सोमवार व्रत विधि 2026: 16 सोमवार व्रत कैसे करें, क्या खाएं, उद्यापन कब और कथा
सोमवार व्रत किसी भी सोमवार से शुरू किया जा सकता है, 16 सोमवार लगातार रखा जाता है और 17वें सोमवार उद्यापन होता है। यहाँ पूरी विधि, भोजन के नियम, छोटी कथा और सितंबर–नवंबर 2026 के सभी सोमवार की तारीखें हैं।
सोमवार व्रत भगवान शिव और माता पार्वती का व्रत है। इसे किसी भी सोमवार से शुरू किया जा सकता है; परंपरा में श्रावण या चैत्र/कार्तिक शुक्ल पक्ष के सोमवार को शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है। 16 सोमवार लगातार व्रत रखा जाता है और 17वें सोमवार को उद्यापन (समापन पूजा) होता है। दिन में एक बार भोजन, शाम की पूजा के बाद, या फलाहार लिया जाता है। अगले सोमवार 7, 14, 21 और 28 सितंबर 2026 हैं — पूरी सूची नीचे है।
16 सोमवार व्रत क्या है और कब से शुरू करें?
सोमवार का दिन शिव का दिन माना जाता है। "सोलह सोमवार" का मतलब है 16 सोमवार बिना क्रम तोड़े व्रत रखना। 16 पूरे होने पर 17वें सोमवार को उद्यापन किया जाता है।
शुरुआत के लिए कोई एक तय तारीख नहीं है। परंपरा के अनुसार श्रावण (सावन) के सोमवार शिव को सबसे प्रिय माने जाते हैं, इसलिए ज़्यादातर लोग सावन से शुरू करते हैं। चैत्र या कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष (अमावस्या के बाद बढ़ते चाँद का पखवाड़ा) का सोमवार भी अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर मन बना है, तो आने वाला कोई भी सोमवार ठीक है।
सावन में कौन सा सोमवार किस दिन पड़ा और उत्तर-दक्षिण भारत में गिनती अलग क्यों होती है, यह हमने सावन 2026 सोमवार व्रत कैलेंडर में अलग से लिखा है।
सोमवार व्रत की विधि क्या है?
विधि सरल है और घर के सामान से हो जाती है। क्रम इस तरह रखें:
- सुबह स्नान और संकल्प: स्नान के बाद साफ, हो सके तो सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें। संकल्प का मतलब है मन में या बोलकर यह तय करना कि "मैं 16 सोमवार शिव-पार्वती का व्रत रखूँगा/रखूँगी।" पहले सोमवार को यह ज़रूर करें।
- जल-अभिषेक: अभिषेक यानी शिवलिंग पर धार बनाकर जल चढ़ाना। तांबे या किसी साफ लोटे से जल अर्पित करें। घर में शिवलिंग न हो तो पास के मंदिर जा सकते हैं या शिव-पार्वती के चित्र के सामने पूजा कर सकते हैं।
- बेल पत्र और सफेद चीज़ें: बेल पत्र (बेल के पेड़ की तीन पत्तियों वाली टहनी) शिव पूजा का मुख्य अंग है। साथ में सफेद फूल, दूध, चावल या खीर जैसी सफेद चीज़ें चढ़ाई जाती हैं। जो उपलब्ध हो, वही पर्याप्त है।
- धूप-दीप और मंत्र: दीया जलाएँ, धूप दें और शिव मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जप करें। संख्या की कोई बाध्यता नहीं है; जितना शांति से हो सके, उतना काफी है।
- कथा: सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा का सार नीचे दिया है।
- शाम की पूजा और आरती: शाम को दोबारा दीप जलाकर शिव आरती करें। इसके बाद ही भोजन लें।
पूरे दिन मन शांत रखें और झगड़े से दूर रहें; परंपरा में इसे पूजा का ही हिस्सा माना गया है।
सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?
परंपरा में दो तरीके चलते हैं। पहला — दिन में एक बार भोजन, वह भी शाम की पूजा के बाद। दूसरा — पूरे दिन फलाहार, यानी फल, दूध और व्रत में चलने वाली चीज़ें। दोनों में से जो शरीर और दिनचर्या के हिसाब से ठीक लगे, वह चुनें।
| क्या लें | क्या टाल दें |
|---|---|
| फल, दूध, दही, खीर | अनाज (गेहूँ, चावल) — अगर फलाहार रख रहे हैं |
| साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा, मखाना | प्याज़, लहसुन, मांस-मदिरा |
| सेंधा नमक (जिन घरों में नमक की छूट है) | सामान्य नमक — कई परिवार इसे व्रत में नहीं लेते |
| पानी, नारियल पानी, नींबू पानी | बहुत तला-भुना, भारी भोजन |
दो बातें पहले ही साफ कर लें। पहली, नमक और पानी के नियम घर-घर अलग हैं; अपने घर की परंपरा को ही मानें। दूसरी, अगर स्वास्थ्य की कोई स्थिति है, दवा चल रही है या गर्भावस्था है, तो नियम हल्का रखें — फलाहार लें, पानी पिएँ। श्रद्धा नियम में है, भूखे रहने में नहीं।
सोमवार व्रत कथा (संक्षेप में)
कथा के अनुसार, एक बार शिव और पार्वती अमरावती नगर के एक शिव मंदिर में रुके और चौसर खेलने बैठे। पार्वती ने मंदिर के पुजारी से पूछा कि कौन जीतेगा। पुजारी ने बिना सोचे शिव का नाम ले दिया, पर जीत पार्वती की हुई। इस गलत उत्तर के कारण पुजारी को कष्ट उठाना पड़ा।
कुछ समय बाद उसी मंदिर में आई देवकन्याओं ने पुजारी को सोलह सोमवार व्रत की विधि बताई। पुजारी ने श्रद्धा से 16 सोमवार व्रत किए और उसका कष्ट दूर हुआ। यह देखकर पार्वती ने भी यही व्रत किया, और कथा के अनुसार उनके पुत्र कार्तिकेय, जो नाराज़ होकर दूर चले गए थे, वापस लौट आए।
आगे कथा में एक ब्राह्मण युवक और फिर एक रानी का प्रसंग आता है — दोनों ने 16 सोमवार पूरे किए और कथा के अनुसार उनकी मनोकामना पूरी हुई। कई क्षेत्रों में यही कथा एक ब्राह्मणी के पात्र के साथ भी सुनाई जाती है। पात्र बदलते हैं, संदेश एक है: नियम और श्रद्धा। पूरी कथा घर की व्रत-कथा पुस्तिका से पढ़ें।
16 सोमवार व्रत का उद्यापन कब और कैसे करें?
उद्यापन का मतलब है व्रत का विधिवत समापन। यह 16 सोमवार पूरे होने के बाद 17वें सोमवार को किया जाता है। पूजा बाकी सोमवारों जैसी ही, बस थोड़ा विस्तार से।
- सुबह स्नान करें और संकल्प में यह भाव रखें कि 16 सोमवार पूरे हुए और आज समापन है।
- शिवलिंग पर जल-अभिषेक, बेल पत्र, सफेद फूल और दूध-खीर का भोग।
- कथा पढ़ें और आरती करें।
- प्रसाद परिवार और पड़ोस में बाँटें। जिन घरों में परंपरा है, वहाँ अपनी क्षमता के अनुसार भोजन या वस्तु दान की जाती है — यह भाव के लिए है, किसी "फल" के सौदे के लिए नहीं।
- उद्यापन के दिन भी एक बार भोजन, पूजा के बाद।
किसी कारण 17वें सोमवार को उद्यापन न हो पाए, तो घर के बड़ों या पुरोहित से पूछकर अगले सोमवार को कर लें।
सितंबर–नवंबर 2026 के सोमवार: व्रत की तारीखें
नीचे सितंबर से नवंबर 2026 तक के सभी सोमवार दिए हैं। अगर आप 7 सितंबर से शुरू करते हैं, तो बाईं ओर का क्रमांक आपकी व्रत-संख्या है। बाद में शुरू करने पर अपने पहले सोमवार से गिनती करें।
| क्रम (7 सितंबर से) | तारीख | विशेष |
|---|---|---|
| 1 | 7 सितंबर 2026 | पहला सोमवार — संकल्प का दिन |
| 2 | 14 सितंबर | — |
| 3 | 21 सितंबर | — |
| 4 | 28 सितंबर | — |
| 5 | 5 अक्टूबर | — |
| 6 | 12 अक्टूबर | — |
| 7 | 19 अक्टूबर | — |
| 8 | 26 अक्टूबर | — |
| 9 | 2 नवंबर | — |
| 10 | 9 नवंबर | सोमवती अमावस्या — सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या, शिव पूजा के लिए विशेष मानी जाती है |
| 11 | 16 नवंबर | छठ का उषा अर्घ्य (छठ के अंतिम दिन सुबह सूर्य को अर्घ्य)। जो छठ कर रहे हैं, वे पहले उसके नियम पूरे करें, फिर सोमवार पूजा |
| 12 | 23 नवंबर | — |
| 13 | 30 नवंबर | — |
7 सितंबर से शुरू करने पर 16 में से 13 सोमवार इस सूची में हैं; बाकी तीन दिसंबर में पड़ेंगे और उद्यापन उसके बाद वाले सोमवार को होगा। तारीखें अपने कैलेंडर में पहले ही नोट कर लें।
हर सोमवार की तिथि, सूर्योदय-सूर्यास्त और शुभ चौघड़िया हमारे दैनिक पंचांग में रोज़ अपडेट होते हैं।
सोमवार व्रत से जुड़े सवाल
कोई सोमवार छूट जाए तो क्या व्रत टूट गया?
नहीं। परंपरा में यह छूट है कि अगले सोमवार से गिनती वहीं से आगे बढ़ा दें, जहाँ छूटी थी, और 16 पूरे होने पर उद्यापन कर लें। मन में कोई भय न रखें; श्रद्धा से फिर जुड़ जाना ही पर्याप्त है।
क्या सोमवार व्रत सिर्फ अविवाहित लड़कियों के लिए है?
नहीं। परंपरा में महिलाएँ, पुरुष, विवाहित-अविवाहित सब रखते हैं। कोई भी अपने मन की शांति और शिव-पार्वती की भक्ति के लिए रख सकता है।
क्या सोमवार व्रत के साथ मंगलवार या गुरुवार का व्रत भी रख सकते हैं?
हाँ, बहुत लोग रखते हैं, लेकिन शरीर पर एक साथ बोझ न डालें। मंगलवार हनुमान जी का दिन है — उस दिन हनुमान चालीसा का पाठ प्रचलित है। गुरुवार बृहस्पति (गुरु) का दिन है; उसकी पूजा-विधि गुरु ग्रह और गुरुवार पूजा में अलग से है। हर दिन का नियम अलग है, इन्हें आपस में मिलाएँ नहीं।
क्या 16 के बाद भी सोमवार व्रत जारी रख सकते हैं?
हाँ। उद्यापन 16 का समापन है, रोक नहीं। कई लोग इसके बाद भी हर सोमवार या सावन के सोमवार व्रत रखते हैं।
व्रत का फल कब मिलता है?
इस पर कोई गारंटी न दी जा सकती है, न दी जानी चाहिए। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया व्रत मन को स्थिर करता है — यही उसका सबसे सीधा अनुभव है। बाकी शिव पर छोड़ दें।
अंत में एक बात: यह विधि सामान्य परंपरा पर आधारित है। आपके घर, कुल या गुरु की परंपरा में कुछ अलग हो, तो वही सबसे ऊपर है।