एकादशी व्रत में क्या खाएं, क्या नहीं: पूरी लिस्ट, चावल क्यों नहीं, और पारण का सही नियम (2026)
एकादशी व्रत में फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, समक चावल, आलू और सेंधा नमक खा सकते हैं; चावल, सभी अनाज, दाल, प्याज़-लहसुन नहीं। पारण अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद करें — रमा एकादशी 2026 का उदाहरण अंदर।
एकादशी व्रत में फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा, समक चावल, आलू, शकरकंद, सूखे मेवे, घी और सेंधा नमक खा सकते हैं। चावल और सभी अनाज, दाल-बीन्स, प्याज़, लहसुन और मांसाहार नहीं लिया जाता। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद और द्वादशी खत्म होने से पहले किया जाता है। नीचे पूरी लिस्ट, 2026 की अगली एकादशी तारीखें और पारण का एक असली उदाहरण है।
एकादशी क्या है और इस दिन खाने का नियम अलग क्यों है?
एकादशी चंद्र महीने की ग्यारहवीं तिथि है। तिथि यानी चंद्रमा की चाल से बनने वाला दिन, जो रात 12 बजे नहीं बल्कि अपने तय समय पर शुरू और खत्म होता है। हर महीने दो एकादशी आती हैं — एक शुक्ल पक्ष (बढ़ते चांद) में और एक कृष्ण पक्ष (घटते चांद) में।
परंपरा के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु का है और इस दिन अनाज छोड़कर हल्का भोजन लिया जाता है। इसीलिए एकादशी की खाने की लिस्ट बाकी व्रतों से थोड़ी अलग दिखती है — यहां कसौटी एक ही है: अनाज है या नहीं।
एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं? (पूरी लिस्ट)
सामान्य परंपरा में नीचे की चीज़ें व्रत में ली जाती हैं। इसे फलाहार कहते हैं — फल और अनाज-रहित हल्का भोजन।
| श्रेणी | क्या ले सकते हैं | ध्यान दें |
|---|---|---|
| फल | सभी ताज़े फल | सबसे आसान और हर परंपरा में मान्य |
| दूध से बनी चीज़ें | दूध, दही, घी | दिन में कई बार ले सकते हैं |
| व्रत के आटे | कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा | इनकी रोटी, पूरी या चीला बनता है |
| साबूदाना | खिचड़ी, खीर, वड़ा | घी में, सेंधा नमक के साथ |
| समक चावल (सामा) | व्रत का "चावल" | यह धान का चावल नहीं है, इसलिए मान्य है |
| कंद-सब्ज़ी | आलू, शकरकंद | उबालकर या घी में |
| मेवे | सूखे मेवे | थोड़ी मात्रा में, भूख संभालने के लिए |
| नमक | सेंधा नमक | साधारण नमक की जगह |
एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
- चावल और चावल से बनी हर चीज़।
- सभी अनाज — गेहूं का आटा, सूजी, मैदा और बाकी अनाज।
- दाल और बीन्स — हर तरह की दाल, चना, राजमा।
- प्याज़ और लहसुन।
- मांसाहार — मांस, मछली, अंडा।
- टमाटर और बैंगन — कई परिवारों में यह भी नहीं लिए जाते; यह घर की परंपरा पर निर्भर है।
सीधा नियम: जो अनाज या दाल से बना है, वह एकादशी में नहीं। बाकी लिस्ट परिवार और संप्रदाय के अनुसार थोड़ी बदलती है — घर के बड़ों से एक बार पूछ लें।
2026 में अगली एकादशी कब-कब हैं?
नीचे की तारीखें हमारे पंचांग इंजन से हैं और दिल्ली के सूर्योदय पर आधारित हैं। एकादशी का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि चल रही हो — इसे उदया तिथि कहते हैं। तिथि का समय पूरे भारत में लगभग एक ही रहता है, पर सूर्योदय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग एक बार देख लें।
| तारीख | दिन | एकादशी | पक्ष | एकादशी तिथि (दिल्ली) | सूर्योदय |
|---|---|---|---|---|---|
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | परिवर्तिनी | शुक्ल | 21 सितंबर 20:00 से 22 सितंबर 21:43 | 06:10 |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | इंदिरा | कृष्ण | 6 अक्टूबर 02:08 से 7 अक्टूबर 00:35 | 06:17 |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | पापांकुशा | शुक्ल | 21 अक्टूबर 14:11 से 22 अक्टूबर 14:47 | 06:27 |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | रमा | कृष्ण | 4 नवंबर 11:04 से 5 नवंबर 10:36 | 06:36 |
| 20 नवंबर 2026* | शुक्रवार | देव उठनी | शुक्ल | एकादशी 20 नवंबर 07:14 से शुरू | 06:48 |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | उत्पन्ना | कृष्ण | 3 दिसंबर 23:04 से 4 दिसंबर 23:45 | 06:59 |
*20 नवंबर को सूर्योदय (06:48) के समय दशमी है और एकादशी 07:14 पर शुरू होती है; हमारा इंजन देव उठनी का व्रत 20 नवंबर को ही दे रहा है। इस तारीख पर अलग-अलग पंचांग अलग दिन दिखा सकते हैं — पूरा हिसाब देव उठनी एकादशी 2026 वाले लेख में है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
दो पारंपरिक कारण बताए जाते हैं, और दोनों साथ-साथ माने जाते हैं।
कथा के अनुसार: मुर नाम के दैत्य का पाप एकादशी के दिन चावल में निवास करता है, इसलिए इस दिन चावल छोड़ा जाता है। यही कथा कुछ परंपराओं में सहस्रकवच के नाम से भी मिलती है।
व्यावहारिक कारण: चावल और अनाज छोड़ने से पाचन को पखवाड़े में एक दिन आराम मिलता है। हल्का भोजन और ज़्यादा जप-पाठ — यही व्रत का ढांचा है।
चावल वाले सवाल पर अलग से विस्तार से लिखा है: एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते।
एकादशी व्रत कितने तरह से रखा जाता है?
व्रत की कठोरता परिवार, संप्रदाय और अपनी सामर्थ्य पर निर्भर है। तीन प्रचलित रूप हैं:
- निर्जला — पानी भी नहीं। सबसे कठिन रूप; जो नियमित व्रत रखते हैं और जिनका शरीर साथ देता है, वही इसे चुनते हैं। बाकी लोग धीरे चलें और फलाहार से शुरू करें।
- फलाहार — ऊपर की लिस्ट में से फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू आदि; दिन में एक या दो बार। सबसे प्रचलित रूप।
- एक समय भोजन — दिन में एक बार, अनाज-रहित भोजन। बच्चों, बुज़ुर्गों और काम पर जाने वालों के लिए सहज।
तीनों में एक बात समान है: चावल और अनाज नहीं। बाकी सब में परंपरा के अनुसार फर्क है — अपनी सामर्थ्य के हिसाब से चुनें।
पारण का सही नियम क्या है?
पारण यानी व्रत खोलना — व्रत के बाद का पहला भोजन। इसका नियम तीन बातों पर टिका है:
- पारण एकादशी के दिन नहीं, अगले दिन द्वादशी (बारहवीं तिथि) में करें।
- सूर्योदय के बाद करें, और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पूरा कर लें।
- परंपरा में हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा — में पारण नहीं करते; उसे बीतने दें।
एक दुर्लभ स्थिति भी है: अगर द्वादशी अगले दिन सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तो पारण सूर्योदय पर ही कर लिया जाता है।
इसीलिए पंचांग में "पारण समय" हमेशा एक खिड़की की तरह दिया जाता है — इतने बजे से इतने बजे तक। उसी खिड़की में व्रत खोलें।
उदाहरण: रमा एकादशी 2026 का पारण
रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को है। एकादशी तिथि 4 नवंबर 11:04 से 5 नवंबर 10:36 तक चलती है, और 5 नवंबर को दिल्ली में सूर्योदय 06:36 पर है — यानी सूर्योदय पर एकादशी है, इसलिए व्रत 5 नवंबर को।
पारण अगले दिन, 6 नवंबर को। हमारे इंजन के हिसाब से दिल्ली में पारण का समय 06:37 से 10:31 तक है — सूर्योदय के बाद शुरू और द्वादशी रहते-रहते पूरा। इसी तरीके से हर एकादशी का पारण समय निकलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चावल मना है तो समक चावल कैसे खा सकते हैं?
समक (सामा) के नाम में "चावल" है, पर यह धान का चावल नहीं है। परंपरा में इसे व्रत का अन्न माना गया है, इसलिए यह लिस्ट में है और सामान्य चावल नहीं।
टमाटर और बैंगन खाएं या नहीं?
यह परिवार की परंपरा पर है। कई घरों में इन्हें भी एकादशी में नहीं लिया जाता। अगर आपके घर में यह नियम है तो उसका पालन करें; न हो तो घर के बड़ों से पूछ लें।
क्या पारण एकादशी की रात कर सकते हैं?
परंपरा में नहीं। पारण अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद ही किया जाता है। रात में तिथि बदल भी जाए, तब भी सूर्योदय का इंतज़ार किया जाता है।
क्या पारण का समय हर शहर में एक जैसा होता है?
नहीं। तिथि का समय लगभग एक ही रहता है, पर सूर्योदय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए पारण की खिड़की कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है। ऊपर के समय दिल्ली के हैं।
देव उठनी एकादशी 2026 में 20 नवंबर को ही क्यों?
क्योंकि इंजन के अनुसार उस दिन एकादशी 07:14 पर लगती है और सूर्योदय (06:48) पर अभी दशमी चल रही होती है। ऐसी स्थिति में पंचांग अलग राय रख सकते हैं। पूरा विस्तार देव उठनी वाले लेख में है।
एकादशी के अलावा और किन तिथियों पर खाने-पीने के नियम हैं?
अमावस्या और पूर्णिमा पर भी कई घरों में नियम चलते हैं। उनकी 2026 की तारीखें और नियम यहां हैं: अमावस्या और पूर्णिमा 2026 की पूरी लिस्ट।
व्रत के दिन क्या करें — छोटी चेकलिस्ट
- एक दिन पहले: ऊपर की टेबल से तय करें कि व्रत किस दिन है, और फलाहार का सामान घर में रख लें।
- व्रत के दिन: अनाज, दाल, प्याज़-लहसुन से दूरी; फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सेंधा नमक से काम चलाएं।
- अगले दिन: द्वादशी में सूर्योदय के बाद, पंचांग की पारण खिड़की में व्रत खोलें।
अपने शहर का सूर्योदय, तिथि और पारण समय हमारे दैनिक पंचांग में रोज़ मिलता है।