आज का योग और करण — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

पंचांग के पांच अंगों में योग और करण सबसे कम समझे जाने वाले दो हैं — यहां दोनों सीधे शब्दों में।

योग
Dhriti
करण
Bava
वार
Monday

पंचांग के पांच अंग

पंचांग शब्द का अर्थ ही है पांच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। पहले तीन सबको पता होते हैं; बाकी दो कम देखे जाते हैं, पर मुहूर्त की गणना में इनका उतना ही स्थान है।

योग — सत्ताईस

योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर को जोड़कर निकाला जाता है; उस जोड़ को तेरह अंश बीस कला के हिस्सों में बांटने पर सत्ताईस योग बनते हैं, विष्कुम्भ से वैधृति तक। कुछ — विशेषकर व्यतीपात और वैधृति — अशुभ माने जाते हैं।

करण — ग्यारह

करण आधी तिथि होता है, इसलिए हर तिथि में दो करण पड़ते हैं। सात चर करण बार-बार लौटते हैं और चार स्थिर करण महीने में एक बार आते हैं। विष्टि, जिसे भद्रा कहते हैं, विशेष अशुभ मानी जाती है — रक्षाबंधन और होलिका दहन का समय अक्सर इसी भद्रा को देखकर तय होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योग कितने होते हैं?

सत्ताईस, विष्कुम्भ से वैधृति तक।

भद्रा क्या है?

भद्रा विष्टि करण का दूसरा नाम है; इसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं।

करण एक दिन में कितने होते हैं?

हर तिथि में दो, क्योंकि करण आधी तिथि के बराबर होता है।

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