दिवाली 2026: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कौन-सी खरीदें, स्थापना कैसे करें और पुरानी मूर्ति का क्या करें
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को है, मूर्ति धनतेरस 6 नवंबर को खरीदें। परंपरा के अनुसार मिट्टी की, बैठी हुई लक्ष्मी-गणेश मूर्ति लें, उत्तर-पूर्व में चौकी पर स्थापित करें और पुरानी मूर्ति को सम्मान से विसर्जित करें।
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है और मूर्ति खरीदने का पारंपरिक दिन धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 है। परंपरा के अनुसार मिट्टी की, बैठी हुई लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति चुनें, जिसमें गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो और मूर्ति कहीं से टूटी या चिपकी न हो। स्थापना उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में, चौकी पर लाल या पीले कपड़े के ऊपर करें। पुरानी मिट्टी की मूर्ति को बहते जल में या घर पर बाल्टी में विसर्जित करें, कूड़ेदान में कभी नहीं।
यह लेख तीन सवालों का एक ही जगह जवाब देता है: कौन-सी मूर्ति लें, उसे कहां बिठाएं, और पुरानी मूर्ति का सम्मान से क्या करें। सब कुछ परंपरा और वास्तु मान्यता पर आधारित है; आपके कुल की रीति अलग हो तो उसे ही मानें।
दुकान जाने से पहले 10 सेकंड की चेकलिस्ट
यह सूची फोन में रख लें और दुकान पर एक-एक बिंदु मिलाते जाएं:
- दिन: मूर्ति धनतेरस (6 नवंबर) को खरीदें, स्थापना और पूजा 8 नवंबर को।
- सामग्री (material): मिट्टी की मूर्ति पारंपरिक भी है और पर्यावरण के लिए भी सही।
- मुद्रा: लक्ष्मी और गणेश दोनों बैठी हुई मुद्रा में।
- सूंड: गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई (वाममुखी)।
- लक्ष्मी जी के चिह्न: उल्लू, कमल और स्वर्ण कलश साफ दिखें।
- जांच: मूर्ति कहीं से टूटी, चिपकी या दरार वाली न हो।
- स्थापना: उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा, चौकी पर लाल या पीला कपड़ा, सीधे ज़मीन पर नहीं।
- पुरानी मूर्ति: विसर्जन या मंदिर में समर्पण, कूड़ेदान में नहीं।
2026 में मूर्ति कब खरीदें और कब स्थापित करें?
हमारे पंचांग इंजन के अनुसार 2026 में धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर को और लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर को है। नीचे दिल्ली के लिए दोनों दिनों का विवरण है। दूसरे शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त कुछ मिनट आगे-पीछे रहते हैं।
| दिन | तारीख | सूर्योदय पर तिथि | तिथि की अवधि | नक्षत्र | सूर्योदय / सूर्यास्त | क्या करें |
|---|---|---|---|---|---|---|
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | कृष्ण द्वादशी | 5 नवंबर 10:36 से 6 नवंबर 10:31 तक | हस्त | 06:37 / 17:31 | मूर्ति खरीदें |
| लक्ष्मी पूजा (दिवाली) | रविवार, 8 नवंबर 2026 | कृष्ण चतुर्दशी | 7 नवंबर 10:48 से 8 नवंबर 11:28 तक | स्वाति | 06:39 / 17:30 | स्थापना और पूजा |
8 नवंबर को सूर्योदय पर चतुर्दशी तिथि है, जो 11:28 तक रहती है। इसीलिए इंजन उसी दिन नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) और लक्ष्मी पूजा दोनों दिखाता है। दोनों दिन सूर्य तुला राशि में है; चंद्र 6 नवंबर को कन्या में और 8 नवंबर को तुला में। शाम की पूजा का सटीक समय लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 8 नवंबर 2026 में अलग से दिया है।
धनतेरस पर खरीदारी का मुहूर्त और उस दिन क्या-क्या खरीदा जाता है, इसकी पूरी सूची धनतेरस 2026 खरीदारी गाइड में है।
कौन-सी मूर्ति खरीदें?
मिट्टी, धातु या पत्थर, कौन-सी सामग्री सही है?
परंपरा में दिवाली की लक्ष्मी-गणेश मूर्ति मिट्टी (clay) की होती है। कारण सीधा है: मिट्टी की मूर्ति पूजा के बाद जल में घुल जाती है और प्रकृति में वापस चली जाती है। यही पर्यावरण के लिए भी सबसे सही विकल्प है।
धातु या पत्थर की मूर्ति भी गलत नहीं है। फर्क सिर्फ यह है कि ऐसी मूर्ति स्थायी होती है। उसे हर साल विसर्जित नहीं किया जाता, बल्कि घर के मंदिर में रखा जाता है और दिवाली पर साफ करके फिर से पूजा जाता है।
बैठी हुई मूर्ति लें या खड़ी?
घर की पूजा के लिए परंपरा बैठी हुई लक्ष्मी और बैठे हुए गणेश की है। बैठी मुद्रा को परंपरा में घर में ठहराव और स्थिरता के भाव से जोड़ा जाता है। खड़ी लक्ष्मी की मूर्तियां सजावट के लिए ठीक हैं, पर पूजा-स्थापना के लिए बैठी मुद्रा ही चुनें।
गणेश जी की सूंड किस ओर होनी चाहिए?
घर की पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी सबसे आम पसंद हैं। इन्हें वाममुखी गणेश कहते हैं (वाम = बायां, मुखी = मुख वाला)। दुकान पर मूर्ति को सामने से देखें: सूंड गणेश जी की अपनी बाईं ओर मुड़ी होनी चाहिए।
लक्ष्मी जी की मूर्ति में क्या-क्या देखें?
लक्ष्मी जी की पारंपरिक मूर्ति में तीन चिह्न पहचान के हैं:
- कमल: लक्ष्मी जी कमल पर बैठी हों या हाथ में कमल हो।
- उल्लू: लक्ष्मी जी का वाहन। मूर्ति के पास या नीचे छोटा उल्लू बना होता है।
- स्वर्ण कलश: धन का कलश या हाथ से बरसते सिक्के।
ये तीनों चिह्न साफ और पूरे बने हों, तो मूर्ति पारंपरिक रूप से सही मानी जाती है।
दुकान पर मूर्ति की जांच कैसे करें?
मूर्ति को हाथ में लेकर धीरे से घुमाकर देखें। खंडित मूर्ति, यानी जिसमें कहीं दरार हो, कोई हिस्सा चिपकाया गया हो या उंगली-मुकुट टूटा हो, परंपरा में पूजा के लिए नहीं ली जाती। खास तौर पर ये जगहें देखें:
- गणेश जी की सूंड, हाथ और मुकुट
- लक्ष्मी जी के हाथ, कमल और मुकुट
- मूर्ति का आधार, नीचे से कोई दरार न हो
- रंग कहीं से उतरा या धब्बा न हो
छोटी-सी भी कमी दिखे तो बिना झिझक दूसरी मूर्ति मांग लें।
क्या हर साल नई मूर्ति लेना ज़रूरी है?
नहीं। हर साल नई मिट्टी की मूर्ति लाना बहुत घरों का रिवाज़ है, पर यह अनिवार्य नहीं है। अगर आपके घर के मंदिर में धातु या पत्थर की स्थायी लक्ष्मी-गणेश मूर्ति है, तो दिवाली पर उसी को साफ करके, नए वस्त्र और फूल के साथ पूजें। दोनों तरीके परंपरा में स्वीकार्य हैं।
मूर्ति की स्थापना कैसे करें?
स्थापना का मतलब है मूर्ति को पूजा के लिए उसके स्थान पर विधि से बिठाना। यह काम लक्ष्मी पूजा के दिन, 8 नवंबर को, पूजा शुरू होने से पहले होता है। क्रम इस तरह रखें:
- दिशा तय करें। वास्तु परंपरा के अनुसार घर का उत्तर-पूर्व (ईशान) कोना पहली पसंद है, उत्तर दिशा दूसरी। मूर्ति का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर रखें।
- चौकी रखें। मूर्ति सीधे ज़मीन पर नहीं रखी जाती। लकड़ी की चौकी या पाटा लें और उसे साफ कर लें।
- कपड़ा बिछाएं। चौकी पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं।
- कलश रखें। जल भरा कलश चौकी पर या उसके पास स्थापित करें।
- पहले गणेश, फिर लक्ष्मी। गणेश जी को पहले बिठाएं, फिर लक्ष्मी जी को। परंपरा के अनुसार गणेश जी लक्ष्मी जी के बाईं ओर बैठते हैं, यानी लक्ष्मी जी की अपनी बाईं तरफ, जो सामने से देखने पर आपकी दाईं ओर पड़ती है।
- पूजा तक ढककर रखें। जब तक पूजा शुरू न हो, मूर्तियों को साफ कपड़े से ढका रखें।
- पूजा के समय आवरण हटाएं और विधि शुरू करें।
पूजा की पूरी सामग्री सूची और क्रम दिवाली 2026 लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि में कदम-दर-कदम दिया है।
अगर घर में उत्तर-पूर्व कोना खाली न हो?
फ्लैट में हर बार ईशान कोना खाली नहीं मिलता। ऐसे में उत्तर दिशा में कोई साफ जगह चुनें और मूर्ति का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर रखें। वास्तु परंपरा में यही दूसरा विकल्प है। जो जगह साफ, शांत और रोज़ पहुंच में हो, वही ठीक है।
पुरानी मूर्ति का क्या करें?
पिछले साल की मिट्टी की मूर्ति के लिए पारंपरिक तरीका विसर्जन है, बहते जल में। लेकिन आज बहुत से शहरों में नदी या तालाब में विसर्जन पर रोक या सीमा है। ऐसे में तीन सम्मानजनक विकल्प हैं।
विकल्प 1: घर पर बाल्टी में विसर्जन
एक साफ बाल्टी या टब में पानी भरें। मूर्ति को हाथ जोड़कर, प्रणाम करके धीरे से पानी में रखें। मिट्टी की मूर्ति धीरे-धीरे घुल जाती है। बचा पानी और मिट्टी घर के गमले या बगीचे में डाल दें। इस तरह मूर्ति की मिट्टी पौधे में मिल जाती है और कहीं फेंकनी नहीं पड़ती।
विकल्प 2: मंदिर के संग्रह में दें
दिवाली के बाद बहुत से मंदिर पुरानी मूर्तियां एकत्र करते हैं और सामूहिक विसर्जन करवाते हैं। अपने आस-पास के मंदिर से पहले पूछ लें कि वे मूर्तियां लेते हैं या नहीं।
विकल्प 3: जहां अनुमति हो, बहते जल में विसर्जन
अगर आपके शहर ने विसर्जन के लिए जगह तय की है, तो वहां जाकर विसर्जन करें। स्थानीय नियम पहले जान लें।
जो कभी न करें
मूर्ति को कूड़ेदान में या खुले में न छोड़ें। जिस मूर्ति की साल भर पूजा हुई, उसे सम्मान के साथ ही विदा किया जाता है। यही परंपरा का मूल भाव है।
धातु या पत्थर की मूर्ति हो तो?
उसे विसर्जित नहीं करते। दिवाली से पहले साफ पानी से धोकर, पोंछकर, नया वस्त्र पहनाकर फिर से उसी स्थान पर बिठा दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मूर्ति धनतेरस पर ही खरीदनी चाहिए?
परंपरा में धनतेरस, यानी 6 नवंबर 2026, मूर्ति खरीदने का दिन है। यह रिवाज़ है, सख्त नियम नहीं। उस दिन न हो पाए तो पूजा से पहले खरीद लें और अपने घर की रीति का ध्यान रखें।
मूर्ति का मुख किस दिशा में हो?
वास्तु परंपरा के अनुसार पूर्व या पश्चिम की ओर। मूर्ति उत्तर-पूर्व या उत्तर में रखी हो और पूजा करने वाला उसके सामने बैठे।
मूर्ति में हल्की दरार दिख जाए तो क्या करें?
खरीदते समय दिखे तो दूसरी मूर्ति ले लें। घर आने के बाद दिखे तो परंपरा के अनुसार उसे सम्मान से विसर्जित करें और पूजा के लिए नई अखंडित मूर्ति लाएं। इसे शांति से, बिना जल्दबाज़ी के करें।
दिवाली के हफ्ते की तिथि, नक्षत्र और अपने शहर का सूर्योदय-सूर्यास्त देखना हो, तो हमारा दैनिक पंचांग हर दिन के लिए यही जानकारी देता है।