जन्माष्टमी 2026: 4 सितंबर की रात निशीथ पूजा का समय शहर-अनुसार — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत 8 शहरों की तालिका

निशीथ काल रात का मध्य-बिंदु है, घड़ी के 12 नहीं — इसलिए यह शहर-दर-शहर बदलता है। 4 सितंबर 2026 की रात के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर और लखनऊ की गणना की हुई निशीथ खिड़की, और अष्टमी के 00:14 पर समाप्त होने का हर शहर के लिए अर्थ।

जन्माष्टमी की पूजा आधी रात को होती है — यह सब जानते हैं। पर "आधी रात" घड़ी के 12 बजे नहीं, बल्कि निशीथ काल है, जो सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के ठीक बीच का मुहूर्त है। और क्योंकि सूर्यास्त कोलकाता में दिल्ली से लगभग 49 मिनट पहले होता है, निशीथ का समय भी हर शहर में अलग पड़ता है। इस लेख में 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) की रात के लिए आठ शहरों की निशीथ खिड़की गणना करके दी गई है, और यह भी कि अष्टमी तिथि 5 सितंबर को 00:14 पर समाप्त होने से किन शहरों में यह खिड़की तिथि के बाहर निकल जाती है।

संक्षेप में: दिल्ली में निशीथ 23:57 से 00:43

दिल्ली में 4 सितंबर को सूर्यास्त 18:38 और 5 सितंबर को सूर्योदय 06:02 है। इस 11 घंटे 24 मिनट की रात का मध्य-बिंदु 00:20 पर पड़ता है, और उसके आगे-पीछे लगभग 23-23 मिनट का निशीथ काल 23:57 से 00:43 तक है। अष्टमी तिथि 00:14 पर जा रही है, यानी दिल्ली की खिड़की के पहले 17 मिनट अष्टमी में और बाकी नवमी में हैं। शेष शहरों के अंक नीचे तालिका में हैं।

निशीथ काल क्या है और कैसे निकलता है

शास्त्र में रात को 15 मुहूर्तों में बाँटा गया है। आठवाँ मुहूर्त, जो रात के ठीक मध्य में पड़ता है, निशीथ कहलाता है। यह केवल सूर्य की स्थिति पर निर्भर है — तिथि या नक्षत्र का इसमें कोई भाग नहीं, इसीलिए निशीथ हर रात होता है। जन्माष्टमी उसे पूजा के लिए इसलिए चुनती है क्योंकि परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की अर्धरात्रि में हुआ था; इसके पीछे कोई और कारण शास्त्र नहीं बताता, और हम भी नहीं जोड़ रहे। गणना चार चरणों की है:

  1. उस दिन का सूर्यास्त और अगले दिन का सूर्योदय लें — दोनों अपने शहर के।
  2. दोनों के बीच की अवधि (रात्रिमान) निकालें। सितंबर के आरंभ में यह दिल्ली में 11 घंटे 24 मिनट और चेन्नई-बेंगलुरु में 11 घंटे 42 मिनट तक है।
  3. रात्रिमान का आधा सूर्यास्त में जोड़ें — यही स्थानीय मध्यरात्रि है, जो इन आठ शहरों में घड़ी के 12:00 से 25 मिनट पहले (कोलकाता) से लेकर 37 मिनट बाद (मुंबई) तक पड़ती है।
  4. रात्रिमान को 30 से भाग दें (लगभग 23 मिनट); मध्यरात्रि से उतना पहले निशीथ शुरू, उतना बाद समाप्त। पूरी खिड़की लगभग 46 मिनट की बनती है।

8 शहरों की निशीथ तालिका — 4–5 सितंबर 2026 की रात

सभी समय IST, 24-घंटे प्रारूप में। सूर्यास्त 4 सितंबर का, सूर्योदय 5 सितंबर का। सभी आठ शहरों के सूर्यास्त-सूर्योदय AstroVedansh पंचांग इंजन से हैं; कोई छपा पंचांग इनसे 1–2 मिनट इधर-उधर दे सकता है — पर दोनों सिरे एक ही दिशा में खिसकते हैं, इसलिए मध्य-बिंदु और खिड़की पर असर नहीं के बराबर है।

शहरसूर्यास्त (4 सित.)सूर्योदय (5 सित.)स्थानीय मध्यरात्रिनिशीथ कालअष्टमी (00:14 तक) का हिस्सा
दिल्ली18:3806:0200:2023:57 – 00:4323:57 – 00:14 (17 मिनट)
मुंबई18:4906:2500:3700:14 – 01:00लगभग शून्य — पूरी खिड़की नवमी में
कोलकाता17:4905:2123:3523:12 – 23:58पूरी खिड़की अष्टमी में
चेन्नई18:1605:5800:0723:44 – 00:3023:44 – 00:14 (30 मिनट)
बेंगलुरु18:2706:0900:1823:55 – 00:4123:55 – 00:14 (19 मिनट)
हैदराबाद18:2606:0300:1523:51 – 00:3823:51 – 00:14 (23 मिनट)
जयपुर18:4206:0800:2500:02 – 00:4800:02 – 00:14 (12 मिनट)
लखनऊ18:2205:4800:0523:42 – 00:2823:42 – 00:14 (32 मिनट)

पढ़ने का सरल तरीका: पूर्व के शहर (कोलकाता) में निशीथ घड़ी के 12 बजे से पहले ही निपट जाता है, पश्चिम के शहर (मुंबई, जयपुर) में 12 बजे के बाद शुरू होता है; दक्षिण के शहर बीच में पड़ते हैं।

अष्टमी 00:14 पर समाप्त — इसका क्या अर्थ है

भाद्रपद (अमांत गणना में श्रावण) कृष्ण अष्टमी 4 सितंबर को 02:25 पर लगी और 5 सितंबर को 00:14 पर छूट रही है। तिथि का यह समय पूरे भारत में एक ही है — तिथि चंद्र और सूर्य की कोणीय दूरी से तय होती है, जो शहर पर निर्भर नहीं करती। शहर से केवल सूर्योदय-सूर्यास्त बदलते हैं, इसलिए निशीथ तो शहर-दर-शहर अलग है पर अष्टमी की समाप्ति सबके लिए 00:14 ही है।

इसका परिणाम: कोलकाता को छोड़कर हर शहर में निशीथ खिड़की 00:14 के पार निकल जाती है, और मुंबई में तो खिड़की शुरू ही 00:14 पर होती है। तो क्या करें? यहाँ दो मत हैं, और दोनों परंपरा-सम्मत हैं:

  • तिथि-प्रधान मत: व्रत का दिन अष्टमी से तय हुआ (4 सितंबर), और जन्म-पूजा भी अष्टमी रहते ही हो — खिड़की के आरंभ में करें; जहाँ खिड़की देर से है (मुंबई, जयपुर) वहाँ स्थानीय मध्यरात्रि से थोड़ा पहले, ताकि 00:14 से पूर्व पूरी हो जाए।
  • निशीथ-प्रधान मत: दिन तय हो जाने के बाद पूजा उसी रात के निशीथ में हो; तिथि उस क्षण बदल भी जाए तो दोष नहीं — तालिका की खिड़की ज्यों-की-त्यों लें।

अधिकांश मंदिर और घर दूसरे मत से चलते हैं और घड़ी के 12 बजे के आसपास जन्म मनाते हैं। यदि आपके कुल या गुरु-परंपरा में पहला मत है, तो 00:14 से पहले पूरा कर लें। हम दोनों में से किसी को श्रेष्ठ नहीं कह रहे — शास्त्र में दोनों के आधार हैं।

4 सितंबर का पंचांग-चित्र (दिल्ली)

  • तिथि: कृष्ण अष्टमी — 4 सितंबर 02:25 से 5 सितंबर 00:14 तक; फिर नवमी (5 सितंबर 21:54 तक)
  • नक्षत्र: 4 सितंबर सूर्योदय पर रोहिणी (प्रथम पद); 5 सितंबर सूर्योदय पर मृगशिरा — रोहिणी की ठीक समाप्ति अपने पंचांग में देखें
  • योग: हर्षण; वार: शुक्रवार
  • सूर्योदय 06:01, सूर्यास्त 18:38; चंद्रोदय 22:28 — केवल उनके लिए प्रासंगिक जिनकी परंपरा में इस रात चंद्र-अर्घ्य है
  • राहुकाल 10:45 – 12:20 — दिन का खंड है, रात्रि-पूजा पर इसका कोई प्रभाव नहीं

अष्टमी और रोहिणी दोनों का एक ही दिन सूर्योदय पर होना इस वर्ष की सुविधा है — उदया-तिथि और नक्षत्र, दोनों रीतियाँ 4 सितंबर पर ही ठहरती हैं, इसलिए तारीख पर सामान्य स्मार्त-वैष्णव मतभेद इस बार प्रायः नहीं है। तारीख की पूरी चर्चा जन्माष्टमी 2026 तिथि-मुहूर्त गाइड में है।

अपने शहर का निशीथ खुद कैसे निकालें

यदि आपका शहर तालिका में नहीं है, तो अपने पंचांग या मौसम-ऐप से 4 सितंबर का सूर्यास्त और 5 सितंबर का सूर्योदय लें। सूर्योदय में 24 घंटे जोड़ें, सूर्यास्त घटाएँ — यह रात्रिमान है। उसका आधा सूर्यास्त में जोड़ें — यह मध्यरात्रि है। रात्रिमान का तीसवाँ भाग मध्यरात्रि से घटाएँ और जोड़ें — यही निशीथ खिड़की है। उदाहरण: सूर्यास्त 18:30, सूर्योदय 06:00 → रात्रिमान 11:30 → मध्यरात्रि 00:15 → निशीथ 23:52 से 00:38। पूजा पूरी खिड़की में कहीं भी शास्त्र-सम्मत है; ठीक मध्य-बिंदु का आग्रह केवल कुछ परंपराओं में है।

निशीथ पूजा की संक्षिप्त विधि

विस्तृत विधि और कथा के लिए जन्माष्टमी पूजा विधि और मध्यरात्रि कथा देखें; यहाँ केवल समय-क्रम है ताकि 46 मिनट की खिड़की के भीतर सब पूरा हो सके:

  1. खिड़की से 20–30 मिनट पहले: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूजा-स्थान और झूला तैयार; पंचामृत, तुलसी, माखन-मिश्री, फल पास रखें।
  2. खिड़की शुरू होते ही: संकल्प, फिर बाल-गोपाल की प्रतिमा का पंचामृत और जल से अभिषेक।
  3. नए वस्त्र, चंदन, पुष्प, तुलसीदल; धूप-दीप; माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग।
  4. स्थानीय मध्यरात्रि (तालिका का मध्य-स्तंभ) पर जन्म-घोष, शंख, आरती; झूला झुलाना।
  5. प्रसाद बाँटना; व्रती अगले दिन सूर्योदय के बाद या नवमी में पारण करें, जैसी कुल-परंपरा हो।

बिना जल्दबाज़ी के यह 40–45 मिनट में निपटता है, इसलिए तैयारी खिड़की से पहले कर लेना ही उसके भीतर रहने की कुंजी है।

सार

4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) की रात जन्माष्टमी का निशीथ काल दिल्ली में 23:57 से 00:43, मुंबई में 00:14 से 01:00, कोलकाता में 23:12 से 23:58, चेन्नई में 23:44 से 00:30, बेंगलुरु में 23:55 से 00:41, हैदराबाद में 23:51 से 00:38, जयपुर में 00:02 से 00:48 और लखनऊ में 23:42 से 00:28 है। अष्टमी तिथि 5 सितंबर 00:14 पर सबके लिए समाप्त होती है; केवल कोलकाता की खिड़की पूरी तरह अष्टमी में है। सूर्योदय-सूर्यास्त शहर-दर-शहर बदलते हैं, इसलिए सीमांत मामलों में अपना स्थानीय पंचांग अवश्य देखें — तिथि-पृष्ठ पर आज की तिथि और उसका समाप्ति-समय मिल जाएगा।

क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार पूजा-समय और विधि में अंतर हो सकता है; अंतिम निर्णय अपने पुरोहित या परंपरा से लें।

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