मंगलवार व्रत विधि 2026: हनुमान जी का व्रत कैसे करें, कितने मंगलवार, क्या खाएं, कथा
मंगलवार व्रत हनुमान जी का व्रत है, परंपरा के अनुसार लगातार 21 मंगलवार (कुछ 11 या 45)। किसी भी मंगलवार से शुरू करें — अगला 8 सितंबर 2026 है। एक समय बिना नमक का भोजन, लाल फूल, सिंदूर-चोला, गुड़-चना और हनुमान चालीसा।
मंगलवार व्रत हनुमान जी का व्रत है, जो ज्योतिष परंपरा में मंगल ग्रह से भी जुड़ा माना जाता है। परंपरा के अनुसार यह लगातार 21 मंगलवार रखा जाता है; कुछ लोग 11 या 45 मंगलवार भी रखते हैं। व्रत किसी भी मंगलवार से शुरू किया जा सकता है — अगला मंगलवार 8 सितंबर 2026 है। दिन में एक बार बिना नमक का भोजन, लाल फूल, सिंदूर-चोला, गुड़-चना और हनुमान चालीसा — बस इतनी ही विधि है।
मंगलवार का व्रत किसके लिए और क्यों रखा जाता है?
मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन का व्रत मुख्य रूप से हनुमान जी की भक्ति के लिए रखा जाता है।
ज्योतिष परंपरा में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से भी है। मंगल को साहस, ऊर्जा और आत्मबल का कारक माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की उपासना से मन में धैर्य और बल आता है। यह भक्ति का मार्ग है, किसी परिणाम की गारंटी नहीं।
मंगलवार व्रत कितने मंगलवार रखें और कब शुरू करें?
सबसे प्रचलित गिनती 21 मंगलवार की है। कुछ परिवार 11 मंगलवार का छोटा संकल्प लेते हैं और कुछ 45 मंगलवार तक रखते हैं। जो संख्या आप आराम से निभा सकें, वही चुनें।
शुरुआत के लिए कोई विशेष तिथि ज़रूरी नहीं है। कोई भी मंगलवार चुनें, पहले दिन संकल्प लें और गिनती शुरू करें। संकल्प का मतलब है — हनुमान जी के सामने मन में यह तय करना कि कितने मंगलवार और किस भाव से व्रत रखेंगे।
अगर घर या गुरु की कोई अलग परंपरा है, तो वही सबसे ऊपर है।
मंगलवार व्रत की विधि क्या है? (step by step)
- सुबह स्नान और संकल्प: सूर्योदय के आसपास स्नान करें। साफ कपड़े पहनें; लाल या केसरिया रंग परंपरा में शुभ माना जाता है। हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने व्रत का संकल्प लें।
- पूजा की तैयारी: दीपक जलाएं। लाल फूल रखें — गुड़हल या लाल गुलाब आम तौर पर चढ़ाए जाते हैं।
- सिंदूर-चोला: चोला का मतलब है सिंदूर और तेल का लेप, जो हनुमान जी की मूर्ति पर चढ़ाया जाता है। घर में मूर्ति न हो तो तस्वीर पर सिंदूर का तिलक भी पर्याप्त है। कई लोग मंदिर जाकर चोला चढ़ाते हैं।
- भोग: गुड़ और भुने चने का भोग लगाएं। यह हनुमान जी का पारंपरिक प्रसाद है।
- पाठ: हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान चालीसा तुलसीदास जी की 40 चौपाइयों की स्तुति है — पूरा पाठ और अर्थ आप हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयां पेज पर पढ़ सकते हैं। समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी किया जाता है। सुंदरकांड रामचरितमानस का वह कांड है जिसमें हनुमान जी लंका जाते हैं।
- कथा और आरती: मंगलवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें (नीचे दी है)। फिर आरती करें।
- दिन भर: मन शांत रखें, कड़वे बोल से बचें। शाम को फिर दीपक जलाकर चालीसा पढ़ें और उसके बाद भोजन करें।
मंगलवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?
परंपरा के अनुसार बहुत लोग इस व्रत में दिन में एक बार भोजन करते हैं, और वह भोजन बिना नमक का होता है। कुछ लोग फलाहार रखते हैं — यानी सिर्फ फल, दूध और मेवे। दोनों ही तरीके प्रचलित हैं।
| चीज़ | व्रत के दिन |
|---|---|
| गुड़ और भुने चने (प्रसाद) | हां |
| फल, दूध, दही, मेवे | हां |
| एक समय बिना नमक का सादा भोजन (खीर, हलवा, रोटी-घी) | हां, अधिकतर लोग |
| नमक वाला सामान्य भोजन, बार-बार खाना | व्रत के दिन नहीं |
| प्याज़-लहसुन, मांसाहार, शराब | व्रत के दिन नहीं |
अगर आप नियमित दवा लेते हैं, गर्भवती हैं, या डॉक्टर ने समय पर भोजन करने को कहा है, तो फलाहार वाला रूप रखें या सिर्फ सात्विक भोजन करें। भक्ति भाव मुख्य है, भूखा रहना नहीं।
मंगलवार व्रत कथा (संक्षेप में)
कथा के अनुसार एक ब्राह्मण दंपती की कोई संतान नहीं थी। पति हनुमान जी की उपासना के लिए वन चला गया। पत्नी घर पर हर मंगलवार व्रत रखती और हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करती थी।
एक बार कई मंगलवार ऐसे बीते जब वह भोग नहीं लगा पाई, इसलिए उसने भोजन भी नहीं किया। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर हनुमान जी एक बालक के रूप में प्रकट हुए और पुत्र बनकर उसके पास रहे। यही बालक 'मंगलिया' कहलाया।
पति वन से लौटा तो उसे बालक पर संदेह हुआ। कथा के अनुसार हनुमान जी ने स्वप्न में उसे सच बताया और दंपती ने बालक को अपने पुत्र के रूप में स्वीकार किया। मंगलवार व्रत की परंपरा इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है। कथा का सार सीधा है — सच्ची श्रद्धा और निभाया हुआ नियम हनुमान जी को प्रिय हैं।
मंगलवार व्रत का उद्यापन कैसे करें?
उद्यापन का मतलब है व्रत का विधिपूर्वक समापन। जब आपके संकल्प के मंगलवार — 11, 21 या 45 — पूरे हो जाएं, तो अंतिम मंगलवार को उद्यापन किया जाता है।
- उस दिन पूजा रोज़ की तरह करें, पर थोड़ा और समय दें। हनुमान चालीसा के साथ सुंदरकांड का पाठ करें।
- हनुमान जी को नया चोला, लाल फूल और गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
- प्रसाद परिवार, पड़ोसियों और मंदिर में बांटें।
- सामर्थ्य हो तो किसी को भोजन कराएं या किसी ज़रूरतमंद की मदद करें। यह कृतज्ञता से किया जाता है, किसी फल की शर्त पर नहीं।
- हनुमान जी को धन्यवाद देकर संकल्प पूरा करें। बहुत लोग इसके बाद भी हर मंगलवार बिना व्रत के सादी पूजा जारी रखते हैं।
उद्यापन की विधि हर क्षेत्र में थोड़ी अलग होती है। घर के बड़ों या पुरोहित से पूछकर अपनी परंपरा का ही पालन करें।
व्रत शुरू करने के लिए आने वाले मंगलवार (सितंबर–नवंबर 2026)
अगर आप इसी हफ्ते शुरू करना चाहते हैं, तो नीचे अगले तीन महीनों के सभी मंगलवार दिए हैं। जिस मंगलवार को कोई पर्व भी है, वह साथ में लिखा है।
| क्रम | मंगलवार | उस दिन का पर्व |
|---|---|---|
| 1 | 8 सितंबर 2026 | — |
| 2 | 15 सितंबर 2026 | — |
| 3 | 22 सितंबर 2026 | — |
| 4 | 29 सितंबर 2026 | — |
| 5 | 6 अक्टूबर 2026 | — |
| 6 | 13 अक्टूबर 2026 | — |
| 7 | 20 अक्टूबर 2026 | दशहरा |
| 8 | 27 अक्टूबर 2026 | — |
| 9 | 3 नवंबर 2026 | — |
| 10 | 10 नवंबर 2026 | गोवर्धन पूजा / बेस्तु वरस |
| 11 | 17 नवंबर 2026 | गोपाष्टमी |
| 12 | 24 नवंबर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा |
8 सितंबर से शुरू करने पर 11 मंगलवार का संकल्प 17 नवंबर 2026 को पूरा होगा। 21 मंगलवार का संकल्प लगभग पांच महीने चलता है। पर्व वाले मंगलवार को व्रत रखने में कोई रोक नहीं है — बस उस दिन की पूजा थोड़ी लंबी हो जाती है।
मंगलवार व्रत से जुड़े आम सवाल
अगर बीच में कोई मंगलवार छूट जाए तो?
घबराने की कोई बात नहीं। परंपरा में यह माना जाता है कि छूटे हुए मंगलवार के बाद अगले मंगलवार से गिनती आगे बढ़ा दी जाती है। मन हो तो अंत में एक मंगलवार और जोड़ लें। भाव मुख्य है, हिसाब नहीं।
क्या महिलाएं और बच्चे भी यह व्रत रख सकते हैं?
हां। हनुमान जी की पूजा में ऐसी कोई रोक नहीं है। मासिक धर्म के दिनों में कई घरों में महिलाएं पूजा न करके सिर्फ मन में नाम-जप करती हैं और गिनती आगे रखती हैं — यह घर की परंपरा पर निर्भर है।
मंगलवार व्रत में नमक क्यों नहीं खाते?
यह परंपरा से चला आ रहा नियम है। बिना नमक का भोजन व्रत को संयम का रूप देता है और याद दिलाता है कि आज का दिन साधारण दिन नहीं है। अपने घर का नियम मानें।
क्या यह व्रत सिर्फ कुंडली में मंगल दोष वालों के लिए है?
नहीं। यह सबसे पहले हनुमान भक्ति का व्रत है। ज्योतिष परंपरा में इसे मंगल ग्रह के सम्मान से भी जोड़ा जाता है, पर कोई भी श्रद्धालु इसे रख सकता है। कुंडली की कोई शर्त नहीं है, और ज्योतिष संभावना की भाषा बोलता है, गारंटी की नहीं।
बाकी वारों के व्रत से यह कैसे अलग है?
हर वार का एक देव और एक ग्रह माना जाता है। सोमवार शिव जी का दिन है — उसकी विधि और तारीखें सोमवार व्रत कैलेंडर में हैं। गुरुवार बृहस्पति यानी गुरु ग्रह का दिन है — गुरु ग्रह और गुरुवार की पूजा पर अलग लेख है। मंगलवार की पहचान लाल रंग, चोला और गुड़-चना है।
हर मंगलवार का सूर्योदय, तिथि और राहुकाल हमारे दैनिक पंचांग में रोज़ अपडेट होता है, जिससे पूजा का समय तय करना आसान रहता है।
शुरू करने के लिए बस इतना करें: अगला मंगलवार, 8 सितंबर 2026, चुनें; तय करें कि 11 या 21 मंगलवार रखेंगे; घर में गुड़-चना और लाल फूल रख लें; और हनुमान चालीसा याद कर लें। बाकी श्रद्धा से हो जाएगा।