समय दिल्ली के लिए हैं। आपके शहर में सूर्योदय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, लेकिन तारीख वही रहती है।

गुजराती नया साल गोवर्धन पूजा के दिन ही क्यों आता है?

यह संयोग नहीं है। गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है। गुजराती विक्रम संवत का साल भी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है। तिथि एक है, इसलिए दिन भी हमेशा एक ही होता है। परंपरा में इसी तिथि को बलि प्रतिपदा भी कहते हैं।

इसलिए जिस सुबह उत्तर भारत में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की तैयारी होती है, उसी सुबह गुजरात में "साल मुबारक" कहा जाता है। 2026 में यह सुबह 10 नवंबर की है। गोवर्धन पूजा की विधि और कथा गोवर्धन पूजा 2026 वाले लेख में अलग से है।

कार्तिक-आदि और चैत्र-आदि: विक्रम संवत की दो गिनती

विक्रम संवत हिंदू पंचांग में साल गिनने का तरीका है। "आदि" का मतलब है शुरुआत। कार्तिक-आदि गिनती में साल कार्तिक महीने से शुरू होता है; यह गुजरात में चलती है, इसलिए वहां दिवाली के ठीक बाद नया साल आता है। चैत्र-आदि गिनती में साल चैत्र महीने से शुरू होता है; यह उत्तर भारत में चलती है, इसलिए वहां संवत 2083 चैत्र में ही बदल चुका है।

नतीजा: 10 नवंबर 2026 को गुजरात का संवत 2083 हो जाएगा, जबकि उत्तर भारत के पंचांग में 2083 पहले से चल रहा है। अंक एक ही है, बस साल बदलने का दिन अलग है। इसीलिए एक ही तारीख पर गुजराती कैलेंडर "नया साल" लिखता है और उत्तर भारत का कैलेंडर सिर्फ "गोवर्धन पूजा"।

9 नवंबर को नया साल क्यों नहीं, जबकि प्रतिपदा उसी दिन लगती है?

पंचांग में किसी दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो। इसे उदया तिथि कहते हैं। 9 नवंबर को सूर्योदय 06:39 पर है, और उस समय अमावस्या चल रही है। प्रतिपदा दोपहर 12:32 पर लगती है। इसलिए 9 नवंबर अमावस्या का दिन है और नया साल 10 नवंबर को है।

इसी वजह से गुजरात में दिवाली और बेस्तु वरस के बीच अक्सर एक शांत दिन आता है। 2026 में यह दिन अपने आप में खास है: सोमवार की अमावस्या, यानी सोमवती अमावस्या। परंपरा के अनुसार यह स्नान और दान का दिन है।

दिवाली से बेस्तु वरस तक: तीन दिन का क्रम

नीचे तीनों दिनों का पंचांग हमारे इंजन से, दिल्ली के लिए। "तिथि की खिड़की" का मतलब है वह समय जब तिथि शुरू और समाप्त होती है।

तारीखसूर्योदय पर तिथितिथि की खिड़कीसूर्योदय / सूर्यास्तपर्व
8 नवंबर, रविवारकृष्ण चतुर्दशी7 नवंबर 10:48 से 8 नवंबर 11:2806:39 / 17:30नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), दिवाली लक्ष्मी पूजन, चोपड़ा पूजन
9 नवंबर, सोमवारकृष्ण अमावस्या8 नवंबर 11:28 से 9 नवंबर 12:3206:39 / 17:29सोमवती अमावस्या, स्नान-दान
10 नवंबर, मंगलवारशुक्ल प्रतिपदा9 नवंबर 12:32 से 10 नवंबर 14:0106:40 / 17:29बेस्तु वरस, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, नई बही

8 नवंबर की सुबह चतुर्दशी है, 11:28 पर अमावस्या लगती है और शाम को लक्ष्मी पूजन होता है। गुजरात में उसी रात चोपड़ा पूजन होता है। प्रदोष काल, स्थिर लग्न और चौघड़िया के हिसाब से सटीक समय दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त वाले लेख में दिए हैं।

चांद और नक्षत्र की स्थिति भी देख लें। तीनों दिन सूर्य तुला राशि में है।

तारीखनक्षत्रचंद्र राशिचंद्रोदय
8 नवंबरस्वाति (पद 1)तुला05:36
9 नवंबरस्वाति (पद 4)तुला06:35
10 नवंबरविशाखा (पद 4)वृश्चिक07:33

इंजन के अनुसार 10 नवंबर को चांद वृश्चिक राशि में है और नक्षत्र स्वाति से विशाखा हो चुका है। अमावस्या के आसपास चांद सुबह सूर्य के साथ-साथ उगता है, इसलिए चंद्रोदय के समय सूर्योदय के करीब हैं।

चोपड़ा पूजन कब होता है और नई बही कब खुलती है?

चोपड़ा गुजराती में बही-खाता है, यानी हिसाब की किताब। चोपड़ा पूजन में व्यापारी नए साल की नई बही को लक्ष्मी पूजन के साथ रखकर पूजते हैं। गुजरात में यह दिवाली की रात, 8 नवंबर 2026 को होता है।

परंपरा के अनुसार नई लाल बही के पहले पन्ने पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाया जाता है। पास में कलम, कुछ सिक्के, गेंदे के फूल और जलता दीपक रखा जाता है। पूजन के बाद बही बंद रखी जाती है।

बेस्तु वरस की सुबह, 10 नवंबर को, यही बही खोली जाती है और नए साल का पहला हिसाब लिखा जाता है। दुकान खोलना, पहली बिक्री, पहली एंट्री — गुजराती व्यापार के लिए साल यहीं से शुरू होता है।

क्रम सीधा है: 8 नवंबर की रात पूजन, 9 नवंबर विराम, 10 नवंबर नई शुरुआत।

बेस्तु वरस के दिन क्या-क्या होता है?

साल मुबारक

"साल मुबारक" गुजराती नए साल की शुभकामना है। सुबह घर के बड़ों को प्रणाम, फिर रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मिलना-जुलना, मिठाई और फोन पर साल मुबारक — दिन इसी में जाता है।

अन्नकूट दर्शन

स्वामीनारायण और वैष्णव मंदिरों में इस दिन अन्नकूट सजता है। अन्नकूट का मतलब है अन्न का पहाड़ — भगवान के सामने अनेक तरह के व्यंजनों की सजावट। बेस्तु वरस की सुबह मंदिर जाकर अन्नकूट दर्शन करना गुजराती परिवारों की जमी हुई परंपरा है।

गोवर्धन पूजा

उसी दिन गोवर्धन पूजा है। कथा के अनुसार यह दिन गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है और इसमें भी अन्नकूट का भोग लगता है। गुजरात का नया साल और ब्रज की गोवर्धन पूजा, दोनों में अन्नकूट साझा सूत्र है।

बेस्तु वरस 2026 से जुड़े सवाल

बेस्तु वरस 2026 की तारीख क्या है?

मंगलवार, 10 नवंबर 2026। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 10 नवंबर के सूर्योदय (06:40, दिल्ली) पर चल रही है और दोपहर 14:01 तक रहती है।

क्या बेस्तु वरस और गोवर्धन पूजा हर साल एक ही दिन होते हैं?

हां। दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की तिथि पर हैं, इसलिए दिन हमेशा एक ही रहता है।

विक्रम संवत 2083 कब से शुरू है?

गुजरात की कार्तिक-आदि गिनती में 10 नवंबर 2026 से। उत्तर भारत की चैत्र-आदि गिनती में 2083 चैत्र में ही शुरू हो गया था।

चोपड़ा पूजन 2026 में कब करें?

दिवाली की रात, 8 नवंबर, लक्ष्मी पूजन के साथ। नई बही 10 नवंबर, बेस्तु वरस की सुबह खोलें।

9 नवंबर को क्या है?

सोमवती अमावस्या — वह अमावस्या जो सोमवार को सूर्योदय पर हो। स्नान-दान का दिन। गुजरात में यह दिवाली और नए साल के बीच का शांत दिन है।

2026 का क्रम याद रखें: 8 नवंबर दिवाली और चोपड़ा पूजन, 9 नवंबर सोमवती अमावस्या, 10 नवंबर बेस्तु वरस और गोवर्धन पूजा। अपने शहर के सूर्योदय और तिथि का सही समय AstroVedansh के रोज़ के पंचांग में देख सकते हैं। साल मुबारक!

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