आज का नक्षत्र — शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
नक्षत्र वह तारा-समूह है जिसमें चंद्रमा आज ठहरा हुआ है — सत्ताईस में से एक, हर एक लगभग एक दिन का।
- नक्षत्र
- Rohini (Pada 1)
- चंद्र राशि
- Vrishabh (Taurus)
सत्ताईस नक्षत्र
राशिचक्र के तीन सौ साठ अंशों को सत्ताईस बराबर हिस्सों में बांटा गया है, हर एक तेरह अंश बीस कला का। चंद्रमा लगभग रोज़ एक नक्षत्र पार करता है। हर नक्षत्र चार पादों में बंटा है, इसीलिए पंचांग में नक्षत्र के साथ पाद भी लिखा जाता है।
जन्म नक्षत्र क्यों मायने रखता है
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो वही जन्म नक्षत्र है। नामकरण का पहला अक्षर इसी से निकलता है, विंशोत्तरी दशा इसी से शुरू होती है, और विवाह के गुण मिलान का बड़ा हिस्सा नक्षत्रों की तुलना पर टिका है।
मुहूर्त में नक्षत्र
रोहिणी, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा और उत्तरा भाद्रपद स्थायी कामों के लिए शुभ माने जाते हैं। पुष्य को खरीदारी के लिए विशेष शुभ माना जाता है, और गुरु पुष्य योग अपने आप में एक अवसर माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नक्षत्र कितने होते हैं?
सत्ताईस। कुछ परंपराओं में अभिजित मिलाकर अट्ठाईस।
नक्षत्र के साथ लिखा "पाद" क्या है?
हर नक्षत्र चार बराबर पादों में बंटा है; पाद बताता है चंद्रमा किस चौथाई में है।
क्या नक्षत्र रोज़ बदलता है?
लगभग रोज़ — चंद्रमा एक नक्षत्र में औसतन एक दिन रहता है।