आज का राहु काल — शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

राहु काल दिन का वह लगभग डेढ़ घंटे का हिस्सा है जिसमें कोई नया काम शुरू करना वर्जित माना जाता है।

राहु काल
10:45 – 12:20
गुलिक काल
07:36 – 09:10
यमगण्ड
15:29 – 17:03

राहु काल कैसे निकाला जाता है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। इनमें से कौन सा हिस्सा राहु काल होगा, यह वार से तय होता है — रविवार को आठवां, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवां, बुधवार को पांचवां, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा। यही कारण है कि राहु काल हर दिन अलग समय पर पड़ता है, और मौसम के साथ भी खिसकता रहता है।

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए

परंपरा इसे नई शुरुआत के लिए वर्जित मानती है — नया व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह की रस्में, कोई महत्वपूर्ण यात्रा, या कोई अनुबंध। जो काम पहले से चल रहा है उस पर राहु काल लागू नहीं होता, और आपात स्थिति में इसका विचार नहीं किया जाता।

गुलिक काल और यमगण्ड

ये दोनों भी दिन के उन्हीं आठ हिस्सों में से एक-एक हैं और अशुभ माने जाते हैं। तीनों कभी एक ही समय पर नहीं पड़ सकते — अगर किसी दिन दो एक जैसे दिखें तो वह गणना की गलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहु काल कितने समय का होता है?

यह दिन के आठवें हिस्से के बराबर होता है — बारह घंटे के दिन में लगभग डेढ़ घंटा।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हां। राहु काल नई शुरुआत पर लागू होता है, नित्य पूजा-पाठ पर नहीं।

क्या राहु काल हर दिन एक ही समय पर होता है?

नहीं। यह वार पर निर्भर करता है और सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ बदलता है।

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